नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में आने वाले दिनों में संगीत प्रेमियों के लिए एक बेहद खास नजारा देखने को मिलने वाला है। दक्षिण कोरियाई मनोरंजन की दुनिया की जानी-मानी कंपनी हाइबे ने अपने सबसे बड़े और लोकप्रिय संगीत उत्सव 'वीवर्स कॉन फेस्टिवल' को पहली बार भारत लाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह आयोजन देश में के-पॉप संगीत के बढ़ते क्रेज और दीवानगी को साफ तौर पर दिखाता है। भारत में लाखों की संख्या में युवा इन कोरियाई बैंड्स और कलाकारों के गाने सुनते हैं और उनके स्टाइल को फॉलो करते हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के फेस्टिवल को लेकर संगीत जगत में अभी से ही काफी चर्चा शुरू हो गई है। विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स और आयोजकों से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस भव्य कार्यक्रम में कई वैश्विक सितारे मंच पर उतरेंगे। हालांकि अभी कलाकारों की पूरी सूची और तारीखों का आधिकारिक ऐलान होना बाकी है, लेकिन फैंस ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी जाहिर करना शुरू कर दिया है। दिल्ली में होने वाले इस कॉन्सर्ट को लेकर स्थानीय स्तर पर भी तैयारियां और सुरक्षा के पहलुओं पर विचार किया जा रहा है ताकि भारी भीड़ को आसानी से संभाला जा सके।
भारत में के-पॉप का बढ़ता दायरा और दीवानगी
पिछले कुछ सालों में भारत के युवाओं के बीच के-पॉप यानी कोरियन पॉप संगीत का जादू सिर चढ़कर बोला है। बीटीएस और ब्लैकपिंक जैसे बैंड्स ने भारतीय दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। छोटे शहरों से लेकर महानगरों तक के युवा इन गानों की धुन पर थिरकते नजर आते हैं। हाइबे कंपनी का यह फैसला इस बात का सबूत है कि भारतीय बाजार उनके लिए कितना अहम हो गया है। कंपनी जानती है कि भारत में के-पॉप फैंस की फौज बहुत बड़ी है जो इस तरह के लाइव शो के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बड़े वैश्विक आयोजनों के भारत आने से देश के मनोरंजन बाजार को भी एक नया मुकाम मिलेगा। कॉन्सर्ट उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जब विदेशी कंपनियां भारत में बड़े शो करती हैं, तो इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के मौके बनते हैं और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है। दिल्ली जैसे महानगर में इस तरह का विशाल आयोजन होने से होटल, यातायात और खान-पान के कारोबार में भी भारी तेजी आने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
टिकटों की बुकिंग और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
किसी भी बड़े संगीत समारोह की तरह इस फेस्टिवल के लिए भी टिकटों की मांग आसमान छूने की संभावना है। आयोजकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे टिकटों की कालाबाजारी को रोकें और असली फैंस तक ही पास पहुंचाएं। इसके अलावा, दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने की योजना बनाई जा रही है। कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश और निकास के रास्ते, मेडिकल कैंप और आपातकालीन सेवाओं को लेकर भी अभी से रूपरेखा तैयार की जा रही है ताकि किसी भी दर्शक को कोई परेशानी न हो।
भारतीय फैंस के मन में इस बात को लेकर भी उत्सुकता है कि कौन-कौन से मुख्य कलाकार इस फेस्टिवल में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली आएंगे। कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लोग अपने पसंदीदा सिंगर्स के नाम कयास के तौर पर लिख रहे हैं। आयोजक जल्द ही इस बारे में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के सभी आधिकारिक और पक्के आंकड़े साझा कर सकते हैं। तब तक के-पॉप प्रेमियों के बीच इस मेगा इवेंट को लेकर उत्साह का माहौल लगातार बढ़ता ही जा रहा है।
मनोरंजन उद्योग और व्यापार पर इसका असर
हाइबे का यह कदम केवल एक संगीत कार्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी व्यावसायिक परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। जब दुनिया की बड़ी कंपनियां भारत में अपने फ्लैगशिप इवेंट करती हैं, तो बाकी अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स का भी देश के बाजार पर भरोसा बढ़ता है। म्यूजिक स्ट्रीमिंग ऐप्स, ब्रांड एंडोर्समेंट और मर्चेंडाइज बिक्री के मामले में भी भारतीय बाजार में उछाल आने की पूरी संभावना है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से साफ है कि आने वाले दिनों में भारत वैश्विक मनोरंजन मानचित्र पर एक बहुत बड़ा केंद्र बनकर उभरने वाला है।






