कीव और मास्को के बीच चल रही खूनी जंग हर गुजरते दिन के साथ और अधिक भयानक होती जा रही है। यूक्रेन के युद्ध प्रभावित इलाकों से जो ताजा खबरें सामने आ रही हैं, वे किसी बड़े मानवीय संकट की ओर इशारा करती हैं। रूस के प्रमुख शहरों पर हाल ही में रातभर में लगभग 650 ड्रोन दागे जाने की खबर है। इस भीषण हमले से रूसी इलाकों में भारी हड़कंप मच गया है और सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया गया है। यूक्रेन की इस आक्रामक कार्रवाई के बाद रूस ने भी जवाबी हमले तेज कर दिए हैं, जिसमें अब तक छह लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है। जमीन से लेकर आसमान तक छिड़ी इस जंग ने आम नागरिकों की जिंदगी को नर्क बना दिया है और हालात लगातार हाथ से निकलते जा रहे हैं।
इस बीच, जंग का दायरा सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं रहा है बल्कि समुद्र में भी इसका भयानक असर दिखने लगा है। ब्लैक सी यानी काला सागर से गुजर रहे एक तेल टैंकर पर यूक्रेनी ड्रोन ने जोरदार हमला कर दिया। इस हमले के बाद टैंकर में भीषण आग लग गई और आसमान दूर तक काले धुएं से पूरी तरह ढक गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 48 घंटों में भारतीय नाविकों वाले जहाजों पर यह तीसरा हमला है। इस तरह लगातार हो रहे हमलों से समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार और वहां काम करने वाले नाविकों की जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। नाविकों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि युद्ध के मैदान से दूर पानी के जहाजों को भी अब निशाना बनाया जा रहा है।
मौत के साये में फंसा यूक्रेन का शहर और बुनियादी ढांचे पर मार
यूक्रेन के भीतर की स्थिति भी कम डरावनी नहीं है। देश का एक प्रमुख शहर इस समय पूरी तरह "मौत के क्षेत्र" में बदल चुका है और वहां फंसे लोग अकल्पनीय भयावहता का सामना कर रहे हैं। रूस लगातार उन ठिकानों को निशाना बना रहा है जो यूक्रेन की रीढ़ माने जाते हैं। हाल ही में रूस ने यूक्रेन के लाखों गाड़ियों के आवागमन के लिए बेहद अहम माने जाने वाले दो पुलों पर भी ड्रोन हमले किए हैं। इन पुलों पर हुए हमलों से यातायात पूरी तरह चरमरा गया है और जरूरी सामान की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है। बुनियादी ढांचे को तबाह करने की इस रणनीति से आम जनता के लिए पानी, बिजली और भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
दूसरी तरफ, कूटनीतिक मोर्चे पर भी यूक्रेन की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब यूक्रेन की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे अहम मानी जाने वाली एक प्रमुख वस्तु पर यूरोपीय संघ की तरफ से स्थायी प्रतिबंध लगाने का खतरा मंडराने लगा है। अगर यूरोपीय संघ यह कदम उठाता है, तो युद्ध की मार झेल रहे यूक्रेन की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा सकती है। एक तरफ जहां देश के भीतर रूसी हमलों से शहर खंडहर बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की तलवार भी लगातार लटक रही है। इन तमाम मुश्किल हालातों के बीच यूक्रेनी हुक्मरानों की प्रतिक्रियाएं और अधिक आक्रामक होती जा रही हैं, जिससे युद्ध के थमने के कोई भी दूर-दूर तक आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ब्लैक सी की सुरक्षा पर बड़ा संकट
ब्लैक सी में जहाजों पर हो रहे इन ताबड़तोड़ हमलों ने वैश्विक व्यापार जगत की नींद उड़ा दी है। इस समुद्री रास्ते से दुनिया भर में तेल और अनाज का बड़ा कारोबार होता है, लेकिन ड्रोन हमलों की वजह से अब शिपिंग कंपनियों ने अपने कदम पीछे खींचना शुरू कर दिया है। भारतीय नाविकों वाले जहाजों को बार-बार निशाना बनाए जाने से भारत सरकार और समुद्री सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं भी काफी बढ़ गई हैं। टैंकरों में लगने वाली आग और लगातार सुलगते आसमान की तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही हैं कि यह युद्ध अब सिर्फ दो देशों की सीमा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा आर्थिक और सुरक्षा संकट पैदा कर रहा है।
मैदान-ए-जंग में दोनों पक्षों की तरफ से जरा भी नरमी बरतने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। रूस जहां एक तरफ यूक्रेन के शहरों और पुलों को नेस्तनाबूद करने पर तुला है, वहीं यूक्रेन भी अपनी रणनीति बदलते हुए दुश्मन की सीमा के भीतर ड्रोन बारिश कर रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी अधिक भीषण रूप ले सकता है। जब तक कोई मजबूत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता सामने नहीं आती, तब तक आम नागरिकों और समंदर में सफर कर रहे नाविकों की जिंदगी इसी तरह अनिश्चितता और मौत के साये में ही गुजरती रहेगी।




