अजमेर सेंट्रल जेल की निलंबित महिला जेलर दिव्या चौधरी को राजस्थान पुलिस ने कोटा से गिरफ्तार कर लिया है। इस पूरे मामले ने जेल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि दिव्या चौधरी अपनी पद का दुरुपयोग करती थीं। वह जेल में बंद कैदियों को अपने घर पर ले जाती थीं और उनसे झाड़ू-पोंछा जैसे घरेलू काम करवाती थीं।
इस गंभीर मामले की भनक लगते ही जेल विभाग के उच्च अधिकारियों में हड़कंप मच गया था। शुरुआती जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद दिव्या चौधरी को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के बाद से ही वह लगातार अपनी जगह बदलकर छुप रही थीं। पुलिस और प्रशासनिक टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही थीं और आखिरकार उन्हें कोटा से पकड़ लिया गया।
जेल के नियमों की उड़ाई गई धज्जियां
जेल मैनुअल के नियमों के मुताबिक किसी भी सजायाफ्ता या विचाराधीन कैदी को जेल परिसर से बाहर ले जाना और निजी काम कराना पूरी तरह से अवैध है। लेकिन अजमेर सेंट्रल जेल में तैनात रहीं दिव्या चौधरी ने इन सभी नियमों को ताक पर रख दिया। वह अपनी ताकत का रौब दिखाकर कैदियों को कानून के दायरे से बाहर ले जाती थीं। इस घटना ने जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि आखिर कैसे कैदी जेल से बाहर आसानी से आ-जा रहे थे।
स्थानीय सूत्रों और विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले की अंदरूनी जांच काफी समय से चल रही थी। जब सबूत पुख्ता हो गए तब जाकर उच्च स्तर पर गाज गिरी। महिला जेलर पर लगे इन आरोपों के बाद जेल विभाग के भीतर भी कई अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस अब दिव्या चौधरी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता चल सके कि वह कितने समय से इस तरह का गैरकानूनी काम करवा रही थीं।
प्रशासनिक कार्रवाई और आगे की जांच
इस गिरफ्तारी के बाद राजस्थान के प्रशासनिक हलकों में भारी चर्चा है। आम लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि जेल सुधार ग्रह होते हैं, न कि अधिकारियों के निजी नौकर रखने की जगह। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी महिला जेलर से गहन पूछताछ की जा रही है और अदालत में पेश कर रिमांड की मांग की जाएगी ताकि पूरे नेक्सेस का पर्दाफाश हो सके।
द फ्रीलान्स की टीम इस मामले की लगातार जमीनी पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में यह भी देखा जाएगा कि क्या इस खेल में जेल के कुछ अन्य प्रहरी या अधिकारी भी शामिल थे। कानून के जानकारों का मानना है कि पद का दुरुपयोग करने के इस मामले में महिला जेलर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं क्योंकि साक्ष्य उनके खिलाफ बहुत मजबूत बताए जा रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और सुधार की मांग
इस घटना के सामने आने के बाद अजमेर सेंट्रल जेल के भीतर सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की समीक्षा की जा रही है। जेल महानिदेशालय ने राज्य की अन्य जेलों को भी सख्त निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। कैदियों के अधिकारों और जेल की चारदीवारी के नियमों का पालन कराने के लिए अब औचक निरीक्षण बढ़ा दिए गए हैं।




