नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एक रक्षा कार्यक्रम के दौरान अमेरिका को लेकर तीखा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अमेरिका भारत को अत्याधुनिक एफ-35 लड़ाकू विमान बेचने की बातें तो करता है, लेकिन हकीकत में हमें उस विमान के पास तक जाने की अनुमति नहीं दी जाती है। इस खरी-खोटी से रक्षा गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदों को लेकर अब कूटनीतिक स्तर पर खुलकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वायुसेना प्रमुख ने साफ किया कि जब तक विमान की खूबियों और उसकी तकनीकी बारीकियों को परखने का पूरा मौका नहीं मिलता, तब तक ऐसे प्रस्तावों का कोई बड़ा मतलब नहीं रह जाता है।
अमेरिका के साथ रूस के सुखोई-57 विमान को लेकर भी वायुसेना का रुख स्पष्ट रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत को अभी तक अमेरिका की तरफ से एफ-35 जेट बेचने का कोई भी आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। इसके साथ ही रूसी फाइटर जेट एसयू-57 को लेकर भी वायुसेना ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। देश की सुरक्षा और रक्षा बजट का सही इस्तेमाल करने के लिए वायुसेना हर एक विकल्प को बहुत सावधानी से परख रही है। हमारी सेना किसी भी विदेशी दबाव या सिर्फ बयानों के भरोसे अपनी रणनीति नहीं बनाती है, बल्कि अपनी जरूरत के हिसाब से फैसले लेती है।
ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया ने देखी हमारी ताकत
एक तरफ जहां विदेशी विमानों को लेकर कूटनीतिक चर्चाएं चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ वायुसेना प्रमुख ने देश की ताकत का डंके की चोट पर ऐलान किया है। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान के जरिए पूरी दुनिया ने भारतीय वायुसेना का दम और उसकी ताकत देखी है। आज हमारी वायुसेना किसी भी बुरी से बुरी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। गाजियाबाद और अन्य एयरबेस पर लगातार युद्धाभ्यास किए जा रहे हैं ताकि देश की सीमाओं की सुरक्षा में कोई चूक न रह जाए। हमारे पायलट और जवान हर पल आसमान की रखवाली के लिए मुस्तैद बैठे हैं।
सेना में बदलाव और नए हथियारों को शामिल करने का सिलसिला भी तेजी से चल रहा है। हाल ही में एयरशो की तैयारियों के दौरान एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला, जब सैम मानेकशॉ क्रूज पर वायुसेना का हेलीकॉप्टर उतरा। इस तरह के अभ्यास यह दिखाते हैं कि भारतीय सेना अब हर तरह के कठिन रास्तों और जगहों पर अपनी पहुंच बनाने में माहिर हो चुकी है। चाहे रेगिस्तान हो या समंदर का क्रूज, हमारे पायलट हर जगह अपने हेलीकॉप्टर को सुरक्षित उतारने का हुनर रखते हैं। आम जनता भी इन एयरशो और सुरक्षा प्रदर्शनों को देखकर देश की ताकत पर गर्व महसूस कर रही है।
तेजस विमान में आखिरी उड़ान और नए अफसरों की विदाई
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का कार्यकाल भी अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। हाल ही में उन्होंने स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में अपनी आखिरी उड़ान भरी है। वे इसी महीने की 31 तारीख को अपनी सेवा से सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके इस कार्यकाल के दौरान देश को कई स्वदेशी रक्षा तकनीकें मिली हैं और वायुसेना की ताकत में इजाफा हुआ है। एक तरफ जहां बड़े अधिकारी रिटायर हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निचले स्तर पर भी सैनिकों के सम्मान की परंपरा पूरी शान से निभाई जा रही है।
बिहार के गया जिले के गुरुआ इलाके का एक मामला सामने आया है, जहां वायुसेना से रिटायर होकर अजीत कुमार अपने घर लौटे। उनके स्वागत में पूरा गांव उमड़ पड़ा और एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। देश की रक्षा करने वाले ऐसे जवानों का जब अपने घर लौटने पर ऐसा स्वागत होता है, तो समाज में देशभक्ति की भावना और ज्यादा मजबूत होती है। वायुसेना केवल फाइटर जेट और हथियारों का नाम नहीं है, बल्कि यह उन हजारों सैनिकों के पसीने और मेहनत का नाम है जो अपनी जवानी देश के नाम कर देते हैं।
भविष्य की रक्षा रणनीति और वायुसेना की तैयारी
आने वाले दिनों में भारतीय वायुसेना अपनी मारक क्षमता को और अधिक बढ़ाने पर काम कर रही है। विदेशी विमानों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय भारत अब 'मेक इन इंडिया' यानी स्वदेशी हथियारों पर ज्यादा जोर दे रहा है। तेजस विमानों का बेड़ा बढ़ाना इसी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा है। देश के वैज्ञानिक और इंजीनियर मिलकर ऐसे फाइटर जेट बना रहे हैं जो दुनिया के किसी भी आधुनिक विमान से मुकाबला कर सकें। अमेरिका या किसी अन्य देश के साथ रक्षा सौदे तभी आगे बढ़ेंगे जब वे भारत की शर्तों और तकनीकी ट्रांसफर के नियमों पर खरे उतरेंगे।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि भारतीय वायुसेना अब रक्षा मामलों में किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। चाहे पश्चिमी देशों के विमानों की शर्तें हों या पूर्वी देशों के साथ पुरानी रक्षा संधियां, भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सबसे ऊपर रख रहा है। वायुसेना प्रमुख के इन बयानों से साफ हो गया है कि आने वाले समय में भारत रक्षा बाजार में एक ग्राहक के तौर पर नहीं, बल्कि एक मजबूत और बराबरी की ताकत के रूप में अपनी बात रखेगा। देश की सुरक्षा व्यवस्था अब पूरी तरह आत्मनिर्भर बनने के रास्ते पर आगे बढ़ चुकी है।







