नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की सबसे बड़ी विमानन कंपनियों में शुमार एयर इंडिया को इन दिनों गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। विमान ईंधन की कमी और तकनीकी दिक्कतों के कारण कंपनी को कई देशों के लिए अपनी उड़ानें अचानक बंद करनी पड़ी हैं। इस अचानक हुए फैसले से हजारों यात्री विदेशों में और देश के विभिन्न हवाई अड्डों पर फंस गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कंपनी के अधिकारियों को भी यात्रियों के भारी गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में आ रही इस बाधा की मुख्य वजह वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट है। एयर इंडिया के पास इस समय लंबी दूरी के विमानों की भी कुछ कमी चल रही है। कई विमान इस समय मरम्मत और समय पर रखरखाव के लिए हैंगर में खड़े हैं। इससे कंपनी का पूरा शेड्यूल गड़बड़ा गया है और समय पर उड़ान भरना असंभव सा हो गया है।
विदेश जाने वाले यात्रियों के सामने आई बड़ी मुश्किलें
विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानें रद्द होने से उन लोगों की मुसीबतें बढ़ गई हैं जो बिजनेस या छुट्टियों के लिए विदेश जाने वाले थे। एयरलाइंस काउंटर पर टिकट रिफंड और वैकल्पिक उड़ानों की मांग को लेकर भारी भीड़ देखने को मिल रही है। कई यात्रियों का कहना है कि उन्हें उड़ान रद्द होने की सूचना ऐन वक्त पर मिली। इससे उन्हें होटल बुकिंग और दूसरे खर्चों में भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
दूसरी ओर, घरेलू मोर्चे पर विमानन क्षेत्र में नए बदलाव भी तेजी से हो रहे हैं। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के नए एयरपोर्ट्स के विकास पर भी काम चल रहा है। हाल ही में आंध्र प्रदेश के भोगापुरम एयरपोर्ट के उद्घाटन को लेकर भी काफी चर्चा रही है। इस नए और आधुनिक हवाई अड्डे के शुरू होने से क्षेत्रीय संपर्क बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है, हालांकि मौजूदा ईंधन संकट ने विमानन सेक्टर की प्राथमिकताओं पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पर्यावरण और प्रदूषण के मोर्चे पर भी बढ़ रही चिंताएं
विमानन क्षेत्र के विस्तार और हवाई अड्डों के निर्माण के साथ-साथ पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी लगातार सामने आ रहे हैं। देश के बड़े शहरों में बढ़ते प्रदूषण और खराब वायु गुणवत्ता सूचकांक ने आम लोगों की सेहत पर बुरा असर डाला है। हैदराबाद और दिल्ली जैसे महानगरों में हवा की गुणवत्ता लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। विमानों और गाड़ियों से निकलने वाला धुआं इस प्रदूषण में एक बड़ा योगदान दे रहा है, जिस पर प्रशासन और पर्यावरणविदों की नजर बनी हुई है।
विदेश मंत्रालय और कूटनीतिक स्तर पर भी भारत सरकार विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों से जुड़ने के लगातार प्रयास कर रही है। म्यांमार के यांगून शहर में हाल ही में हुए सांस्कृतिक कार्यक्रमों और सामुदायिक बैठकों में भारतीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया है। इन आयोजनों का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और प्रवासी भारतीयों की समस्याओं का समाधान करना है, ताकि उन्हें संकट के समय हरसंभव मदद मिल सके।
ईंधन संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है एयर इंडिया
सूत्रों के मुताबिक, एयर इंडिया का प्रबंधन इस समय ईंधन संकट से पार पाने के लिए वैकल्पिक रणनीतियों पर काम कर रहा है। कंपनी वैश्विक ईंधन आपूर्तिकर्ताओं के साथ बातचीत कर रही है ताकि कम दरों पर और समय पर ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इसके अलावा, जिन रूटों पर यात्रियों की संख्या कम है, उन उड़ानों को अस्थायी रूप से बंद करके विमानों को व्यस्त रूटों पर लगाया जा रहा है ताकि नुकसान को कम किया जा सके।
यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा से पहले एयर इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा केंद्र से अपनी उड़ान की स्थिति जरूर जांच लें। नागरिक उड्डयन मंत्रालय भी इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। सरकार की कोशिश है कि यात्रियों को जल्द से जल्द राहत पहुंचाई जाए और एयरलाइन के संचालन को फिर से पूरी क्षमता के साथ पटरी पर लाया जाए।




