शिक्षक भर्ती के लिए सड़क पर उतरे युवा
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में इन दिनों शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सुर्खियों में बना हुआ है। साल 2018 की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का सपना देख रहे ओबीसी वर्ग के सैकड़ों अभ्यर्थी शनिवार को अचानक सड़कों पर उतर आए। इन युवाओं ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आकर अलीगढ़ के मैरिस रोड पर स्थित बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह के आवास को घेर लिया और जोरदार प्रदर्शन किया।
इस विरोध प्रदर्शन में केवल अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि मथुरा, कासगंज और बरेली समेत उत्तर प्रदेश के कई अन्य जिलों से भी अभ्यर्थी शामिल होने पहुंचे थे। सुबह से ही मंत्री आवास के बाहर युवाओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए इन युवाओं का गुस्सा साफ झलक रहा था। उनका कहना था कि वे पिछले कई सालों से न्याय की आस में दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का मुख्य दर्द यह है कि उनकी उम्र लगातार निकलती जा रही है। सालों पहले शुरू हुई इस भर्ती प्रक्रिया के बीच कई युवाओं की उम्र शादी की सीमा को भी पार कर चुकी है। इसी बात को बयां करने के लिए उन्होंने अनोखे पोस्टरों का सहारा लिया, जिसने वहां मौजूद हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
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अनोखे पोस्टरों के जरिए बयां किया युवाओं का दर्द
इस प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों द्वारा लाए गए पोस्टरों ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा बटोरी है। एक पोस्टर पर बहुत ही व्यंग्यात्मक और मार्मिक पंक्ति लिखी हुई थी, जिसमें कहा गया था— 'मंत्री जी आपकी तो शादी हो जाएगी, हम तो कुंवारे ही मर जाएंगे।' यह पोस्टर इस बात का प्रतीक था कि कैसे सरकारी भर्तियों के में लटकने से युवाओं का पूरा जीवन और भविष्य अधर में लटक जाता है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे इस उम्र में पहुंच चुके हैं जहां समाज में उनकी पारिवारिक और सामाजिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। लगातार बढ़ रही उम्र के कारण उनके अभिभावक भी चिंतित हैं। युवाओं ने कहा कि वे अपनी योग्यता साबित करने के बाद भी केवल प्रशासनिक और नीतिगत फेरबदल के कारण बेरोजगार बैठने को मजबूर हैं।
हाथों में तख्तियां लेकर खड़े इन बेरोजगार युवाओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। उनका साफ कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रख रहे हैं, लेकिन यदि समय रहते उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो उनका यह आंदोलन और भी ज्यादा उग्र रूप ले सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
क्या है ओबीसी आयोग की सिफारिशों का पूरा मामला?
इस पूरे विवाद के केंद्र में उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की वे सिफारिशें हैं जो 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 के संदर्भ में दी गई थीं। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, आयोग ने अपनी जांच और समीक्षा के बाद ओबीसी अभ्यर्थियों को पासिंग मार्क्स में 5 प्रतिशत की छूट देने की स्पष्ट सिफारिश की थी। आयोग का यह भी मानना था कि पात्र ओबीसी अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता के आधार पर नियुक्ति दी जानी चाहिए।
लेकिन विडंबना यह है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की इन तमाम सिफारिशों पर आज तक कोई अंतिम और ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग में घूमती रही हैं, लेकिन धरातल पर अभ्यर्थियों को कोई राहत नहीं मिली है। इसी लेटलतीफी के कारण ओबीसी वर्ग के इन योग्य अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी है।
अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब एक संवैधानिक आयोग ने उनकी मांग को जायज ठहराते हुए राहत देने की सिफारिश कर दी है, तो फिर सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग को इसे लागू करने में किस बात की देरी हो रही है। उनका मानना है कि इस देरी के कारण सैकड़ों योग्य युवाओं का हक मारा जा रहा है।
150 में से 60 अंक वालों को पात्र मानने की मांग
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को बहुत ही स्पष्ट रूप से मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों के सामने रखा। उनकी प्रमुख मांग है कि 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा में ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए पासिंग मार्क्स में 5% की छूट दी जाए। इसके तहत, 150 अंकों की परीक्षा में से 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले सभी ओबीसी अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए पूरी तरह पात्र माना जाए।
"हम पिछले कई सालों से लगातार अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। उम्र निकलती जा रही है और भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है। सरकार से हमारी यही विनती है कि पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाए और हमें हमारा हक दिया जाए। जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हमारा यह आंदोलन जारी रहेगा।" — प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी, 68,500 शिक्षक भर्ती
अभ्यर्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए कई बार स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपा, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासन ही मिले। धरातल पर उनकी समस्या का समाधान करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शन के अंत में अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में बेसिक शिक्षा विभाग को जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने और ओबीसी अभ्यर्थियों को पासिंग मार्क्स में छूट देने के निर्देश जारी करने की पुरजोर मांग की गई है।
अभ्यर्थियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी जाती हैं, तो वे लखनऊ में राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि उनका यह संघर्ष केवल नौकरी पाने का नहीं, बल्कि उनके हक और सम्मान की लड़ाई है और वे इसे किसी भी कीमत पर बीच में छोड़ने वाले नहीं हैं।




