नई दिल्ली/लखनऊ/पटना — देश के कई राज्यों में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत से सक्रिय हो गया है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और पहाड़ी राज्य उत्तराखंड तक भारी बारिश ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। उत्तर प्रदेश मौसम विभाग ने राज्य के करीब 42 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। राजधानी लखनऊ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण शहर के एक प्रसिद्ध मॉल के अंदर तक पानी घुस गया, जिससे वहां आने वाले लोगों और दुकानदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पानी भरने के बाद मॉल प्रशासन को तुरंत राहत कार्य शुरू करने पड़े और दुकानों की सुरक्षा के लिए एहतियाती कदम उठाने पड़े।
राजधानी लखनऊ के अलावा उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों जैसे बाराबंकी, सीतापुर, अयोध्या और गोंडा में भी नदियां उफान पर हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के घरों में पानी घुसने की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। राज्य प्रशासन ने सभी जिलाधिकारियों को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले अगले दो दिनों तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में झमाझम बारिश का यह दौर यूं ही जारी रहने की पूरी संभावना है।
बिहार में बाढ़ का प्रकोप, 466 गांव डूबे
उत्तर प्रदेश की तरह पड़ोसी राज्य बिहार में भी हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल के तराई वाले इलाकों और बिहार के अपने जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही लगातार भारी बारिश के कारण राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंगा, कोसी, गंडक और बागमती जैसी नदियां उफान पर हैं, जिसके कारण राज्य के कई जिलों में बाढ़ का पानी फैल गया है। शुरुआती प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, बिहार के विभिन्न जिलों में कुल 466 से अधिक गांव पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। हजारों एकड़ में खड़ी धान और अन्य फसलें जलमग्न हो चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में जिला प्रशासन द्वारा राहत सामग्री का वितरण शुरू कर दिया गया है। लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों तक पहुंचाने के लिए नाविकों और सरकारी नावों की मदद ली जा रही है। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारी लगातार स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं। गांव के लोगों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में उन्हें इस तरह की भयानक आपदा का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस बार पानी का स्तर उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे गांवों का संपर्क जिला मुख्यालयों से पूरी तरह कट गया है।
उत्तराखंड में लैंडस्लाइड से रास्ते बंद
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में भी मौसम की मार कम होने का नाम नहीं ले रही है। लगातार हो रही भारी बारिश के बाद पहाड़ी दरकने लगी हैं और कई प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों तथा संपर्क मार्गों पर भारी मलबा आ गया है। बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री धाम जाने वाले रास्तों पर कई जगहों पर लैंडस्लाइड होने के कारण यातायात घंटों बाधित रहा है। चार धाम यात्रा पर आए तीर्थयात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके। राज्य के सीमावर्ती जिलों में भी भूस्खलन के कारण छोटे-छोटे रास्ते बंद हो गए हैं, जिन्हें खोलने के लिए सड़क निर्माण एजेंसियों की मशीनें लगातार काम कर रही हैं।
प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि लोग बिना जरूरी काम के पहाड़ी रास्तों पर सफर करने से पूरी तरह बचें। मौसम विभाग की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए पहाड़ी जिलों में स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में भी अवकाश घोषित कर दिया गया है। उत्तर भारत के इन तीनों राज्यों में बारिश और बाढ़ की इस स्थिति ने एक बार फिर मानसून के दौरान होने वाली प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोल दी है। द फ्रीलान्स की टीम जमीनी स्तर पर हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और पल-पल की सटीक जानकारी अपने पाठकों तक पहुंचा रही है।









