मेरठ/ग्राउंड ब्यूरो — उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से जुड़े बहुचर्चित अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने ऐसा फैसला सुनाया है जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। जिला अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला देते हुए मृतक की पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। इस खौफनाक वारदात में प्यार के चक्कर में पड़कर एक पत्नी ने अपने ही सुहाग को मौत के घाट उतार दिया था। अदालत ने दोनों आरोपियों को इस जघन्य अपराध का मुख्य साजिशकर्ता और कातिल माना है। न्याय की इस लड़ाई में आखिरकार सच्चाई की जीत हुई और अदालत ने दोषियों को उनके किए की सबसे बड़ी सजा दे दी है।
यह पूरा मामला कुछ महीने पहले सामने आया था जब अमित कश्यप की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। शुरू में परिवार को लगा कि यह किसी सामान्य हादसे या सांप के काटने से हुई मौत है। लेकिन जब पुलिस ने इस मामले की परतें उधेड़ीं तो जो सच सामने आया उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। रविता और उसके प्रेमी अमरदीप ने मिलकर अमित को रास्ते से हटाने का खतरनाक प्लान बनाया था। इसके लिए उन्होंने एक सपेरे की मदद से सांप का इंतजाम किया और सोते हुए अमित को कटवा दिया। इस शातिर तरीके से की गई हत्या को हादसा दिखाने की पूरी कोशिश की गई थी, लेकिन कानून के लंबे हाथों से वे बच नहीं पाए।
सांप से डसवाकर पति को मारने की खौफनाक साजिश
पुलिस जांच में यह बात खुलकर सामने आई कि रविता और अमरदीप के बीच अवैध संबंध थे। अमित कश्यप इस रिश्ते में सबसे बड़ा कांटा बन रहा था, इसलिए दोनों ने उसे हमेशा के लिए रास्ते से हटाने की योजना बनाई। साजिश के तहत अमरदीप ने एक सपेरे से संपर्क किया और जहरीला सांप हासिल किया। एक रात जब अमित गहरी नींद में सो रहा था, तब दोनों ने मिलकर उसे सांप से कटवा दिया। जहर पूरे शरीर में फैलने से अमित की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। हत्या के बाद रविता ऐसे रोई और चिल्लाई जैसे वह इस हादसे से पूरी तरह बेखबर हो, लेकिन उसकी यह एक्टिंग पुलिस के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाई।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें बहुत बारीकी से सुनीं। सरकारी वकील ने इस मामले को समाज के लिए एक बड़ा कलंक बताते हुए दोषियों के लिए फांसी की मांग की थी। अदालत ने भी माना कि यह मामला पूर्व नियोजित क्रूरता और विश्वासघात का एक बेहतरीन उदाहरण है। सजा सुनाने से पहले जज ने समाज में नैतिक मूल्यों के पतन पर गहरी चिंता जताई। जज की इस टिप्पणी ने courtroom में मौजूद हर शख्स को सोचने पर मजबूर कर दिया कि कैसे चंद पलों के आकर्षण के लिए अपनों का खून बहाया जा रहा है।
फैसला सुनाने से पहले अदालत की सख्त टिप्पणियां
इस सनसनीखेज मामले में फैसला देते समय अदालत ने समाज और रिश्तों की पवित्रता पर गंभीर सवाल उठाए। जज ने अपने आदेश में इस बात का जिक्र किया कि कैसे इस कलयुग में रिश्तों का कत्ल किया जा रहा है। विश्वासघात की ऐसी दास्तानें समाज की नींव को कमजोर कर रही हैं। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधियों के प्रति नरमी बरतना समाज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। यही वजह है कि दोनों दोषियों को कानून के दायरे में रहते हुए सबसे सख्त सजा यानी फांसी के फंदे पर लटकाने का आदेश दिया गया है।
इस फैसले के आने के बाद मृतक अमित कश्यप के परिवार ने कुछ राहत की सांस ली है। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय की उम्मीद थी और आज अदालत ने साबित कर दिया कि पाप का अंत बुरा ही होता है। हालांकि इस खौफनाक घटना ने यह भी दिखा दिया है कि इंसानियत कितनी गिर चुकी है। पुलिस और न्यायपालिका की इस मुस्तैदी से ऐसे अपराधियों में जरूर एक कड़ा संदेश जाएगा। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की हर एक कड़ी पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे भी अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।
न्याय की जीत और समाज के लिए एक कड़ा संदेश
मेरठ की अदालत का यह फैसला देश भर में चर्चा का विषय बन गया है। सोशल मीडिया से लेकर आम बैठकों तक लोग इसी बात की चर्चा कर रहे हैं कि कैसे एक जीवनसंगिनी ने ही कातिल का रूप ले लिया। पुलिस की बेहतरीन वैज्ञानिक जांच और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स ने इस मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई थी। अदालत में पेश किए गए सबूत इतने पुख्ता थे कि बचाव पक्ष के पास दोषियों को बचाने का कोई रास्ता नहीं बचा था। अंततः न्यायपालिका ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिखाया।
यह फैसला उन तमाम लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो शॉर्टकट अपनाकर अपनों की जान लेने की सोचते हैं। कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और गुनाहगार चाहे कितनी भी चालाकी क्यों न कर ले, वह एक न एक दिन कानून के शिकंजे में आ ही जाता है। अमित कश्यप के परिवार ने इस लड़ाई को बहुत हिम्मत के साथ लड़ा है। द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल यह बताती है कि जनता भी इस फैसले से बेहद संतुष्ट है और अदालत के इस कदम की सराहना कर रही है।



