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तमिलनाडु में गरीब परिवारों को बड़ी राहत, चार लाख तक के कर्ज बिना गारंटी के मिलेंगे

तमिलनाडु सरकार ने कम आय वाले परिवारों और स्वयं सहायता समूहों के लिए कर्ज लेना आसान कर दिया है। नए नियमों के तहत चार लाख रुपये तक के कर्ज पर अब किसी तरह की गारंटी या बंधक की जरूरत नहीं होगी। महिला समूहों को भी दस लाख रुपये तक का कर्ज बिना गारंटी मिल सकेगा।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•16 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•29
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तमिलनाडु में गरीब परिवारों को बड़ी राहत, चार लाख तक के कर्ज बिना गारंटी के मिलेंगे
📷 तमिलनाडु में गरीब परिवारों को बड़ी राहत, चार लाख तक के कर्ज बिना गारंटी के मिलेंगे — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • तमिलनाडु सरकार ने कम आय वाले परिवारों और स्वयं सहायता समूहों के लिए कर्ज लेना आसान कर दिया है। नए नियमों के तहत चार लाख रुपये तक के कर्ज पर अब किसी तरह की गारंटी या बंधक की जरूरत नहीं होगी। महिला समूहों को भी दस लाख रुपये तक का कर्ज बिना गारंटी मिल सकेगा।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

चेन्नई/ग्राउंड ब्यूरो — तमिलनाडु सरकार ने राज्य के गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के लिए वित्तीय मदद का दायरा काफी बढ़ा दिया है। सरकार के नए आदेश के मुताबिक अब चार लाख रुपये तक के कर्ज के लिए बैंक कोई गारंटी या संपत्ति गिरवी नहीं मांगेंगे। यह नियम उन लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा है जो छोटे-छोटे कामधंधे शुरू करने के लिए बैंकों से कर्ज लेना चाहते हैं। अब तक कागजी कार्रवाई और गारंटी के चक्कर में आम लोगों को बैंक से पैसा मिलने में बहुत मुश्किलें आती थीं। सरकार का यह कदम राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को सीधे तौर पर मजबूती देगा।

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा महिला स्वयं सहायता समूहों को मिला है। सरकारी नियमों के अनुसार अब इन समूहों से जुड़ी महिलाओं को दस लाख रुपये तक का कर्ज बिना किसी गारंटी के मिल सकेगा। राज्य में पिछले कुछ सालों में स्वयं सहायता समूहों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से बहुत आगे बढ़ाया है। महिलाएं पापड़, सिलाई, मसाले और छोटे कुटीर उद्योग चलाकर अपने परिवार का खर्च उठा रही हैं। बिना गारंटी के मिलने वाले इस बड़े फंड से इन महिलाओं को अपना कारोबार और बड़ा करने का पूरा मौका मिलेगा। बैंकों को भी साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे इन आवेदनों को बिना किसी देरी के मंजूर करें।

छोटे कारोबारियों और किसानों के लिए नए रास्ते

जमीनी स्तर पर काम करने वाले छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए भी यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। बाजार में पूंजी की कमी के कारण कई बार छोटे कारोबारियों को ऊंचे ब्याज पर साहूकारों से कर्ज लेना पड़ता था। साहूकार गरीबों से भारी-भरकम ब्याज वसूलते थे जिससे पूरा परिवार कर्ज के जाल में फंस जाता था। बैंक का रास्ता आसान होने से अब लोग सरकारी बैंकों से सीधा और सस्ता कर्ज ले पाएंगे। केंद्र सरकार की कृषि और बुनियादी ढांचा से जुड़ी योजनाओं के साथ मिलकर राज्य के ये कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं।

दूसरी ओर कृषि क्षेत्र के लिए भी प्रधानमंत्री द्वारा एक लाख करोड़ रुपये के कृषि बुनियादी ढांचा कोष की शुरुआत की गई है। इसके जरिए गांवों में फसल कटाई के बाद गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक मशीनरी लगाने का काम तेजी से हो रहा है। तमिलनाडु में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े इन दोनों फैसलों का असर अब साफ दिखने लगा है। गांवों के किसान अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं हैं बल्कि वे भंडारण और प्रसंस्करण इकाइयों से भी जुड़ रहे हैं। इससे उनकी फसल की बर्बादी रुकेगी और बाजार में सही दाम मिलेगा।

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बैंकों की भूमिका और जमीनी स्तर पर निगरानी

प्रशासनिक अधिकारियों ने सभी राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे नए नियमों का सख्ती से पालन करें। यदि कोई बैंक बिना वजह किसी गरीब आवेदक को परेशान करता है या गारंटी मांगता है, तो उसकी शिकायत सीधे जिला स्तर पर की जा सकती है। सरकार का यह भी प्रयास है कि गांवों और छोटे कस्बों में वित्तीय साक्षरता शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों में लोगों को समझाया जा रहा है कि वे कैसे बैंक से आसानी से कर्ज ले सकते हैं और समय पर उसकी किस्त चुका सकते हैं।

द फ्रीलान्स की टीम ने चेन्नई और आसपास के ग्रामीण इलाकों में जाकर जब लोगों से बात की तो एक अलग ही उम्मीद देखने को मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि कागजी प्रक्रिया सरल होने से बिचौलियों और दलालों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाएगी। पहले लोगों को बैंक से लोन पास कराने के लिए एजेंटों को पैसे देने पड़ते थे। अब पारदर्शी तरीके से सीधे बैंक खाते में पैसा आने से भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। आने वाले दिनों में इन योजनाओं के जरिए राज्य के लाखों परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आने की पूरी उम्मीद है।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर सहकारी आंदोलन की गूंज

सहकारी और सामूहिक विकास के इस दौर में केवल कर्ज बांटना ही नहीं बल्कि लोगों को जोड़ना भी बड़ा लक्ष्य है। अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष के तहत हाल ही में देश भर में कई निबंध और जागरूकता प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को यह समझाना है कि मिलकर काम करने से समाज के हर व्यक्ति की तरक्की मुमकिन है। जब लोग समूह बनाकर आगे आते हैं तो बैंक भी उन पर भरोसा करते हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचना बहुत आसान हो जाता है।

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