देश के बड़े निजी बैंकों ने जारी किए वित्तीय आंकड़े
भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर की अवधि बेहद शानदार साबित हुई है। देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता HDFC बैंक के साथ-साथ एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने अपने वित्तीय परिणाम घोषित कर दिए हैं। इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि देश के वित्तीय बाजार में मजबूती बनी हुई है और ग्राहकों की तरफ से लोन की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है। आम आदमी से लेकर बड़े निवेशकों की नजरें इन नतीजों पर टिकी थीं, क्योंकि बैंकिंग सेक्टर की चाल से देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का अंदाजा लगाया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारी सीजन से ठीक पहले आए ये नतीजे बैंकिंग सेक्टर में नई जान फूंकने का काम करेंगे। बैंक के शेयरों में निवेश करने वाले लोगों के लिए भी यह तिमाही राहत भरी रही है, क्योंकि बैंकों का मुनाफा उम्मीद के मुताबिक या उससे थोड़ा बेहतर ही रहा है। आइए जानते हैं कि किस बैंक ने इस तिमाही में कैसा प्रदर्शन किया है और आम जनता तथा निवेशकों पर इसका क्या असर पड़ेगा।
HDFC बैंक का मुनाफा बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये हुआ
देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC बैंक ने शनिवार को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे दुनिया के सामने रखे। बैंक का एकल शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,510 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में यह आंकड़ा 18,641 करोड़ रुपये के आसपास था। बैंक के इस प्रदर्शन से बाजार के जानकारों में खुशी की लहर है क्योंकि ये आंकड़े लगभग अनुमानों के मुताबिक ही रहे हैं।
इसके अलावा बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम यानी ब्याज से होने वाली शुद्ध आय में भी 9.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बढ़कर 34,620 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले साल इसी अवधि में 31,550 करोड़ रुपये थी। बैंक की कुल आय और खर्च दोनों में ही संतुलन देखा गया है, जिससे बैंक की वित्तीय स्थिति और ज्यादा मजबूत हुई है।
लोन ग्रोथ और डिपॉजिट के मोर्चे पर मजबूत पकड़
HDFC बैंक के लिए यह तिमाही लोन बांटने और डिपॉजिट जुटाने के मामले में भी काफी बेहतरीन रही है। बैंक के ग्रॉस एडवांस यानी कुल बांटे गए कर्ज में सालाना आधार पर 16.3 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एसएमई सेगमेंट में लोन की मांग 23.5 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जो देश में छोटे कारोबारियों की बढ़ती गतिविधियों को साफ तौर पर दर्शाती है।
बैंक के पास जमा होने वाले पैसों यानी डिपॉजिट में भी 18.8 प्रतिशत की जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। बैंक के पास कुल डिपॉजिट बढ़कर 33,27,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गए हैं। चालू खाता और बचत खाता यानी कासा डिपॉजिट में भी 10.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इन आंकड़ों से यह साबित होता है कि आम लोगों का भरोसा इस बड़े बैंक पर लगातार बना हुआ है।
एनपीए में सुधार से सुधरी बैंकों की सेहत
बैंकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती हमेशा से उनका खराब कर्ज यानी एनपीए संभालना होती है। इस मोर्चे पर भी HDFC बैंक ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। सितंबर तिमाही के अंत तक बैंक का ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट घटकर 1.11 प्रतिशत पर आ गया है, जो पिछली तिमाही में 1.17 प्रतिशत और पिछले साल 1.24 प्रतिशत था। कृषि क्षेत्र को छोड़कर यह अनुपात और भी कम यानी 0.87 प्रतिशत रहा है।
बैंक के नेट एनपीए में भी कमी आई है और यह घटकर 11,851 करोड़ रुपये रह गया है। ऋणदाताओं की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार इस बात का संकेत है कि लोग समय पर अपना कर्ज चुका रहे हैं और बैंक का जोखिम प्रबंधन पूरी तरह से दुरुस्त काम कर रहा है।
एक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक का भी शानदार प्रदर्शन
सिर्फ HDFC बैंक ही नहीं, बल्कि देश के अन्य प्रमुख निजी बैंकों ने भी इस तिमाही में बेहतरीन मुनाफा कमाया है। एक्सिस बैंक ने अपने वित्तीय परिणामों में निवेशकों को चौंका दिया है। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में एक्सिस बैंक का एकीकृत शुद्ध लाभ 39.4 प्रतिशत उछलकर 7,704 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह 5,527 करोड़ रुपये था।
वहीं, आईसीआईसीआई बैंक ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से बाजार में अपनी धाक जमाई है। इन सभी बड़े निजी बैंकों के मजबूत नतीजों ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय बैंकिंग प्रणाली वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी काफी मजबूत और स्थिर स्थिति में खड़ी है।
"देश के निजी बैंकों के ये नतीजे हमारी अर्थव्यवस्था की आंतरिक मजबूती को दर्शाते हैं। लोन की मांग में तेजी और एनपीए में लगातार गिरावट इस बात का प्रमाण है कि वित्तीय अनुशासन बेहतर हुआ है।" — वरिष्ठ वित्तीय विश्लेषक







