मानहानि मामले में यूट्यूबर ध्रुव राठी की बढ़ी मुश्किलें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने वीडियो और तीखे बयानों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। दिल्ली की एक अदालत ने उनके खिलाफ वर्षों पुराने आपराधिक मानहानि मामले में कड़ा रुख अख्तियार किया है। राष्ट्रीय राजधानी की साकेत कोर्ट ने इस मामले में ध्रुव राठी के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया है, जिससे कानूनी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। यह मामला साल 2018 का है और तब से लगातार कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ रहा है।
अदालत के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने यह आदेश तब पारित किया जब प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। अधिकारियों का कहना था कि जब वे अदालत का समन लेकर संबंधित पते पर पहुंचे, तो वहां ताला बंद मिला और नोटिस की तामील सुचारू रूप से पूरी नहीं हो सकी। इसी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आगे की कार्रवाई के तहत जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से मामले की चर्चा एक बार फिर से राजनीतिक और सोशल मीडिया हलकों में जोर पकड़ चुकी है।
क्या है साल 2018 का यह पूरा विवादित मामला
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2018 के मई महीने में अपलोड किए गए एक वीडियो से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उस समय ध्रुव राठी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनल पर एक वीडियो साझा किया था, जिसका शीर्षक 'बीजेपी आईटी सेल पार्ट 2' रखा गया था। शिकायतकर्ता विकास पांडे (जिन्हें विकास सांक्रित्यायन के नाम से भी जाना जाता है) ने इस वीडियो को लेकर आपत्ति जताई थी। उनका आरोप था कि उस वीडियो में उनके और उनकी राजनीतिक विचारधारा के खिलाफ झूठे, भ्रामक और मानहानि करने वाले दावे किए गए थे।
शिकायतकर्ता का यह भी कहना था कि इस वीडियो के माध्यम से उनकी छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास किया गया था। उस दौर में इस वीडियो को लेकर काफी राजनीतिक सरगर्मी भी देखने को मिली थी। कानूनी जानकारों के अनुसार, आपराधिक मानहानि के ऐसे मामलों में यदि आरोपी निर्धारित तारीखों पर अदालत के समक्ष पेश नहीं होता है, तो न्याय प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अदालतों को इस तरह के वारंट जारी करने का अधिकार होता है। इस मामले में भी लंबी प्रक्रिया के बाद अब जाकर यह नया मोड़ आया है।
समन तामील कराने में आ रही प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें
इस कानूनी लड़ाई के दौरान सबसे बड़ी चुनौती अदालत के समन को सही समय पर आरोपी तक पहुंचाना रही है। शिकायतकर्ता पक्ष के वकीलों का यह दावा रहा है कि ध्रुव राठी अपने पेशेवर और व्यक्तिगत कारणों से देश से बाहर ऑस्ट्रिया में निवास करते हैं, जिसके कारण उन्हें आधिकारिक नोटिस या समन तामील कराने में लगातार व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। वकीलों के अनुसार, कई बार प्रयास करने के बावजूद भौतिक रूप से नोटिस रिसीव कराने में लंबी देरी हुई है।
हाल ही में जब शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत को यह बताया कि आरोपी कुछ समय के लिए भारत आए हुए हैं, तो अदालत ने नए सिरे से समन भेजने की अनुमति दी थी। इसके तहत प्रक्रिया का पालन करते हुए अधिकारियों ने उनके गुरुग्राम स्थित पते पर नोटिस पहुंचाने की कोशिश की थी। हालांकि, घर बंद मिलने और समय पर पेशी न होने के कारण अब अदालत ने जमानती वारंट का रास्ता चुना है। अदालत की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट हो गया है कि न्यायपालिका इस पुराने लंबित मामले को अब तेजी से आगे बढ़ाने के मूड में है।
आगामी 31 अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
साकेत कोर्ट के इस सख्त आदेश के बाद अब सभी की निगाहें आगामी 31 अक्टूबर पर टिकी हैं, जो इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है। इस तय तारीख पर यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि क्या यूट्यूबर ध्रुव राठी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होते हैं या उनके वकील उनकी तरफ से कोई नया कानूनी विकल्प पेश करते हैं।
वरिष्ठ वकीलों का मानना है कि ऐसे मामलों में यदि आरोपी अदालत के सामने पेश होकर अपना पक्ष रखते हैं और जमानती वारंट को रद्द कराने के लिए विधिक अर्जी देते हैं, तो अदालत उस पर विचार कर सकती है। अन्यथा, इस प्रक्रिया के नजरअंदाज होने पर कानूनी शिकंजा और अधिक कस सकता है। डिजिटल मीडिया के दौर में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानहानि के कानूनों के बीच की यह कानूनी लड़ाई देश भर में बहस का एक बड़ा विषय बनी हुई है, जिस पर हर किसी की पैनी नजर बनी हुई है।












