नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मामला CJP की तरफ से निकाली जा रही तिरंगा यात्रा से जुड़ा हुआ है। इस यात्रा के शुरू होते ही देश के राजनीतिक दलों के बीच बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। सत्ताधारी दल से लेकर क्षेत्रीय दलों तक हर कोई इस यात्रा पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। पहले यह यात्रा केवल एक साधारण सामाजिक आयोजन लग रही थी, लेकिन अब यह बड़े राजनीतिक दंगल का रूप लेती दिख रही है।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब CJP ने अपने समर्थकों के साथ तिरंगा यात्रा निकालने का ऐलान किया। इस यात्रा का उद्देश्य भले ही राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और एकता का संदेश देना बताया गया हो, लेकिन विपक्षी और सहयोगी दलों के मन में इसे लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जमीनी स्तर पर काम करने वाले हमारे रिपोर्टर्स ने जब इस यात्रा की हलचल को परखा, तो पता चला कि इसके पीछे राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश भी हो रही है। यही कारण है कि राजनीतिक दल इस पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं और तीखे बयान सामने आ रहे हैं.
तिरंगा यात्रा पर बीजेपी का मिला-जुला रुख
भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इस यात्रा पर बड़ा और नपा-तुला बयान सामने आया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने इस यात्रा को लेकर कहा है कि तिरंगा यात्रा निकालना अच्छी बात है और हर नागरिक को देश के सम्मान में ऐसा करना चाहिए। लेकिन इसके साथ ही पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि राष्ट्रभक्ति को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाया जाना चाहिए। बीजेपी का साफ कहना है कि तिरंगा किसी एक संगठन या दल की बपौती नहीं है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि बीजेपी इस यात्रा के सियासी नफा-नुकसान को बहुत बारीकी से भांप रही है।
दूसरी तरफ एनडीए के प्रमुख घटक दल जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। जेडीयू की तरफ से आए बयान ने इस पूरे विवाद में नया तड़का लगा दिया है। जेडीयू नेताओं का कहना है कि इस तरह के आंदोलनों से जमीन पर कोई बड़ा बदलाव नहीं आने वाला है। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों में बमुश्किल सौ-दो सौ लोग ही इकट्ठा होते हैं, जिन्हें किसी बड़ी क्रांति या राजनीतिक बदलाव का पैमाना नहीं माना जा सकता है। जेडीयू के इस तीखे बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या एनडीए के भीतर इस मुद्दे पर सोच में कोई अंतर है।
सांसदों पर आरोपों से गर्माया राजनीतिक माहौल
इस तिरंगा यात्रा और उस पर आ रहे बयानों के बीच संसद से लेकर सड़क तक एक और बड़ा विवाद जुड़ गया है। कांग्रेस सांसद अकोइजम को लेकर लग रहे आरोपों ने इस माहौल को और ज्यादा गरमा दिया है। एक तरफ जहां तिरंगा यात्रा को लेकर जुबानी जंग जारी है, वहीं दूसरी तरफ सांसदों पर लग रहे आरोपों ने जनता का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। विरोधी दल इस बात का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं और सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। आम जनता के बीच भी इन बयानों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी महंगाई, बेरोजगारी और अपनी रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन राजनीतिक दल इन मुद्दों से हटकर बयानों की राजनीति में व्यस्त हैं। CJP की तिरंगा यात्रा के बहाने सभी दल अपनी-अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हुए हैं। चाहे बीजेपी का सतर्क बयान हो या जेडीयू का तीखा तंज, दोनों ही बातें यह साफ करती हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद थमने वाला नहीं है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।






