ऑफिस में अपने बॉस को ‘सर’ या ‘मैम’ कहना लंबे समय से प्रोफेशनल वर्कस्पेस का एक अनिवार्य हिस्सा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों से बात करते समय एक खास दूरी, एक निश्चित टोन और औपचारिक शिष्टाचार (फॉर्मैलिटी) का पालन करना परंपरा का हिस्सा माना जाता रहा है। लेकिन अब, दफ्तरों में जेन जी (Gen Z) की एंट्री के साथ ही काम करने के तौर-तरीकों और संवाद की शैली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कई युवा कर्मचारी अब अपने सीनियर्स या बॉस को ‘सर’ कहने के बजाय उनके पहले नाम से पुकारना ज्यादा पसंद कर रहे हैं, जो कॉर्पोरेट जगत में बहस का मुद्दा बन गया है।
सम्मान जरूरी, लेकिन अनावश्यक औपचारिकता नहीं
जेन जी के लिए कार्यस्थल पर किसी भी सीनियर का सम्मान करना बेहद जरूरी है, लेकिन उनका मानना है कि इसके लिए हर बातचीत में ‘सर’ या ‘मैम’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। नई पीढ़ी का तर्क है कि सम्मान किसी को संबोधित करने के तरीके से ज्यादा उनके दैनिक व्यवहार, कार्यकुशलता और आपसी संवाद में दिखाई देना चाहिए। यदि कोई कर्मचारी अपने बॉस से खुलकर बात कर सकता है, अपनी राय बेबाक तरीके से रख सकता है और किसी भी व्यावसायिक फैसले पर तर्कसंगत सवाल पूछ सकता है, तो इससे कार्यालय का माहौल अधिक सकारात्मक और उत्पादक बनता है।
बॉस और कर्मचारी के बीच की दूरी को पाटना
पारंपरिक ऑफिस कल्चर में बॉस और कर्मचारी के बीच पदानुक्रम (Hierarchy) की एक स्पष्ट रेखा खींची जाती थी, और सीनियर्स को अलग तरीके से संबोधित करना उसी व्यवस्था का हिस्सा था। इसके विपरीत, जेन जी इस पदानुक्रम की दीवार को थोड़ा कम करना चाहती है। उनका मानना है कि एक ही संस्थान में काम करते हुए सभी लोग पेशेवर रूप से समान महत्व रखते हैं। पदों में अंतर होना स्वाभाविक है, लेकिन सम्मान हर कोई बराबर का हकदार होता है।
नाम से संबोधित करने का यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि बॉस और कर्मचारी एक ही पद पर हैं, बल्कि इसका उद्देश्य केवल बातचीत से उस अनावश्यक दूरी और डर को खत्म करना है जो अक्सर खुलकर विचार साझा करने में बाधा बनता है। हालांकि, यह बदलाव हर जगह एक समान रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। आज भी कई पारंपरिक और बड़े संस्थानों में ‘सर’ और ‘मैम’ कहना ही पेशेवर शिष्टाचार माना जाता है, और जेन जी भी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालती है। ऐसे में, 'सर' न कहना किसी प्रकार की बदतमीजी नहीं, बल्कि बदलते वक्त के साथ विकसित हो रहे कॉर्पोरेट कल्चर का एक स्वाभाविक हिस्सा है।
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