नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में हलचल मचाने वाली खबर सामने आई है। विदेशी निवेशक जीक्यूजी पार्टनर्स ने अदाणी ग्रुप की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी को लेकर बड़ा फेरबदल किया है। अप्रैल से जून के बीच इस कंपनी ने अदाणी ग्रुप के शेयरों में जोरदार बिकवाली की है। आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान करीब बारह हजार सातर करोड़ रुपये निकाले गए हैं। पिछले साल जब अदाणी समूह संकट में था, तब इसी विदेशी निवेशक ने आगे आकर बड़ा दांव लगाया था। अब इस ताजा बिकवाली के बाद बाजार में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इस बड़े निवेशक का भरोसा कम हुआ है।
दलाल स्ट्रीट के जानकारों का मानना है कि यह कदम सामान्य पोर्टफोलियो संतुलन का हिस्सा भी हो सकता है। जब शेयर के दाम बढ़ जाते हैं, तो बड़े निवेशक अपना मुनाफा निकाल लेते हैं। हालांकि, इस भारी बिकवाली के साथ एक दिलचस्प पहलू यह भी सामने आया है। जीक्यूजी पार्टनर्स ने सभी कंपनियों से अपना पैसा नहीं निकाला है। कुछ चुनिंदा कंपनियों में इस विदेशी निवेशक ने अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई भी है। इससे यह साफ होता है कि ग्रुप की सभी कंपनियों को एक नजर से नहीं देखा जा रहा है।
अदाणी की किन कंपनियों में हुई बिकवाली और कहां बढ़ा दांव?
बाजार से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार, जीक्यूजी पार्टनर्स ने कुछ प्रमुख शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम की है। लेकिन इसके विपरीत, अदाणी ग्रुप की तीन अन्य कंपनियों में इस निवेशक ने अपना भरोसा दिखाया है और हिस्सेदारी बढ़ाई है। यह इस बात का संकेत है कि निवेशक अब चुनिंदा और मजबूत रिटर्न देने वाले शेयरों पर ही दांव लगाना चाहता है। दूसरी तरफ, भारतीय म्यूचुअल फंड्स और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी इस स्थिति में बड़ा रुख अपनाया है। जब विदेशी निवेशक शेयर बेच रहे थे, तब भारत के म्यूचुअल फंड खरीदार के रूप में सबसे आगे रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू निवेशकों का यह रुख भारतीय बाजार की मजबूती को दिखाता है। अब हमारे देश के निवेशक विदेशी बिकवाली के दबाव को आसानी से संभाल रहे हैं। म्यूचुअल फंड्स में हर महीने आने वाला आम जनता का पैसा इन बड़े सौदों को समर्थन दे रहा है। जिन कंपनियों में विदेशी निवेशक ने पैसा घटाया है, वहां घरेलू फंड्स ने खाली जगह को भर दिया है। इससे शेयरों के भाव में बहुत बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली है।
बाजार पर इस बड़े फेरबदल का क्या असर पड़ेगा?
आम निवेशकों के मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि इस उठापटक का उनके निवेश पर क्या असर होगा। जानकारों की सलाह है कि निवेशकों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है। बड़े निवेशक बाजार की चाल और मुनाफे के हिसाब से अपनी रणनीति बदलते रहते हैं। जीक्यूजी पार्टनर्स ने भले ही कुछ शेयर बेचे हैं, लेकिन उनका कुल निवेश अभी भी बहुत बड़ा है। इसका मतलब है कि वे पूरी तरह से बाहर नहीं हुए हैं, बल्कि केवल अपनी स्थिति को दोबारा जांच रहे हैं।
स्थानीय ब्रोकरेज फर्म्स के मुताबिक अदाणी ग्रुप के शेयर अब अपनी पुरानी स्थिरता की तरफ लौट रहे हैं। कंपनी के बिजनेस के बुनियादी आंकड़े मजबूत बने हुए हैं। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विदेशी फंड्स और घरेलू म्यूचुअल फंड्स का यह आपसी मुकाबला बाजार को किस दिशा में ले जाता है। फिलहाल निवेशकों को किसी भी अफवाह पर ध्यान देने के बजाय अपने वित्तीय सलाहकार की राय से ही आगे बढ़ना चाहिए।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
हमारी टीम ने जब बाजार के जानकारों और ब्रोकरेज हाउस से बात की, तो यह बात सामने आई कि यह सौदा विशुद्ध रूप से व्यावसायिक है। संकट के समय साथ देने वाले राजीव जैन की कंपनी जीक्यूजी पार्टनर्स ने समय-समय पर अपने मुनाफे को बुक किया है। यह किसी बड़े संकट का संकेत नहीं है, बल्कि सामान्य शेयर बाजार की प्रक्रिया है। आम निवेशकों को अपनी नजर कंपनी के तिमाही नतीजों पर रखनी चाहिए, न कि केवल विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर।







