वृद्धावस्था पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की तैयारी
उत्तर प्रदेश के करोड़ों बुजुर्ग नागरिकों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन के भुगतान के सिस्टम में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अभी तक लाभार्थियों के बैंक खातों में केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि एक साथ क्रेडिट होती थी। इस वजह से यह स्पष्ट नहीं हो पाता था कि किस स्तर से कितनी राशि जारी की गई है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद अब दोनों सरकारों का अंशदान बिल्कुल अलग-अलग नजर आएगा, जिससे वित्तीय पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
डिजिटल इंडिया और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के दौर में शासन प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, इस बदलाव से न केवल प्रशासनिक कामकाज आसान होगा, बल्कि लाभार्थियों को भी यह समझने में आसानी होगी कि उनकी पेंशन का गणित किस तरह काम कर रहा है। सरकार का यह प्रयास व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और सुगम बनाने के लिए है ताकि किसी भी प्रकार के असमंजस की गुंजाइश न बचे।
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आयु वर्ग के हिसाब से तय होती है सहायता राशि
उत्तर प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत दी जाने वाली इस पेंशन के नियम आयु वर्ग के आधार पर तय किए गए हैं। साठ से निन्यानवे वर्ष के आयु वर्ग के पात्र बुजुर्गों को हर महीने एक हजार रुपये की वित्तीय सहायता दी जाती है। इस राशि में केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों का योगदान होता है, जहां केंद्र की तरफ से दो सौ रुपये और राज्य सरकार की ओर से आठ सौ रुपये प्रति माह प्रदान किए जाते हैं।
चूंकि इस योजना के तहत भुगतान हर तीन महीने पर एकमुश्त किया जाता है, इसलिए लाभार्थियों के खाते में एक साथ तीन हजार रुपये भेजे जाते हैं। इस तीन हजार रुपये की कुल राशि में अब केंद्र सरकार का छह सौ रुपये और राज्य सरकार का चौबीस सौ रुपये का हिस्सा बिल्कुल अलग दिखाया जाएगा। इस स्पष्ट विभाजन से जमीनी स्तर पर फंड के आवंटन की सटीक तस्वीर साफ हो जाएगी।
अस्सी साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए विशेष प्रावधान
अस्सी वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए सरकार ने विशेष और समान हिस्सेदारी का नियम तय किया है। इस आयु वर्ग के पात्र बुजुर्गों को भी कुल एक हजार रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिलती है, लेकिन इसमें केंद्र और राज्य दोनों की हिस्सेदारी बराबर यानी पांच-पांच सौ रुपये होती है।
त्रैमासिक भुगतान प्रणाली के नियम के तहत जब इन अतिवृद्ध नागरिकों के खाते में तीन हजार रुपये की कुल राशि पहुंचती है, तो उसमें पंद्रह सौ रुपये केंद्र सरकार के खाते से और पंद्रह सौ रुपये राज्य सरकार के खजाने से आते हैं। अब नई भुगतान प्रणाली के तहत इन दोनों भुगतानों को तकनीकी रूप से अलग करके भेजा जाएगा ताकि रिकॉर्ड में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
राज्य सरकार अपने संसाधनों से दे रही है अतिरिक्त पेंशन
एक बहुत ही खास बात यह है कि केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के लिए जितने लाभार्थियों का कोटा तय किया है, उससे कहीं अधिक संख्या में बुजुर्गों को राज्य सरकार अपने खुद के बजट से पेंशन दे रही है। केंद्रीय मानदंडों के दायरे से बाहर रह जाने वाले ऐसे तमाम पात्र नागरिकों की पूरी एक हजार रुपये प्रति माह की पेंशन का बोझ पूरी तरह उत्तर प्रदेश सरकार खुद उठाती है।
जिला समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदेश में इस समय लगभग सड़सठ लाख पचास हजार बुजुर्ग इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। इनमें से करीब सैंतालीस लाख लाभार्थी ऐसे हैं, जिनकी पेंशन में केंद्र और राज्य दोनों का संयुक्त योगदान रहता है, जबकि बाकी बचे हुए अतिरिक्त लाभार्थियों का पूरा खर्च राज्य सरकार अपने संसाधनों के जरिए वहन करती है।
"प्रदेश के लाखों बुजुर्गों को समय पर और पारदर्शी तरीके से पेंशन मिले, इसके लिए पूरी प्रक्रिया को तकनीकी रूप से और दुरुस्त किया जा रहा है। नई व्यवस्था से हर स्तर पर वित्तीय स्पष्टता बनी रहेगी।" — जिला समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश
किस्तों के भुगतान को लेकर क्या है पूरा गणित
अक्सर यह देखा जाता है कि एकमुश्त तीन हजार रुपये खाते में आने के बाद कुछ बुजुर्गों या उनके परिजनों को यह गलतफहमी हो जाती है कि उन्हें हर महीने तीन हजार रुपये मिल रहे हैं। प्रशासन ने इस बात को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है कि पेंशन की मूल दर एक हजार रुपये प्रति माह ही है, जिसे तकनीकी कारणों से और सुविधा की दृष्टि से हर तीन महीने में जोड़कर भेजा जाता है।
वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही की किस्त के रूप में पात्र लाभार्थियों के बैंक खातों में तीन हजार रुपये की राशि पहुंचना शुरू हो गई है। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से हो रही है ताकि बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त किया जा सके और सही व्यक्ति तक उसका हक सीधे पहुंच सके।
निष्कर्ष
वृद्धावस्था पेंशन के भुगतान में किए गए इस बदलाव से न सिर्फ व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, बल्कि केंद्र और राज्य के वित्तीय योगदान का सटीक हिसाब भी जनता के सामने रहेगा। उत्तर प्रदेश सरकार की इस पहल से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ ले रहे करोड़ों बुजुर्गों को सीधा फायदा मिलेगा और प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक सुदृढ़ होंगी।






