नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — अदालतों में तारीख मिलने के लंबे सिलसिलों से आम लोग ही नहीं, बल्कि कई बार कानूनी लड़ाई लड़ने वाले वकील भी मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। ताजा मामला एक ऐसे ही गुस्से का है जहां न्याय मिलने में हो रही देरी से बौखलाए एक वकील ने अपना आपा खो दिया। वकील ने गुस्से में आकर सीधे कोर्टरूम के अंदर ही कुर्सी में आग लगा दी। इस घटना ने एक बार फिर से अदालती कार्यप्रणाली और मामलों के निपटारे में लगने वाले लंबे समय पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की जानकारी मिलते ही कोर्ट परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मियों और पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में आग पर काबू पाने के लिए पानी और अग्निशामक यंत्रों का इस्तेमाल किया गया। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आई, लेकिन कोर्टरूम के अंदर इस तरह की अराजकता फैलने से हड़कंप जरूर मच गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी वकील को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है कि आखिर उसने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।
लंबे मुकदमों और तारीखों का बढ़ता मानसिक दबाव
भारतीय न्याय प्रणाली में मामलों की सुनवाई के दौरान मिलने वाली लंबी तारीखें हमेशा से चर्चा का विषय रही हैं। तारीख पर तारीख मिलने के कारण मुकदमों का फैसला सालों-साल तक अटका रहता है। वकीलों के मुताबिक, कई बार उनके मुवक्किल उन्हें रोज परेशान करते हैं और वे कोर्ट में चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। इस मामले में भी शुरुआती जांच में यही सामने आया है कि वकील कई महीनों से एक पुराने मामले की सुनवाई टलने से बेहद परेशान था और उसका यह गुस्सा अचानक फूट पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घटना के समय कोर्टरूम में कार्यवाही चल रही थी और अचानक वकील ने वहां रखी एक कुर्सी को आग के हवाले कर दिया। आग लगते ही कोर्टरूम में धुआं फैल गया और वहां मौजूद जज, वकील और अन्य लोग अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागे। हालांकि सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत स्थिति को संभाल लिया, लेकिन इस घटना ने अदालत की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि कोई व्यक्ति कोर्टरूम के अंदर ज्वलनशील पदार्थ या ऐसी चीज कैसे ले गया।
बार एसोसिएशन और अदालत प्रशासन की सख्त कार्रवाई
घटना के तुरंत बाद स्थानीय बार एसोसिएशन ने भी इस कृत्य की कड़ी निंदा की है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि चाहे कितनी भी बड़ी परेशानी क्यों न हो, कानून हाथ में लेने का अधिकार किसी को नहीं है। अदालत परिसर एक पवित्र जगह है और वहां इस तरह की हिंसा या तोड़फोड़ करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। आरोपी वकील के खिलाफ बार काउंसिल की तरफ से भी अनुशासनात्मक कार्रवाई किए जाने की पूरी तैयारी चल रही है, जिसमें उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
दूसरी तरफ, इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश भर की अदालतों में वकीलों और मुवक्किलों के मानसिक स्वास्थ्य तथा न्याय मिलने में हो रही देरी पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। न्यायविदों का मानना है कि अदालतों में जजों की कमी और मामलों के भारी बोझ को जल्द से जल्द कम करने की जरूरत है। अगर समय पर फैसले नहीं होंगे, तो ऐसे तनावपूर्ण हालात भविष्य में भी देखने को मिल सकते हैं, जो किसी भी सभ्य समाज के लिए ठीक नहीं हैं।
पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी वकील के खिलाफ संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी काम में बाधा डालने समेत कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उससे पूछताछ की जा रही है कि क्या इस घटना में उसके साथ कोई और भी शामिल था या यह उसका अकेला का फैसला था। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और अदालत प्रशासन के अगले कदमों की पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।






