आसमान की ऊंचाइयों में सुरक्षा से खिलवाड़: कैसे हुआ ज्यूरिख एयरपोर्ट पर बड़ा खुलासा
दैनिक आवागमन के लिए हवाई सफर को दुनिया का सबसे सुरक्षित माध्यम माना जाता है, लेकिन जब विमान संचालन से जुड़े अहम लोग ही नियमों की धज्जियां उड़ाने लगें, तो यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवालिया निशान लगना लाजिमी है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला हाल ही में यूरोप के व्यस्त ज्यूरिख एयरपोर्ट पर देखने को मिला, जहां एक प्रमुख विमानन कंपनी के पायलट ने ड्यूटी पर तैनात होने से पहले ही शराब का सेवन कर रखा था। यह सनसनीखेज वाकया तब उजागर हुआ जब विमान के उड़ान भरने से पहले अनिवार्य मेडिकल और ब्रेथलाइजर जांच की जा रही थी। इस औचक निरीक्षण ने एक बार फिर एयरलाइन के कॉकपिट क्रू की कार्यशैली और अनुशासन पर गहरी चिंता पैदा कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय की है जब विमान को स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख से भारतीय राजधानी नई दिल्ली के लिए रवाना होना था। फ्लाइट के टेकऑफ होने में कुछ ही समय बाकी था कि विमानन सुरक्षा के तय मानकों के तहत क्रू मेंबर्स का अल्कोहल टेस्ट कराया गया। जांच के दौरान विमान के फर्स्ट ऑफिसर यानी सह-पायलट ब्रेथलाइजर मशीन के पैमाने पर खरे नहीं उतर पाए। इस खुलासे के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों और विमानन कंपनी के प्रबंधकों में हड़कंप मच गया, क्योंकि यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाला ऐसा कृत्य कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।
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कॉकपिट में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: तत्काल कार्रवाई करते हुए एयरलाइन ने उठाया कड़ा कदम
किसी भी कमर्शियल फ्लाइट के संचालन में पायलट और को-पायलट की भूमिका बेहद अहम होती है। उनके हाथों में सैकड़ों यात्रियों की सलामती होती है। ऐसे में ज्यूरिख में हुई इस घटना के तुरंत बाद एयरलाइन प्रबंधन ने बिना किसी देरी के सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही मेडिकल रिपोर्ट में पायलट के नशे में होने की पुष्टि हुई, स्थानीय अधिकारियों की मदद से उसे तुरंत विमान से नीचे उतार लिया गया। कंपनी ने नियमों का हवाला देते हुए उसे तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है, जिससे विमानन जगत में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
नियमों के मुताबिक, किसी भी उड़ान से पहले चालक दल के सदस्यों के लिए नशीले पदार्थों या शराब के सेवन पर पूरी तरह पाबंदी होती है। डीजीसीए और अंतरराष्ट्रीय विमानन संस्थाओं के कड़े निर्देश हैं कि कॉकपिट में प्रवेश करने से पहले हर पायलट को कड़े मेडिकल परीक्षण से गुजरना होता है। ज्यूरिख में पकड़े गए इस फर्स्ट ऑफिसर को ड्यूटी से हटाए जाने के बाद एक साधारण यात्री के तौर पर वापस भारत भेज दिया गया। फिलहाल, जब तक इस पूरे मामले की आंतरिक और विधिक जांच पूरी नहीं हो जाती और अंतिम मेडिकल रिपोर्ट सामने नहीं आती, तब तक उसका निलंबन जारी रहेगा।
मारिजुआना टेस्ट विवाद के बाद दूसरा बड़ा मामला: एयरलाइंस की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
यह अकेली ऐसी घटना नहीं है जिसने हाल के दिनों में विमानन सुरक्षा की पोल खोली हो। इस घटना से कुछ ही दिन पहले इसी एयरलाइन से जुड़ा एक और सनसनीखेज मामला सामने आया था, जिसमें फुकेट से दिल्ली आने वाली एक उड़ान के बाद पायलट मारिजुआना यानी गांजे के सेवन से जुड़े मेडिकल टेस्ट में असफल पाया गया था। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने इस बात पर बहस छेड़ दी है कि क्या विमानन कंपनियों के क्रू मेंबर्स के बीच नशे की लत एक बड़ी समस्या बनती जा रही है? बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं यात्रियों के मन में एयरलाइंस की आंतरिक निगरानी व्यवस्था को लेकर डर पैदा कर रही हैं।
विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि क्रू मेंबर्स की मानसिक स्थिति और उनकी जीवनशैली की नियमित मॉनिटरिंग बेहद जरूरी है। लंबी उड़ानों के तनाव, जेट लैग और ड्यूटी के दबाव के बीच कई बार कर्मचारी गलत आदतों के शिकार हो जाते हैं, जो अंततः यात्रियों के जीवन के लिए खतरनाक साबित होता है। इस तरह के मामलों में केवल निलंबन की कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि एयरलाइंस को काउंसलिंग और सख्त सरप्राइज चेकिंग जैसे उपायों को और अधिक मजबूत करना होगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
एयरलाइन प्रबंधन की सफाई: सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर हमारी नीति जीरो-टॉलरेंस की है
इस पूरे प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद विमानन कंपनी ने आधिकारिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि सुरक्षा, रेगुलेटरी कानूनों और आंतरिक कंपनी प्रोटोकॉल के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही को माफ नहीं किया जाएगा। एयरलाइन ने दोहराया कि उनके लिए यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मोर्चे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।
"हमारी कंपनी सुरक्षा और नियमों के पालन के मामले में ज़रा भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं करती है। यदि कोई भी कर्मचारी स्थापित प्रोटोकॉल का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी नरमी के सख्त से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाती है।" — प्रवक्ता, विमानन प्रबंधन
इस बयान के जरिए एयरलाइन ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वे व्यक्तिगत गलतियों को संस्थागत रूप से बढ़ावा नहीं देते और दोषियों के खिलाफ फौरन एक्शन लेते हैं। हालांकि, बार-बार हो रही ऐसी घटनाओं के चलते यात्रियों का भरोसा बनाए रखना प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
भविष्य की सुरक्षा और कड़े नियमों की दरकार: क्या कहते हैं विमानन विशेषज्ञ?
ज्यूरिख और फुकेट की इन घटनाओं के बाद देश के विमानन नियामक प्राधिकरण भी हरकत में आ गए हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी एयरलाइंस को अपने पायलटों और क्रू मेंबर्स के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श शिविर और रैंडम ड्रग्स एंड अल्कोहल स्क्रीनिंग को और अधिक पारदर्शी व सख्त बनाना चाहिए। जब तक ग्राउंड लेवल पर औचक जांच के दायरे को नहीं बढ़ाया जाएगा, तब तक ऐसे मामलों पर पूरी तरह लगाम लगाना मुश्किल होगा।
आम जनता और हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों की मांग है कि इस तरह के गंभीर मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले कर्मियों के लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द किए जाने चाहिए ताकि दूसरों के लिए एक कड़ा संदेश मिल सके। फिलहाल, इस ताजा मामले की जांच चल रही है और आने वाले दिनों में नियामक संस्था इस पर और भी कड़े दिशानिर्देश जारी कर सकती है।





