बेंगलुरु की सड़कों पर आज सियासत उस समय अपने चरम पर पहुंच गई जब मतदाता सूची विवाद को लेकर सीजेपी का बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। देश भर में चर्चा का विषय बने इस मार्च में कई चर्चित चेहरे शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। आम जनता और युवाओं की इस भीड़ ने प्रशासन की मुश्किलें बढ़ा दीं।
मंच पर यूट्यूबर ध्रुव राठी की मौजूदगी ने इस आंदोलन का दायरा और बड़ा कर दिया। उनके साथ साउथ के मशहूर अभिनेता प्रकाश राज भी नजर आए। इस दौरान मुख्य माइक पर एक्टिविस्ट अभिजीत दीपके ने सरकार के खिलाफ तीखे तेवर दिखाए। भीड़ ने 'वोट चोर' के नारे लगाकर अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की उठी मांग
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा चुनाव आयोग और पूरी व्यवस्था पर फूटा। मंच से साफ शब्दों में मांग की गई कि ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें। वक्ताओं ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए मतदाता सूची की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इस दौरान 'एसआईआर ट्रिब्यूनल' बनाने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई।
विभिन्न वक्ताओं ने दावा किया कि देश की जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है। मंच से यह भी ऐलान किया गया कि आने वाले दिनों में और कड़े विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। आयोजकों ने कहा कि अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को देश के दूसरे हिस्सों तक बढ़ाया जाएगा।
सत्ता प्रधानमंत्री की, लेकिन सड़कें हमारी हैं
प्रर्दशन के दौरान अभिजीत दीपके ने अपने भाषण में सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सत्ता भले ही प्रधानमंत्री के पास हो, लेकिन इस देश की सड़कें आम जनता की हैं। ध्रुव राठी की मौजूदगी ने सोशल मीडिया यूजर्स और युवाओं की एक बड़ी फौज को इस आयोजन से जोड़ दिया।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े इंतजाम किए थे। प्रदर्शनकारियों ने तय रूट पर मार्च निकाला और अपनी बात मजबूती से रखी। आयोजकों ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने की बात कही, लेकिन सरकार के खिलाफ उनके तेवर बेहद आक्रामक रहे।
आगे की क्या है आंदोलन की रणनीति
इस विरोध प्रदर्शन के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के आंदोलनों का असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है। सीजेपी के नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने वाले नहीं हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने पाया कि शहर के कई इलाकों में अभी भी तनाव और चर्चा का माहौल है। पुलिस हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष और एक्टिविस्ट इस मुद्दे को छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।







