फतेहपुर (द फ्रीलान्स ग्राउंड रिपोर्ट) — उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर देने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही और गलत इंजेक्शन लगाने के कारण मरीजों की लगातार हो रही मौतों पर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी निधि गुप्ता ने इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच बैठा दी है। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में बिना किसी वैध डिग्री के धड़ल्ले से क्लीनिक चलाए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर आम आदमी की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
प्रशासन की इस अचानक कार्रवाई से स्थानीय स्वास्थ्य माफियाओं में हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ दिनों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने कई जगहों पर छापेमारी की है। इन छापों के दौरान अधिकांश क्लीनिकों में गंभीर कमियां पाई गईं। डॉक्टरों के पास न तो कोई मेडिकल डिग्री थी और न ही क्लीनिक चलाने का वैध लाइसेंस। हैरानी की बात यह है कि जिन क्लीनिकों को प्रशासन पहले सील कर चुका था, वे सील तोड़कर दोबारा संचालित किए जा रहे थे। इस खुलासे के बाद डीएम निधि गुप्ता ने सभी अवैध संचालकों को मात्र 24 घंटे के भीतर अपने वैध दस्तावेज पेश करने का कड़ा नोटिस जारी किया है।
सील होने के बाद भी कैसे खुल रहे हैं अवैध क्लीनिक
जमीनी हकीकत यह है कि ग्रामीण इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल बहुत गहरा है। गरीब और अनपढ़ लोग कम खर्च और तुरंत आराम के चक्कर में इन फर्जी हकीमों के जाल में फंस जाते हैं। जब किसी मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ती है और गलत इंजेक्शन या दवा से उसकी मौत हो जाती है, तब जाकर मामले का खुलासा होता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण इन फर्जी क्लीनिकों पर समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती है। यही वजह है कि सील लगने के कुछ ही दिनों बाद ये क्लीनिक फिर से अपनी दुकानें सजा लेते हैं और लोगों की जान जोखिम में डालते हैं।
इस बीच शिक्षा विभाग से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आया है, जहां जिला प्रशासन ने स्कूलों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को परखा है। हालांकि, ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) से जब इस बारे में सवाल किए गए तो उनका रटा-रटाया जवाब मिला कि उन्हें मामलों की पूरी जानकारी नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शिक्षा या स्वास्थ्य विभाग में कोई भी अधिकारी इन लापरवाहियों में लिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन की इस दोहरी सख्ती से महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
प्रशासन की चेतावनी और 24 घंटे का अल्टीमेटम
जिलाधिकारी निधि गुप्ता के सख्त आदेशों के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हो गई हैं। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने इलाके में घूमने वाले और अवैध रूप से क्लीनिक चलाने वाले फर्जी डॉक्टरों की सूची तैयार करें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जो भी संचालक 24 घंटे के भीतर अपने कागजात नहीं दिखाएगा, उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए जाएंगे और क्लीनिक को बुलडोजर से ढहाया जा सकता है। पुलिस बल के साथ मिलकर इन अवैध अड्डों पर स्थायी ताला लगाने की तैयारी की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब फतेहपुर के कुछ अंदरूनी गांवों का दौरा किया, तो लोगों ने खुलकर अपनी पीड़ा सुनाई। ग्रामीणों का कहना है कि झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इन्हें जेल भेजा जाना चाहिए। सरकारी अस्पतालों की बदहाली और डॉक्टरों की कमी के कारण मजबूरी में लोगों को इन झोलाछाप के पास जाना पड़ता है। बहरहाल, डीएम निधि गुप्ता के इस सख्त फरमान के बाद अब उम्मीद जगी है कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की इस अराजकता पर कुछ हद तक लगाम जरूर कसेगी।
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली
फतेहपुर का यह पूरा घटनाक्रम इस बात का जीता-जागा उदाहरण है कि किस तरह से देश के दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य तंत्र कमजोर पड़ रहा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की लचर व्यवस्था और डॉक्टरों की अनुपस्थिति सीधे तौर पर झोलाछाप संस्कृति को बढ़ावा दे रही है। जब तक सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय गांवों में डॉक्टरों की पक्की तैनाती और उचित इलाज की गारंटी नहीं देंगे, तब तक मासूम लोगों की जान इस तरह से जाती रहेगी। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखेगी और प्रशासनिक कार्रवाई की हर एक अपडेट अपने पाठकों तक पहुंचाती रहेगी।






