नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — 'द फ्रीलान्स' के पास आई ताजा जानकारी के मुताबिक, आईपीएस अधिकारी मनोज शर्मा का जीवन संघर्ष एक बार फिर से देश के युवाओं के बीच चर्चा का बड़ा केंद्र बन गया है। कभी चपरासी की नौकरी करने वाले और परीक्षाओं में फेल होने वाले मनोज शर्मा ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे पक्के हों, तो कोई भी मुश्किल मंजिल हासिल की जा सकती है। हाल ही में उन्होंने एक बार फिर अपनी जिंदगी के सबसे कठिन दिनों को याद किया और बताया कि कैसे उन्होंने अपनी हर असफलता को अपनी ताकत बनाया।
मनोज शर्मा का शुरुआती जीवन बहुत ही संघर्षों से भरा हुआ था। मध्य प्रदेश के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले मनोज के लिए पढ़ाई करना और आगे बढ़ना किसी चुनौती से कम नहीं था। स्कूल के दिनों में वे पढ़ाई में बहुत होशियार नहीं थे और 12वीं कक्षा में भी उनके नंबर बहुत कम आए थे। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल होता था। पेट पालने के लिए उन्हें ग्वालियर की सड़कों पर टेम्पो चलाना पड़ा और कभी-कभी चपरासी का काम भी करना पड़ा ताकि वे किसी तरह अपना गुजारा चला सकें और अपनी पढ़ाई का खर्च उठा सकें.
चपरासी से लेकर लाइब्रेरियन तक का सफर
जिंदगी की तमाम परेशानियों के बीच मनोज शर्मा ने कभी अपनी किताबों से नाता नहीं तोड़ा। उन्होंने एक लाइब्रेरी में चपरासी और चपरासी सह लाइब्रेरियन का काम किया। उस लाइब्रेरी में काम करते समय उन्हें बड़े-बड़े लेखकों, दार्शनिकों और महान हस्तियों की किताबें पढ़ने का मौका मिला। इन किताबों ने उनकी सोच को पूरी तरह बदल दिया और उनके भीतर सिविल सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी पास करने की एक मजबूत आग सुलग उठी। उन्होंने तय कर लिया कि चाहे हालात कितने भी खराब क्यों न हों, वे अपनी किस्मत की रेखा खुद लिखेंगे।
लाइब्रेरी में बिताए गए उन दिनों को याद करते हुए मनोज शर्मा अक्सर बताते हैं कि कैसे वहां पढ़ी गई किताबों ने उन्हें जीवन की असली सीख दी। उन्होंने दुनिया को देखने का अपना नजरिया बदला और हर छोटी-बड़ी मुश्किल का डटकर सामना करना सीखा। उनके पास कोचिंग के पैसे नहीं थे, महंगे नोट्स खरीदने की हैसियत नहीं थी, लेकिन उनके पास एक मजबूत संकल्प शक्ति और कभी न हार मानने वाला जज्बा था। उन्होंने दिल्ली आकर खुद ही बिना किसी बड़ी कोचिंग के अपनी तैयारी शुरू की और दिन-रात एक कर दिए।
असफलता से सीखकर आईपीएस बनने की कहानी
यूपीएससी की तैयारी का रास्ता कतई आसान नहीं था। पहले ही प्रयास में वे कई चुनौतियों से जूझे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी असफलताओं से उन्होंने लगातार सीख ली और अपनी कमजोरियों को सुधारा। आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और वे आईपीएस अधिकारी बन गए। आज वे देश के युवाओं के बीच एक प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी यह कहानी उन तमाम छात्रों के लिए एक बड़ा सबक है जो छोटी-मोटी असफलताओं से निराश होकर अपने सपने छोड़ देते हैं।
मनोज शर्मा का यह सफर आज के दौर के हर उस युवा को आईना दिखाता है जो शॉर्टकट के जरिए सफलता पाना चाहता है। उनका साफ कहना है कि जिंदगी में कोई भी शॉर्टकट आपकी मेहनत का विकल्प नहीं हो सकता। जब आप सच्चे मन से किसी लक्ष्य के पीछे भागते हैं, तो पूरी कायनात आपकी मदद करती है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड पड़ताल में यह बात पूरी तरह साफ हो जाती है कि असली नायक पर्दे पर नहीं, बल्कि असल जिंदगी के मैदान में पसीना बहाने वाले लोग होते हैं.
सफलता का नया मंत्र और युवाओं को संदेश
अपने हालिया संदेश में मनोज शर्मा ने युवाओं को सलाह दी है कि वे कभी भी अपने अतीत या अपनी पारिवारिक स्थिति को अपनी तरक्की की राह में रोड़ा न बनने दें। आपका अतीत चाहे जैसा भी रहा हो, आपका भविष्य पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आप आज यानी वर्तमान में कितनी मेहनत कर रहे हैं। उनका यह सक्सेस मंत्र आज देश के कोने-कोने में उन छात्रों तक पहुंच रहा है जो अभावों के बीच बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं।
द फ्रीलान्स की टीम ने पाया है कि मनोज शर्मा की यह यात्रा सिर्फ एक व्यक्ति की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत के आम युवाओं के उस अदम्य साहस का प्रतीक है जो अपनी तकदीर खुद बदलने का माद्दा रखते हैं। आने वाले समय में भी उनका यह जीवन दर्शन अनगिनत युवाओं को सही रास्ता दिखाता रहेगा और उन्हें अपनी असफलताओं से डरने के बजाय उनसे लड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहेगा।



