नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की तरफ से बहुत बड़े बदलाव सामने आ रहे हैं। पिछले काफी समय से वेतन सीमा यानी वेज सीलिंग को बढ़ाने की मांग की जा रही थी, जिस पर अब श्रम मंत्रालय और संगठन स्तर पर तेजी से काम चल रहा है। इस नई व्यवस्था के लागू होने से उन लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा जिनकी मासिक सैलरी पंद्रह हजार रुपये से ज्यादा और पच्चीस हजार रुपये से कम है। अब तक पंद्रह हजार रुपये से अधिक कमाने वाले कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि काटना अनिवार्य नहीं था, लेकिन इस सीमा के बढ़ने से सामाजिक सुरक्षा का दायरा काफी बड़ा हो जाएगा।
कर्मचारियों के लिए केवल वेतन सीमा ही नहीं बदली जा रही है, बल्कि पैसों की निकासी को लेकर भी बहुत बड़ी राहत दी जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि आपात स्थिति में पीएफ का पैसा निकालने के लिए लोगों को हफ्तों दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं या ऑनलाइन पोर्टल पर लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अब इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए संगठन एक नई तकनीक पर काम कर रहा है। इसके तहत खाताधारक बहुत जल्द देश के किसी भी एटीएम से अपने पीएफ खाते का पचहत्तर प्रतिशत तक पैसा सीधे निकाल सकेंगे। इस आधुनिक सुविधा को शुरू करने के लिए देश भर के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर सॉफ्टवेयर को अपडेट करने का काम तेजी से चल रहा है।
वेतन सीमा बढ़ने से पेंशन और बचत पर क्या होगा असर
जब पीएफ की वेतन सीमा पंद्रह हजार रुपये से बढ़ाकर पच्चीस हजार रुपये की जाएगी, तो इसका सीधा असर कर्मचारियों के पेंशन यानी ईपीएस फंड पर भी पड़ेगा। अब तक पंद्रह हजार रुपये की सीमा के हिसाब से ही पेंशन का योगदान तय होता था, जिससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन बहुत कम बनती थी। नई सीमा लागू होने के बाद कर्मचारियों का अधिक पैसा पेंशन और भविष्य निधि में जमा होगा। इससे भविष्य में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली आर्थिक सुरक्षा और पेंशन की राशि में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि इसका एक पहलू यह भी है कि कर्मचारियों के हाथ में आने वाली मासिक सैलरी यानी इन-हैंड सैलरी में थोड़ी सी कटौती हो सकती है, क्योंकि उनका ज्यादा हिस्सा बचत के रूप में कटेगा।
नौकरी बदलने वाले और पीएफ निकालने वाले खाताधारकों के लिए भी संगठन ने एक बहुत जरूरी चेतावनी जारी की है। अक्सर लोग नई नौकरी में जाते ही पुरानी कंपनी का सारा पीएफ निकाल लेते हैं और पुराना रिकॉर्ड भूल जाते हैं। अधिकारियों का कहना है कि नौकरी बदलने पर पीएफ का पूरा ट्रांसफर रिकॉर्ड और पुरानी पासबुक संभाल कर रखनी बेहद जरूरी है। यदि रिकॉर्ड में कोई भी गड़बड़ी मिलती है या बैंक विवरण मेल नहीं खाते हैं, तो भविष्य में पेंशन क्लू या आपातकालीन निकासी के समय बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसलिए सभी सदस्यों को सलाह दी जाती है कि वे अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन पोर्टल पर जाकर अपने सभी पुराने रिकॉर्ड और केवाईसी को पूरी तरह से दुरुस्त रखें।
एटीएम से पैसे निकालने की नई तकनीकी प्रक्रिया
एटीएम के जरिए पीएफ का पैसा निकालने की सुविधा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए बैंकिंग नेटवर्क में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। तकनीकी टीम लगातार ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित कर रही है जो आधार और बैंक खातों से सीधे जुड़े होंगे ताकि धोखाधड़ी की कोई गुंजाइश न बचे। जब कोई खाताधारक एटीएम मशीन के जरिए अपने पीएफ फंड का पचहत्तर प्रतिशत हिस्सा निकालने का अनुरोध करेगा, तो उसकी पहचान का सत्यापन ओटीपी और बॉयोमीट्रिक माध्यम से किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के शुरू हो जाने के बाद अस्पताल के खर्च, बच्चों की पढ़ाई या घर की किसी इमरजेंसी के वक्त पैसे के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ेगा।
जमीनी स्तर पर काम कर रहे श्रम संगठनों और आम कर्मचारियों ने इन बदलावों का स्वागत किया है लेकिन साथ ही इसके क्रियान्वयन में पारदर्शिता की मांग भी उठाई है। कई कर्मचारियों का कहना है कि नियम तो बहुत अच्छे बनाए जाते हैं लेकिन जब उन्हें लागू किया जाता है तो सर्वर डाउन होने या तकनीकी खामियों के कारण लोगों को महीनों तक इंतजार करना पड़ता है। संगठन के वरिष्ठ अधिकारियों का दावा है कि इस बार सॉफ्टवेयर को पूरी तरह फूल-प्रूफ बनाया जा रहा है ताकि आम आदमी को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही आधिकारिक अधिसूचना जारी होगी, हम सबसे पहले सटीक जानकारी आप तक पहुंचाएंगे।





