नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मी अचानक बहुत तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने राजघाट पहुंचकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इसके तुरंत बाद इन बड़े नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ सड़क पर उतरकर कड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कनॉट प्लेस से लेकर राजघाट तक विपक्षी दलों के सांसदों ने मार्च निकाला और सरकार के साथ चुनाव आयोग की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी सड़कों पर नजर आए। विपक्षी नेताओं का साफ कहना है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है और उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। राजघाट पर महात्मा गांधी की समाधि के पास विपक्षी नेताओं का यह सत्याग्रह राजनीतिक गलियारों में चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। सुरक्षा बलों ने राजघाट और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया है ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या से बचा जा सके।
चुनाव आयोग के फैसलों पर उठे बड़े सवाल
एक तरफ जहां विपक्षी दल सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने भी हाल ही में कई बड़े फैसले लिए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची से नाम कटने की स्थिति में अधिकारी खुद लोगों के घर जाकर दस्तावेज लेंगे। इसके अलावा चुनाव आयोग ने अपनी तकनीकी प्रणाली ईसीनेट का स्वतंत्र रूप से ऑडिट कराने का भी बड़ा निर्णय लिया है। आयोग का मानना है कि इन कदमों से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और लोगों का भरोसा और अधिक मजबूत होगा।
लेकिन विपक्षी दलों का गुस्सा इन फैसलों से शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रणाली में बड़े स्तर पर गड़बड़ियां हो रही हैं और आम जनता के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग दोनों को आड़े हाथों लिया। उनका कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए वे सड़क से लेकर संसद तक अपनी आवाज मजबूती से उठाते रहेंगे और पीछे नहीं हटेंगे।
राजघाट पर विपक्षी दलों का शक्ति प्रदर्शन
कनॉट प्लेस से राजघाट तक निकाले गए इस विरोध मार्च में विपक्षी एकता की एक अलग तस्वीर देखने को मिली। कांग्रेस नेताओं के साथ अन्य क्षेत्रीय दलों के सांसदों ने भी कंधे से कंधा मिलाकर मार्च में हिस्सा लिया। राजघाट पर पहुंचने के बाद सभी नेता गांधी स्मारक के पास धरने पर बैठ गए और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जताया। नेताओं का यह सत्याग्रह इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली गई है।
स्थानीय स्तर पर इस प्रदर्शन के कारण यातायात पर भी थोड़ा असर पड़ा है, हालांकि पुलिस ने ट्रैफिक को डायवर्ट कर स्थिति को नियंत्रित करने की पूरी कोशिश की है। आम जनता और यात्रियों को कुछ समय के लिए जाम का सामना करना पड़ा। सुरक्षा एजेंसियों ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए राजघाट के आसपास के रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे की हर अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।








