बेंगलुरु की सड़कों पर आज सियासी पारा तब अचानक बहुत ज्यादा चढ़ गया, जब नागरिक संगठनों ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। यह पूरा विरोध प्रदर्शन 'सिटिजन फॉर जस्टिस एंड पीस' यानी CJP के बैनर तले आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में देश भर के कई चर्चित और मुखर चेहरे शामिल होने के लिए विशेष रूप से पहुंचे थे। मैदान पर मौजूद पुलिस बल ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी खास बात यह रही कि इसमें सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी और लोकप्रिय अभिनेता प्रकाश राज ने भी अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ कार्यकर्ता अभिजीत दीपके भी मंच पर मौजूद रहे। इन सभी वक्ताओं ने सरकार की नीतियों और चुनाव प्रक्रिया पर तीखे सवाल खड़े किए। रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं ने 'वोट चोर' जैसे नारे लगाकर अपना कड़ा विरोध जताया और व्यवस्था में सुधार की पुरजोर मांग की।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की सीधी मांग
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके पर फूटा। वक्ताओं ने मंच से सीधे तौर पर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। अभिजीत दीपके ने अपने भाषण के दौरान देश के इतिहास और राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए वर्तमान हालात पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता बनाए रखना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
भीड़ के बीच मौजूद युवाओं ने इन बयानों का जोरदार तालियों के साथ समर्थन किया। प्रदर्शन स्थल पर तख्तियां और बैनर लेकर पहुंचे लोगों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। प्रकाश राज ने अपने चिर-परिचित अंदाज में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता अब चुप बैठने वाली नहीं है। उन्होंने हर नागरिक से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक रहने की अपील की।
चप्पल प्रोटेस्ट और एसआईआर ट्रिब्यूनल की चेतावनी
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एक नया और अनोखा ऐलान भी सामने आया जिसने सबका ध्यान खींच लिया। आयोजकों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में 'एसआईआर ट्रिब्यूनल' के बाद 'चप्पल प्रोटेस्ट' किया जाएगा। यह अनोखी घोषणा सोशल मीडिया पर भी तुरंत वायरल हो गई और इस पर तीखी बहस छिड़ गई है। प्रशासनिक हलकों में इस चेतावनी के बाद हलचल काफी तेज हो गई है।
ध्रुव राठी ने भी अपने संबोधन में देश के मौजूदा राजनीतिक माहौल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों पर खुलकर बात की। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने की जिम्मेदारी अब देश की युवा पीढ़ी के कंधों पर है। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने 'वन नेशन' के कॉन्सेप्ट पर भी सवाल उठाए और कहा कि विविधता ही भारत की असली ताकत है जिसे कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
प्रशासन की कड़ी नजर और आगे की स्थिति
बेंगलुरु पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में सुरक्षा के बेहद कड़े प्रबंध किए थे। ड्रोन कैमरों और भारी पुलिस बल की मदद से पूरी रैली पर पैनी नजर रखी जा रही थी ताकि कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, लेकिन जिस तरह से बड़े नाम इस आंदोलन से जुड़े हैं, उससे यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक तूल पकड़ने वाला है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी बारीक नजर बनाए रखेगा।






