देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर सुलग रही है और पिछले कुछ घंटों में यहां अपराध, सड़क हादसों और राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों का ऐसा दौर चला जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। जंतर-मंतर से लेकर शाहदरा रेलवे स्टेशन और सड़क मार्गों तक, हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला है। एक तरफ जहां छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे और पुलिस के साथ उनकी तीखी झड़प हुई, वहीं दूसरी तरफ लापरवाह ड्राइविंग और खूनी वारदातों ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने जब इन सभी घटनाओं की जमीनी पड़ताल की तो पता चला कि राजधानी के अलग-अलग कोनों में एक ही दिन में कई बड़े हादसे और विवाद सामने आए हैं।
इन घटनाओं की कड़ी में सबसे पहली बड़ी खबर मध्य दिल्ली के जंतर-मंतर से आई है, जहां विभिन्न मुद्दों और नीट पेपर लीक के खिलाफ भारी संख्या में छात्र और युवा इकट्ठा हुए थे। प्रदर्शन के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प और हाथापाई शुरू हो गई। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक युवती ने लाइव कैमरे पर सरकार और व्यवस्था के खिलाफ बेहद तीखे शब्दों में अपना गुस्सा जाहिर किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी सुरक्षा बल तैनात किया है और कई इलाकों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है ताकि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रहे।
सड़क पर बेकाबू रफ्तार: मर्सिडीज ने बुजुर्ग महिला को कुचला
राजधानी की सड़कों पर बेलगाम रफ्तार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है और ताजा मामला एक लग्जरी कार से जुड़ा है। दिल्ली की एक व्यस्त सड़क पर तेज रफ्तार मर्सिडीज कार ने एक बुजुर्ग महिला को इतनी बुरी तरह रौंद दिया कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाड़ी की रफ्तार इतनी अधिक थी कि चालक महिला को बचाने में पूरी तरह असफल रहा और टक्कर मारने के बाद मर्सिडीज सामने खड़ी एक अन्य गाड़ी से जा टकराई। इस दर्दनाक हादसे के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई और ड्राइवर की लापरवाही के खिलाफ जमकर गुस्सा फूटा। पुलिस ने इस मामले में कार को कब्जे में ले लिया है और चालक की तलाश के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
सड़क हादसों के इस खौफनाक मंजर के बीच दिल्ली में आपराधिक वारदातों ने भी आम जनता की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। शाहदरा रेलवे स्टेशन के पास एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई जिसमें दिल्ली मेट्रो के एक कर्मचारी को बेरहमी से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया गया। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया गया। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपियों की तलाश शुरू की और उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से आठ आरोपियों को धर दबोचा। शुरुआती जांच में पता चला है कि आपसी रंजिश और मामूली कहासुनी के चलते इस खूनी खेल को अंजाम दिया गया था, जिससे मृतक के परिवार में कोहराम मच गया है।
सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और लद्दाख बचाओ आंदोलन का असर
इन तमाम स्थानीय घटनाओं और सड़क हादसों के बीच दिल्ली की सीमाओं और राजनीतिक गलियारों में एक और बड़ा घटनाक्रम तेजी से उभरा है। लद्दाख के पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 'सेव लद्दाख' पदयात्रा और आंदोलन के सिलसिले में दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद से समर्थकों में भारी रोष व्याप्त है और केंद्र सरकार तथा पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन राजधानी में उनके प्रवेश और हिरासत के बाद राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
एक ही दिन में जंतर-मंतर का हाई-वोल्टेज ड्रामा, मर्सिडीज हादसे में महिला की मौत, मेट्रो कर्मी की हत्या और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी जैसी घटनाओं ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। आम जनता के बीच इन सभी घटनाओं को लेकर भारी नाराजगी और असुरक्षा की भावना साफ महसूस की जा सकती है। द फ्रीलान्स की टीम इन सभी मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही नए तथ्य सामने आएंगे, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाए जाएंगे।
कानून व्यवस्था पर उठ रहे सवाल और प्रशासनिक तैयारियां
बढ़ते अपराधों और लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच अब यह साफ हो गया है कि दिल्ली प्रशासन को सुरक्षा के मोर्चे पर अपनी रणनीति में बड़े बदलाव करने होंगे। चाहे वह सड़कों पर बेलगाम दौड़ती गाड़ियां हों या फिर रेलवे स्टेशनों के आसपास सुरक्षा का अभाव, हर मोर्चे पर चूक साफ दिखाई दे रही है। पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग को लेकर विपक्षी दल भी लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में इन सभी मामलों की कोर्ट में सुनवाई और पुलिस जांच के नतीजे तय करेंगे कि राजधानी में कानून का राज किस हद तक असरदार साबित होता है।



