कोलकाता के फुटबॉल प्रेमियों के लिए कल का दिन एक ऐतिहासिक रात लेकर आया जब मैदान पर देश की दो सबसे पुरानी और सबसे बड़ी टीमें आमने-सामने थीं। मुकाबला डूरंड कप के फाइनल का था जहां ईस्ट बंगाल और मोहन बगान की भिड़ंत ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। मैच शुरू होने से पहले ही स्टेडियम के बाहर हजारों समर्थकों की भीड़ जुट चुकी थी और हवा में सिर्फ अपने पसंदीदा क्लब के समर्थन में नारे गूंज रहे थे। मैच की शुरुआत से ही दोनों तरफ से तेज खेल देखने को मिला और खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
खेल के पहले हाफ से ही रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया था क्योंकि दोनों ही दल एक इंच जमीन भी छोड़ने को तैयार नहीं थे। मैदान पर खिलाड़ियों का जोश और बाहर बैठे दर्शकों का उत्साह देखने लायक था। कई मौकों पर गोल करने के करीब पहुंचकर भी खिलाड़ी चूक गए जिससे मुकाबले का तनाव और ज्यादा बढ़ गया। इस बीच दोनों टीमों के कोच लगातार मैदान के किनारे खड़े होकर अपने खिलाड़ियों को निर्देश दे रहे थे ताकि रणनीति में कोई चूक न हो सके।
मैदान पर एडमंड का चला जादू और अटकी सांसें
इस बड़े मुकाबले का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ईस्ट बंगाल के खिलाड़ी एडमंड ने अपनी शानदार फॉर्म दिखाते हुए मैदान पर गोल की बारिश कर दी। एडमंड ने एक के बाद एक बेहतरीन शॉट लगाकर मोहन बगान की रक्षा पंक्ति को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया। उनकी इस शानदार हैट्रिक ने मैच का पासा पूरी तरह से ईस्ट बंगाल के पक्ष में पलट दिया। मोहन बगान के खिलाड़ियों ने वापसी की बहुत कोशिश की लेकिन वे एडमंड के हमलों को रोकने में नाकामयाब रहे।
मैच का अंतिम सीटी बजने के साथ ही ईस्ट बंगाल के खेमे में जश्न का माहौल शुरू हो गया और खिलाड़ियों की आंखें खुशी से नम हो गईं। टीम के समर्थकों ने मैदान पर ही जश्न मनाना शुरू कर दिया और कोलकाता की सड़कों पर जीत की आतिशबाजी गूंज उठी। पिछले बाईस सालों से खिताब का इंतजार कर रहे इस क्लब के फैंस के लिए यह पल किसी सपने के सच होने जैसा था। खिलाड़ियों ने अपनी इस जीत का श्रेय कड़ी मेहनत और अपने समर्थकों के अटूट भरोसे को दिया है।
22 साल के लंबे इंतजार का हुआ अंत
इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही ईस्ट बंगाल ने दो दशक से अधिक समय से चले आ रहे खिताबी सूखे को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। खेल के जानकारों का मानना है कि यह जीत आने वाले महीनों में टीम का आत्मविश्वास बहुत ज्यादा बढ़ाएगी। मोहन बगान जैसी मजबूत टीम को फाइनल में हराना आसान नहीं था लेकिन मैदान पर दिखाई गई रणनीति और अनुशासन ने नतीजा बदल दिया। हार के बाद मोहन बगान के खेमे में निराशा जरूर छाई रही लेकिन उन्होंने खेल भावना का परिचय देते हुए विजेता टीम को बधाई दी।
मैदान के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके। पुलिस और प्रशासन ने मैच के बाद दोनों टीमों के समर्थकों को शांत तरीके से घर भेजने के लिए विशेष रूट तैयार किए थे। कोलकाता पुलिस के अनुसार भारी भीड़ के बावजूद पूरा मुकाबला शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ और खेल प्रेमियों ने एक बेहतरीन मैच का आनंद लिया। यह फाइनल भारतीय फुटबॉल इतिहास के सबसे यादगार मैचों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया है।
भारतीय फुटबॉल के लिए एक नया संदेश
इस महामुकाबले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि भारतीय फुटबॉल में कोलकाता डर्बी का रोमांच आज भी पहले जैसा ही जिंदा है। स्टेडियम में खचाखच भरे दर्शकों और टीवी के जरिए करोड़ों लोगों ने इस ऐतिहासिक मैच का लुत्फ उठाया। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कड़े मुकाबले देश में फुटबॉल के खेल को आगे बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। युवा खिलाड़ियों के लिए यह मैच एक बड़ी सीख है कि कैसे दबाव के पलों में भी बेहतर प्रदर्शन किया जा सकता है।
डूरंड कप का यह सीजन अब समाप्त हो चुका है लेकिन इसकी यादें और एडमंड का यह शानदार प्रदर्शन लंबे समय तक याद रखा जाएगा। ईस्ट बंगाल की इस जीत के बाद से सोशल मीडिया पर भी बधाइयों का तांता लगा हुआ है और खेल जगत के तमाम दिग्गज खिलाड़ियों ने उनकी तारीफ की है। आने वाले दिनों में दोनों ही टीमें अपने अगले टूर्नामेंट की तैयारी में जुट जाएंगी लेकिन इस हार-जीत के मायने फुटबॉल प्रेमियों के दिलों में हमेशा ताजा रहेंगे।







