नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को प्रस्तावित 'लहरा दो तिरंगा' प्रदर्शन से ठीक पहले राजधानी में भारी हंगामा देखने को मिला है। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों ने पूरी तरह से मोर्चा संभाल लिया और कई प्रमुख छात्र व युवा नेताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। इस बड़ी कार्रवाई के तहत CJP (Campaign for Judicial Accountability and Reforms या संबंधित नागरिक मंच) के प्रमुख नेता अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। पुलिस का यह एक्शन उस समय सामने आया जब कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर जुटने की तैयारी कर रहे थे और प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए पहले से ही पाबंदियां लगा रखी थीं।
अभिजीत दिपके के अलावा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोहरा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स और जमीनी सूत्रों के मुताबिक, नेहा बोहरा को प्रदर्शन स्थल की ओर जाने के दौरान या उनके तय ठिकानों से पुलिस ने अपनी निगरानी में लिया। इतना ही नहीं, विभिन्न मीडिया माध्यमों और स्थानीय रिपोर्ट्स से यह भी जानकारी सामने आई है कि अभिजीत दिपके के साथ-साथ अन्य नेताओं जैसे रांका और सौरभ को भी दिल्ली पुलिस ने नहीं बख्शा। पुलिस की टीमें इतनी मुस्तैद थीं कि विमान से उतरते ही फ्लाइट के अंदर घुसकर नेताओं को डिटेन किए जाने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की थी पूरी तैयारी
राजधानी के पॉश इलाके जंतर-मंतर पर इस बड़े प्रदर्शन को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं। देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र संगठन, मानवाधिकार कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थक इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे थे। आयोजकों का दावा था कि इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए वे अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से सरकार के सामने रखेंगे। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने किसी भी तरह की अप्रिय घटना या कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पहले ही इस तरह के आयोजनों के लिए अनुमति न होने या पाबंदी की बात कही थी। सुबह होते ही पुलिस बल ने जंतर-मंतर और उसके आसपास के रास्तों को पूरी तरह से छावनी में बदल दिया और बैरिकेडिंग कड़ी कर दी।
जैसे ही नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर की तरफ बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें रोकना शुरू कर दिया। विरोध प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे प्रमुख चेहरों को एक-एक करके हिरासत में लिया जाने लगा। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए एहतियातन यह कदम उठाया गया है। बिना अनुमति के जुटने वाले किसी भी समूह को आगे बढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती थी। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली, जिसे सुरक्षा बलों ने तुरंत नियंत्रित कर लिया। हिरासत में लिए गए सभी नेताओं को नजदीकी थानों या सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
विपक्षी दलों और छात्र संगठनों में भारी नाराजगी
दिग्गज नेताओं और छात्रसंघ प्रमुखों की इस तरह की गई ताबड़तोड़ गिरफ्तारी से विपक्षी दलों और वामपंथी छात्र संगठनों में भारी गुस्सा देखा जा रहा है। नेताओं का कहना है कि देश में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने और विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का गला घोंटा जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका सवाल है कि क्या देश की राजधानी में अब शांतिपूर्ण तरीके से तिरंगा लहराना या अपनी मांग रखना भी गुनाह हो गया है? विभिन्न छात्र संगठनों ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए तुरंत सभी हिरासत में लिए गए साथियों को रिहा करने की मांग की है।
जमीनी हालात का जायजा लेने पर पता चलता है कि जंतर-मंतर और आसपास के मेट्रो स्टेशनों के बाहर सुरक्षा व्यवस्था अभी भी बेहद चाक-चौबंद है। अतिरिक्त पुलिस बलों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी सुदूर कोने से आने वाले प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोका जा सके। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाते और धारा 144 या अन्य स्थानीय प्रतिबंध प्रभावी हैं, तब तक किसी भी अवैध जमावड़े की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस पूरी घटना ने एक बार फिर राजधानी में विरोध प्रदर्शनों और सुरक्षा बलों के बीच के टकराव को सुर्खियों में ला दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था और आगे की प्रशासनिक रणनीति
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से कानून और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए की गई है। खुफिया इनपुट मिल रहे थे कि प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्व माहौल खराब कर सकते हैं और यातायात व्यवस्था ठप हो सकती है। इसी खतरे को भांपते हुए पुलिस ने फ्लाइट्स और ट्रेनों से आ रहे संदिग्ध या प्रमुख आंदोलनकारियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही हिरासत में ले लिया। प्रशासन अब इस बात पर भी नजर रख रहा है कि शहर के बाकी हिस्सों में कोई और गुप्त सभा या रैलियां आयोजित न की जाएं। आने वाले घंटों में यह देखना दिलचस्प होगा कि हिरासत में लिए गए नेताओं को पुलिस कब और किस शर्त पर रिहा करती है, और क्या छात्र संगठन इस कार्रवाई के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन छेड़ते हैं या नहीं।








