अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में भारत और रूस के ऊर्जा व्यापार को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले 10 दिनों के भीतर उन देशों पर प्रतिबंधों और 100% टैरिफ को लेकर फैसला ले सकते हैं जो रूस से तेल और गैस का आयात कर रहे हैं। इस दायरे में भारत का नाम भी चर्चा में बना हुआ है, क्योंकि भारत लगातार रूस से ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर रहा है।
तीन श्रेणियों के तहत लागू होगा टैरिफ का नियम
सर्जियो गोर ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस द्वारा पारित 'लिंडसे ओ ग्राम सैक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' (SRIA) कानून के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार मिला है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि ये उपाय किसी खास देश को लक्षित करके नहीं बनाए गए हैं। यह नीति मुख्य रूप से तीन अलग-अलग श्रेणियों—पहला तेल, दूसरा गैस, और तीसरा प्रतिबंधों के उल्लंघन—पर आधारित है। इसी वजह से इस दायरे में भारत के साथ-साथ कई अन्य देश भी शामिल हो सकते हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर प्रगति
जब राजदूत से यह पूछा गया कि क्या भारत को इस मामले में कोई राहत मिल सकती है, तो उन्होंने कहा कि अंतिम फैसला राष्ट्रपति ट्रंप को ही लेना है। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच चल रही व्यापारिक बातचीत पर भी प्रकाश डाला। गोर के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल से चली आ रही जटिल बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों ने काफी प्रगति की है और बड़े मुद्दों को सुलझा लिया गया है। वर्तमान में केवल कुछ छोटी-मोटी बातें और नई चिंताएं ही बची हैं, जिन पर काम चल रहा है।
रक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग की उम्मीद
अमेरिकी राजदूत ने यह भी रेखांकित किया कि अमेरिका रक्षा, आईटी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर चिप निर्माण जैसे क्षेत्रों में भारत के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए बेहद उत्सुक है। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश जल्द ही एक व्यापक व्यापार समझौते पर पहुंचेंगे, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को फायदा होगा।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स पर आधारित इस खबर के दावों की सत्यता की 'The Freelance' स्वतंत्र रूप से पुष्टि करता है। नीतिगत और कूटनीतिक बयानों से जुड़े घटनाक्रमों पर हमारी लगातार नजर बनी हुई है। साभार: संबंधित एजेंसी / मीडिया रिपोर्ट्स।
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