नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में आज सुबह कारोबार की शुरुआत के साथ ही भारी गिरावट देखने को मिली। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 700 अंक लुढ़ककर 71,900 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। इसके साथ ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 250 अंकों की भारी कमजोरी के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहा है। शुरुआती घंटों में ही बाजार में बिकवाली का भारी दबाव बन गया जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और घरेलू स्तर पर मुनाफावसूली के कारण यह गिरावट आई है।
कारोबार के दौरान आज सबसे ज्यादा मार ऑटो और मेटल शेयरों पर पड़ी है। टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, और मारुति सुजुकी जैसी बड़ी ऑटो कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। वहीं मेटल सेक्टर में टाटा स्टील और हिंडाल्को जैसे दिग्गज शेयर भी बिकवाली की आंधी में फिसल गए। निवेशकों ने सुरक्षित निवेश की रणनीति अपनाते हुए अपने शेयर बेचना शुरू कर दिया। इस वजह से बैंकिंग और आईटी शेयरों में भी सुस्ती का माहौल बना रहा। बाजार में हर तरफ लाल निशान ही दिखाई दे रहा है जिससे छोटे निवेशकों में थोड़ी घबराहट का माहौल भी पैदा हो गया है।
बाजार में अचानक आई इस बड़ी गिरावट के प्रमुख कारण
दलाल स्ट्रीट पर अचानक छाए इस काले बादल के पीछे कई बड़े कारण माने जा रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में रातोंरात आई कमजोरी और एशियाई बाजारों के सुस्त रुख ने भारतीय निवेशकों का भरोसा डगमगा दिया है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई द्वारा लगातार पैसा निकाले जाने से भी बाजार का मूड बिगड़ा है। पिछले कुछ हफ्तों से बाजार लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई पर चल रहा था। ऐसे में ऊंचे स्तरों पर निवेशकों ने मुनाफावसूली करना बेहतर समझा। जब बड़े निवेशकों ने अपने शेयर बेचे तो बाजार का संतुलन बिगड़ गया और सूचकांक तेजी से नीचे की ओर आ गिरे।
ऑटो और मेटल शेयरों में आई इस सुस्ती की एक बड़ी वजह वैश्विक मांग में कमी भी बताई जा रही है। चीन और अन्य बड़े बाजारों से सुस्त आर्थिक आंकड़े आने के कारण मेटल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। वहीं घरेलू बाजार में वाहन निर्माताओं के लिए इनपुट लागत बढ़ने और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने से खरीदार सतर्क हो गए हैं। इन सभी का मिलाजुला असर कंपनियों के तिमाही नतीजों और भविष्य के मुनाफे पर पड़ने की आशंका है। यही वजह है कि विश्लेषक इन क्षेत्रों में अभी और उतार-चढ़ाव रहने की बात कह रहे हैं।
छोटे निवेशकों के लिए इस समय क्या है समझदारी
बाजार में इस तरह की अचानक आई भारी गिरावट के बाद छोटे और खुदरा निवेशकों के मन में डर बैठ जाना स्वाभाविक है। वित्तीय विशेषज्ञों की सलाह है कि इस तरह के समय में घबराकर अपने शेयर औने-पौने दामों पर बिल्कुल न बेचें। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव एक स्वाभाविक प्रक्रिया है जो मांग और आपूर्ति के नियमों पर काम करती है। यदि आपने लंबी अवधि के लिए मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में पैसा लगाया है, तो आपको इस गिरावट से डरने की जरूरत नहीं है। बल्कि यह समय अच्छे शेयरों को कम कीमत पर खरीदने का मौका भी हो सकता है।
हालांकि बिना सोचे-समझे किसी भी नए शेयर में पैसा लगाने से इस समय बचना चाहिए। बाजार की स्थिति अभी अस्थिर बनी हुई है और अगले कुछ सत्रों तक बिकवाली का दौर जारी रह सकता है। ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन पर स्टॉप लॉस का कड़ाई से पालन करना चाहिए। हमारी ग्राउंड पड़ताल के अनुसार बाजार के एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि निवेशकों को आरबीआई की आगामी मौद्रिक नीति और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी अपनी पैनी नजर रखनी चाहिए। जैसे ही बाजार में स्थिरता के संकेत मिलेंगे, रिकवरी का दौर भी शुरू हो सकता है।






