नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की नामी दवा कंपनी बायोकॉन इन दिनों दो अलग-अलग वजहों से लगातार चर्चा में बनी हुई है। एक तरफ जहां कंपनी पर टैक्स विभाग यानी जीएसटी अधिकारियों ने शिकंजा कसा है और 3.2 करोड़ रुपये से ज्यादा का नोटिस भेजा है, वहीं दूसरी तरफ कारोबार को फैलाने के मोर्चे पर कंपनी को बड़ी सफलता मिली है। शेयर बाजार से लेकर आम निवेशकों तक इन दोनों खबरों पर पैनी नजर है क्योंकि इसका सीधा असर कंपनी के कामकाज पर पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, टैक्स अधिकारियों ने कंपनी के कामकाज की जांच के बाद 3.2 करोड़ रुपये से अधिक के कर भुगतान को लेकर यह नोटिस जारी किया है। कंपनी इस कानूनी और प्रशासनिक चुनौती से निपटने के लिए अपने विधिक सलाहकारों के साथ मिलकर काम कर रही है। दूसरी तरफ, विज्ञापनों में किए जाने वाले दावों के मामलों में भी खाद्य और औषधि प्रशासन यानी एफडीए आगे की सुनवाई करने जा रहा है, जिससे कंपनी की मुश्किलें थोड़ी बढ़ सकती हैं।
सैंडोज ऑस्ट्रेलिया के साथ नई साझेदारी
टैक्स के मोर्चे पर आई इस रुकावट के बीच बायोकॉन के लिए राहत की खबर उसकी सहयोगी इकाई बायोकॉन बायोलॉजिक्स से आई है। कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया की बड़ी कंपनी सैंडोज के साथ एक अहम हाथ मिलाया है। इस नई डील के तहत कंपनी ऑस्ट्रेलिया के बाजारों में अपनी कैंसर से लड़ने वाली जीवनरक्षक दवाएं बेचेगी। जानकारों का मानना है कि इस अंतरराष्ट्रीय समझौते से कंपनी को विदेशी बाजार में पैर जमाने और अपनी कमाई का दायरा बढ़ाने में बहुत मदद मिलेगी।
इस साझेदारी के बाद से ही शेयर बाजार में भी कंपनी के शेयरों को लेकर सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है। हाल ही में हुई ब्लॉक डील और इस नई पार्टनरशिप के बाद निवेशकों का भरोसा कंपनी पर फिर से मजबूत होता दिख रहा है। दवा बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी बड़ी डील्स से कंपनियों को स्थानीय स्तर पर आने वाले वित्तीय झटकों से उबरने में काफी मदद मिलती है।
कैंसर दवा पेब्रिल्जो का बाजार में आना
बायोकॉन के पोर्टफोलियो के लिए एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। कंपनी की बहुप्रतीक्षित कैंसर रोधी दवा 'पेब्रिल्जो' के साल 2028 तक भारतीय और वैश्विक बाजारों में पूरी तरह उतरने का रास्ता साफ हो गया है। इस दवा के आने से कैंसर के इलाज में काम आने वाली दवाइयों के दाम कम होने की उम्मीद है। साथ ही बायोकॉन को वैश्विक बायोसिमिलर बाजार में अपनी स्थिति और अधिक मजबूत करने का बड़ा मौका मिलेगा।
जमीनी हकीकत यह है कि फार्मा सेक्टर में नियम और कानूनी प्रक्रियाएं बहुत कड़ी होती हैं। एक तरफ जहां टैक्स और विज्ञापनों के मामलों में कंपनियों को सरकारी जांच का सामना करना पड़ता है, वहीं दूसरी तरफ नई रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय समझौते उनके विकास को रफ्तार देते हैं। बायोकॉन के मामले में भी यही संतुलन साफ दिखाई दे रहा है, जहां कानूनी नोटिस और नई कारोबारी डील एक साथ चल रही हैं।
कारोबारी भविष्य और निवेशकों का रुख
द फ्रीलान्स की पड़ताल बताती है कि आम निवेशकों को ऐसे समय में किसी भी तरह की जल्दबाजी से बचना चाहिए। जीएसटी नोटिस जैसी प्रशासनिक औपचारिकताएं बड़ी कंपनियों के लिए आम बात होती हैं और कंपनियां कानूनी रास्ते से इनका जवाब देती हैं। वहीं दूसरी ओर, सैंडोज जैसी कंपनियों के साथ हुई डील और पेब्रिल्जो जैसी दवाओं का भविष्य कंपनी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनी टैक्स से जुड़े इस मामले को कैसे सुलझाती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी नई पार्टनरशिप का कितना फायदा उठा पाती है। फिलहाल बाजार में कंपनी के शेयरों को लेकर सकारात्मक हलचल बनी हुई है और जानकारों की नजरें एफडीए की आगामी सुनवाइयों और कंपनी के अगले कारोबारी कदमों पर टिकी हुई हैं।









