पड़ोसी देश पाकिस्तान में इस समय हालात बहुत ज्यादा खराब हो चुके हैं। आम आदमी की पहुंच से बुनियादी जरूरतें धीरे-धीरे दूर होती जा रही हैं। बाजार में खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। महंगाई की इस मार से सबसे बुरा हाल आटे का हुआ है। आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना अब एक बहुत बड़ी चुनौती बन गया है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान के कई शहरों में आटे की भारी कमी हो गई है। हालात यह हैं कि खुले बाजार में 20 किलो आटे का थैला अब 3300 रुपये तक बिक रहा है। इतनी ज्यादा कीमत चुकाना आम मजदूर और गरीब परिवार के बस की बात नहीं है। रोज कमाने और खाने वाले लोग इस महंगाई के आगे पूरी तरह लाचार नजर आ रहे हैं। सरकार की तरफ से कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही है.
होटलों में महंगी हुई रोटी, जेब पर पड़ रहा भारी असर
आटे की बढ़ती कीमतों का सीधा असर ढाबों और होटलों पर भी साफ पड़ रहा है। जो रोटी कुछ समय पहले तक 15 से 20 रुपये में मिल जाती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 30 रुपये तक पहुंच गई है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग जो अक्सर बाहर का खाना खाते थे, वे अब अपने घरों में भी कम खाना बना पा रहे हैं। रसोई गैस और बिजली के बिलों ने पहले ही लोगों की कमर तोड़ रखी थी। अब आटे के दाम बढ़ने से घर चलाना लगभग असंभव हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से इस संकट का सामना कर रहे हैं। सरकारी डिपो पर मिलने वाले सस्ते आटे के लिए लंबी-लंबी कतारें लगानी पड़ती हैं। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं होती कि आटा मिलेगा या नहीं। कई जगहों पर आटे के ट्रकों को लूटने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं। सुरक्षा और कानून व्यवस्था की स्थिति भी इस वजह से काफी बिगड़ती जा रही है।
आर्थिक बदहाली और जमाखोरी बनी मुख्य वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस भयंकर संकट के पीछे देश की खराब आर्थिक हालत और कुप्रबंधन है। गेहूं का उत्पादन कम होने और जमाखोरों द्वारा कालाबाजारी करने से कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। सरकार के पास विदेशी मुद्रा भंडार की भारी कमी है। इस वजह से विदेशों से जरूरी अनाज का आयात करना भी बहुत मुश्किल हो गया है। स्थानीय मिल मालिकों और व्यापारियों का कहना है कि जब तक सरकारी नीतियां नहीं सुधरेंगी, तब तक राहत मिलना मुमकिन नहीं है।
आम जनता महंगाई के इस दौर में सरकार से तुरंत मदद की गुहार लगा रही है। लोग सड़कों पर उतरकर अपना विरोध भी जता रहे हैं। लेकिन प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। स्थिति दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है और आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं। पाकिस्तान का यह मौजूदा संकट पूरे देश को भुखमरी की कगार पर धकेल रहा है।
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल और निष्कर्ष
हमारी ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान के आम नागरिकों का जीवन इस समय सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। एक तरफ बेरोजगारी और गरीबी है तो दूसरी तरफ आसमान छूती महंगाई है। बच्चों को पेट भर खाना खिलाना भी माता-पिता के लिए किसी जंग जीतने जैसा हो गया है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों को भी इस मानवीय संकट पर ध्यान देने की जरूरत है। यदि समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति संभालना असंभव हो जाएगा।






