देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार आ रही हादसों की दर्दनाक खबरों ने एक बार फिर हमारी सड़कों और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश और पंजाब के विभिन्न जिलों में हुए सड़क और पानी से जुड़े हादसों में कई लोगों की जान चली गई है। इन घटनाओं में किसी ने अपना जवान बेटा खो दिया है, तो किसी परिवार के बुढ़ापे का सहारा छिन गया है। त्योहार की खुशियां और रोजाना की यात्राएं पल भर में मातम में बदल गईं। द फ्रीलान्स की टीम ने जब इन मामलों की जमीनी पड़ताल की, तो सामने आया कि लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी इन हादसों की सबसे बड़ी वजह बन रही है। प्रशासन की ओर से लगातार अपील के बावजूद लोग अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं।
सबसे पहले बात करते हैं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की, जहां गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान एक बड़ा हादसा टल गया लेकिन स्थिति काफी डरावनी हो गई। लखनऊ की सई नदी में प्रतिमा विसर्जन के समय अचानक पैर फिसलने और पानी की गहराई का अंदाजा न होने से अफरा-तफरी मच गई। गनीमत रही कि स्थानीय गोताखोरों और पुलिस बल ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया, जिससे बड़ा जनहानि का खतरा टल गया। हालांकि इस तरह के आयोजनों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना और बैरिकेडिंग की कमी एक बार फिर उजागर हुई है। नदी किनारे उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए तैनात सुरक्षाकर्मी भी नाकाफी साबित हुए, जिससे किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता था। प्रशासन अब इस घटना के बाद आने वाले आयोजनों को लेकर सतर्क होने का दावा कर रहा है, लेकिन सवाल यह है कि हर बार हादसे के बाद ही नींद क्यों खुलती है?
पंजाब की सड़कों पर बेकाबू रफ्तार का खौफ
उत्तर प्रदेश के बाद पंजाब के विभिन्न जिलों से आई सड़क हादसों की खबरों ने दिल दहला दिया है। पंजाब के फतेहगढ़ साहिब में वैशाखी से वापस लौट रहे श्रद्धालुओं की एक बस अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में छह लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बस में सवार लोगों की चीख-पुकार से पूरा इलाका गूंज उठा। शुरुआती जांच में सामने आया है कि बस की रफ्तार बहुत तेज थी और चालक ने नियंत्रण खो दिया था। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। त्योहार के दिन अपनों के बीच लौटने की उम्मीद लेकर चले इन श्रद्धालुओं के घरों में अब सिर्फ रोना-धोना बचा है।
इसी तरह पंजाब के खन्ना शहर में एक और दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां तेज रफ्तार ट्रक की चपेट में आने से एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मरने वाला युवक अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला बेटा था। उसके जाने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही बहुत ज्यादा होती है और चालकों की लापरवाही आए दिन ऐसे हादसों को न्योता देती है। पुलिस ने ट्रक को कब्जे में ले लिया है और फरार चालक की तलाश शुरू कर दी है, लेकिन क्या एक जवान बेटे की मौत की भरपाई कोई मुआवजा या गिरफ्तारी कर सकती है? यह सवाल आज हर स्थानीय नागरिक की जुबान पर है।
लापरवाही और नियमों की अनदेखी बन रही जानलेवा
माहौल को और गमगीन करने वाली खबर मजीठा से आई, जहां एक अनियंत्रित स्कूल बस ने मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी। इस भीषण सड़क हादसे में मोटरसाइकिल पर सवार नानी और उनके छोटे से दोहते की मौके पर ही मौत हो गई। परिवार के दो सदस्यों के एक साथ चले जाने से कोहराम मच गया है। स्कूल बस जैसी बड़ी गाड़ियों के चालकों द्वारा इस तरह की लापरवाही बरतना बेहद चिंताजनक विषय है। इसके अलावा एक अन्य सड़क हादसे में सड़क पार कर रहे एक बुजुर्ग की जान चली गई और एक नौजवान गंभीर रूप से घायल हो गया। इन सभी घटनाओं में एक बात कॉमन है—यातायात नियमों की अनदेखी और वाहनों की बेलगाम रफ्तार।
स्थानीय पुलिस और यातायात विभाग के अधिकारी इन मामलों में मुकदमे दर्ज कर खानापूर्ति कर रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर ट्रैफिक पुलिस की सक्रियता नजर नहीं आती है। भारी वाहनों की एंट्री के तय समय का पालन नहीं कराया जाता और न ही स्कूलों की बसों की फिटनेस की नियमित जांच होती है। जब तक प्रशासन कागजी कार्रवाई से बाहर निकलकर सड़कों पर सख्ती नहीं बरतेगा, तब तक ऐसे हादसों का सिलसिला थमता नजर नहीं आएगा। द फ्रीलान्स की टीम ने जब पीड़ितों के परिजनों से बात की, तो उनका दर्द साफ झलक रहा था कि सिस्टम की ढिलाई आम आदमी की जान पर भारी पड़ रही है। अब देखना यह होगा कि क्या इन घटनाओं के बाद प्रशासन कोई ठोस कदम उठाता है या फिर मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।






