बेंगलुरु के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इन दिनों एक अलग ही तरह के विरोध प्रदर्शन की चर्चा जोरों पर है। 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' यानी सीजेपी संगठन ने एसआईआर यानी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट या सेलेक्टिव इश्यू रिफॉर्म से जुड़े विवादित मामलों के खिलाफ सड़क पर उतरने का खुला ऐलान किया है। इस विरोध को 'चप्पल प्रोटेस्ट' नाम दिया गया है, जो अपने अनूठे और तीखे तेवर के कारण आम लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है। विरोध जताने के इस नए तरीके ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है क्योंकि इसमें शहर के कई जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी भी हिस्सा लेने वाले हैं।
इस पूरे आंदोलन में सबसे बड़ा आकर्षण दक्षिण भारतीय सिनेमा के मशहूर और बेबाक अभिनेता प्रकाश राज की मौजूदगी है। प्रकाश राज अक्सर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखते आए हैं और इस बार भी वे सीजेपी के इस प्रदर्शन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आएंगे। आयोजकों का दावा है कि यह विरोध किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उन प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ है जो आम आदमी के अधिकारों को प्रभावित कर रही हैं। अभिनेता प्रकाश राज के जुड़ने से इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर भी एक नई पहचान मिल रही है, जिससे सत्ता के गलियारों में हलचल तेज हो गई है.
आठ अक्टूबर को होगा बड़ा शक्ति प्रदर्शन
तय कार्यक्रम के अनुसार यह अनूठा 'चप्पल प्रोटेस्ट' आगामी आठ अक्टूबर को बेंगलुरु के प्रमुख सार्वजनिक स्थल पर आयोजित किया जाएगा। पुलिस और प्रशासन ने इस विरोध प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं ताकि शहर की कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे। सीजेपी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर ऐसे सांकेतिक और कड़े विरोध दर्ज कराने जरूरी हो गए हैं। प्रदर्शन स्थल पर भारी पुलिस बल की तैनाती की संभावना है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से समय रहते निपटा जा सके।
दूसरी ओर, इसी बीच बेंगलुरु के एक अन्य इलाके में सड़क किनारे लगे ट्रांसफार्मर बॉक्स में अचानक हुए भीषण धमाके ने स्थानीय नागरिकों में दहशत फैला दी है। इस हादसे में दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। एक तरफ जहां पूरा शहर एसआईआर और चप्पल प्रोटेस्ट की राजनीतिक गर्मागरम बहसों में उलझा है, वहीं इस तरह की बुनियादी सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। घायल लोगों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे बिजली विभाग की लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर गरमाया एसआईआर का मुद्दा
सिर्फ बेंगलुरु ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली में भी एसआईआर का मुद्दा अब सियासी तूफान का रूप ले चुका है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आंकड़े पेश किए हैं और दावा किया है कि दिल्ली के बेला एस्टेट में सात सौ अट्ठाइस में से सात सौ सत्ताईस नाम गलत तरीके से सूची से काट दिए गए हैं। विपक्षी दल इसे एक सोची-समझी साजिश बता रहे हैं जिसके जरिए खास वर्ग के लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीना जा रहा है। इन तमाम राष्ट्रीय घटनाक्रमों का सीधा असर अब क्षेत्रीय आंदोलनों और प्रदर्शनों पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।
इस बीच इंडिया गठबंधन के भीतर भी राजनीतिक समीकरणों में उथल-पुथल जारी है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने एसआईआर विवाद और अन्य मुद्दों पर आगामी गठबंधन की बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है और इसके पीछे अपनी व्यस्त राजनीतिक वजहें बताई हैं। क्षेत्रीय दलों के इन अलग-अलग रुख के बीच बेंगलुरु में होने वाला यह 'चप्पल प्रोटेस्ट' आने वाले दिनों में विपक्ष की एकजुटता और आक्रामक तेवरों की एक नई तस्वीर पेश कर सकता है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और हर एक अपडेट जमीन से सीधे आप तक पहुंचाती रहेगी।
प्रशासन की तैयारियां और जनता की प्रतिक्रिया
बेंगलुरु प्रशासन इस आगामी विरोध प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए लगातार खुफिया एजेंसियों के संपर्क में है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में हर किसी को विरोध जताने का अधिकार है, लेकिन यदि कानून हाथ में लेने की कोशिश की गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय दुकानदारों और आम नागरिकों में इस बात को लेकर मिला-जुला असर है कि इस तरह के कड़े विरोध प्रदर्शनों से आम जनजीवन प्रभावित हो सकता है। बहरहाल, आठ अक्टूबर की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, बेंगलुरु का राजनीतिक पारा लगातार चढ़ता जा रहा है और सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह अनोखा प्रदर्शन आखिरकार किस रूप में सामने आता है।


