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मानसून की विदाई के बाद भी देश में क्यों हो रही है भारी बारिश? सुपर अल नीनो और ला-नीना का खतरनाक खेल

मानसून की आधिकारिक विदाई के बाद भी देश के कई हिस्सों में बादल बरस रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक इस अजीब स्थिति के पीछे सुपर अल नीनो और आने वाले ला-नीना प्रभाव को जिम्मेदार मान रहे हैं। इस बदलाव से मौसम का चक्र पूरी तरह बिगड़ गया है।
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बिजनेस एवं मार्केट डेस्क, द फ्रीलांस
अर्थव्यवस्था व बाजार ब्यूरो•12 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•47
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मानसून की विदाई के बाद भी देश में क्यों हो रही है भारी बारिश? सुपर अल नीनो और ला-नीना का खतरनाक खेल
📷 मानसून की विदाई के बाद भी देश में क्यों हो रही है भारी बारिश? सुपर अल नीनो और ला-नीना का खतरनाक खेल — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • मानसून की आधिकारिक विदाई के बाद भी देश के कई हिस्सों में बादल बरस रहे हैं। मौसम वैज्ञानिक इस अजीब स्थिति के पीछे सुपर अल नीनो और आने वाले ला-नीना प्रभाव को जिम्मेदार मान रहे हैं। इस बदलाव से मौसम का चक्र पूरी तरह बिगड़ गया है।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश में मानसून की तय तारीख पर विदाई हो चुकी है, लेकिन बादलों के बरसने का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है। उत्तर भारत से लेकर दक्षिण के कई राज्यों तक लोग अचानक हो रही बारिश से हैरान हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब मानसून जा चुका है, तो फिर आसमान में काले बादल क्यों मंडरा रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम ने इस मौसम के बदले मिजाज की जमीनी पड़ताल की और वैज्ञानिकों से बात की।

मौसम विभाग के जानकारों का कहना है कि इस बार हवा का रुख और समुद्र का तापमान पूरी तरह बदला हुआ है। प्रशांत महासागर में अल नीनो का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके साथ ही, अब ला-नीना की एंट्री होने वाली है। इन दोनों बड़े मौसम चक्रों के आपस में टकराने की वजह से बादलों का यह नया खेल शुरू हुआ है। इसकी वजह से देश के कई इलाकों में अक्टूबर और नवंबर के महीने में भी बारिश दर्ज की जा रही है।

सुपर अल नीनो ने कैसे बिगाड़ा मौसम का पूरा गणित

मौसम विज्ञानियों के मुताबिक, इस साल अल नीनो का प्रभाव बहुत ज्यादा ताकतवर रहा जिसे सुपर अल नीनो कहा जा रहा है। इसकी वजह से मानसून के दौरान कई जगहों पर सूखा पड़ा और बारिश कम हुई। लेकिन जैसे ही मानसून के जाने का वक्त आया, समुद्र की सतह का तापमान अचानक बदल गया। इस बदलाव ने हवा के दबाव को ऐसा मोड़ दिया कि नमी से भरे बादल दोबारा आसमान में लौट आए।

आम भाषा में समझें तो समुद्र के गर्म होने से हवा में भाप बहुत ज्यादा बन रही है। यह भाप आसमान में जाकर बादलों का रूप ले रही है और हवा के झोंके इन्हें मैदानी इलाकों की तरफ धकेल रहे हैं। यही वजह है कि त्योहारों के इस सीजन में लोगों को धूप के साथ अचानक तेज बारिश का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के लिए यह स्थिति बहुत चिंताजनक बन गई है क्योंकि उनकी पकी हुई फसलें खेतों में खराब हो रही हैं।

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अब ला-नीना के असर से लंबी चलेगी कड़ाके की ठंड

अल नीनो के कमजोर पड़ते ही अब ला-नीना अपना असर दिखाना शुरू कर रहा है। मौसम वैज्ञानिकों ने बड़ी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस बार सर्दी का मौसम बहुत लंबा खिंचेगा। मार्च के महीने तक बसंत का मौसम टल सकता है और लोगों को लंबे समय तक कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ सकता है। ला-नीना की वजह से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की जाती है और उत्तर भारत में शीत लहर का प्रकोप बढ़ जाता है।

इस बदलते मौसम का सीधा असर देश की खेती और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। बेमौसम बारिश के कारण गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है, जिससे चीनी की मिठास कड़वी होती दिख रही है। चीनी मिलों और बाजार में गन्ने की पैदावार घटने से आने वाले दिनों में चीनी की कीमतें बढ़ सकती हैं। आम आदमी की रसोई का बजट इस मौसम के फेरबदल के कारण फिर से बिगड़ सकता है।

खेती और बाजार पर पड़ रहा भारी असर

जमीनी स्तर पर किसानों से बात करने पर पता चला कि धान और सोयाबीन की कटी हुई फसलें खेतों में भीग गई हैं। सरकार और कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें। मौसम का यह उतार-चढ़ाव सिर्फ इंसानों की सेहत पर ही नहीं, बल्कि सब्जियों और अनाजों के बाजार भाव पर भी सीधा असर डाल रहा है।

द फ्रीलान्स की पड़ताल में यह साफ हुआ है कि ग्लोबल वार्मिंग और समुद्र के तापमान में हो रहे लगातार बदलाव इन मौसमी आपदाओं की मुख्य जड़ हैं। आने वाले महीनों में मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना बेहद जरूरी होगा। सरकार और आम जनता दोनों को ही इस बदलते मौसम के मिजाज से निपटने के लिए अब पहले से ज्यादा तैयार रहना होगा।

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सत्यापित संपादकीय डेस्क

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द फ्रीलांस की बिजनेस डेस्क भारतीय अर्थव्यवस्था, शेयर बाजार, बजट, महंगाई, बैंकिंग, स्टार्टअप्स और आम नागरिक के घरेलू बजट पर पड़ने वाले नीतिगत प्रभावों का गहन डेटा-आधारित विश्लेषण करती है। हम निष्पक्ष, सटीक और तथ्यात्मक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह समाचार रिपोर्ट विभिन्न प्रमाणित समाचार एजेंसियों, आधिकारिक बयानों और स्थानीय संवाददाताओं से प्राप्त इनपुट के आधार पर तैयार की जाती है।

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