नई दिल्ली के जंतर-मंतर इलाके में हुए एक विरोध प्रदर्शन के बाद बड़ा कानूनी विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। इस मामले में एक महिला पत्रकार और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं के नाम शामिल हैं। इन सभी पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी के काम में रुकावट डालने का आरोप है। इसके साथ ही शिकायत में जातिसूचक टिप्पणियां करने की बात भी कही गई है। इसी आधार पर पुलिस ने मामले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण कानून यानी एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाई हैं।
संसद मार्ग थाना पुलिस ने यह कार्रवाई एसीपी की लिखित शिकायत मिलने के बाद की है। जिन लोगों के नाम एफआईआर में शामिल किए गए हैं, उनमें अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के नाम प्रमुख हैं। इनके अलावा कुछ अन्य लोगों को भी मामले में नामजद किया गया है। यह घटना जंतर-मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान की बताई जा रही है। वहां तैनात पुलिस टीम प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी। उसी दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई थी।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ था उस दिन?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जंतर-मंतर पर कुछ संगठनों से जुड़े लोग अपनी मांगों को लेकर जमा हुए थे। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी तय नियमों का उल्लंघन कर रहे थे। उन्हें तय सीमा में रहने की बार-बार चेतावनी दी गई। उस समय एसीपी विवेक भगत मौके पर कानून व्यवस्था की कमान संभाल रहे थे। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के एक दल ने बैरिकेड पार करने का प्रयास किया। जब सुरक्षा बलों ने उन्हें रोका, तो वहां मौजूद लोग भड़क गए। इसके बाद पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच काफी बहस हुई।
एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में कहा है कि जब वे स्थिति को संभालने आगे आए, तो उनके साथ अभद्रता की गई। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ बेहद अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी की जाति को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं। अधिकारी का कहना है कि उन्हें जानबूझकर सार्वजनिक रूप से अपमानित करने की कोशिश की गई। ड्यूटी पर तैनात राजपत्रित अधिकारी के साथ इस तरह का बर्ताव गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। घटना के तुरंत बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूरे मामले की जानकारी दी गई।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा और किनके नाम शामिल?
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई सख्त कानूनी धाराएं लगाई हैं। इसमें सरकारी काम में बाधा डालने और शांति व्यवस्था बिगाड़ने की धाराएं शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें एससी-एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। एफआईआर में महिला पत्रकार के अलावा अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास समेत कुल छह लोगों को नामजद किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौके के सभी वीडियो की बारीकी से जांच हो रही है। अगर जांच में कुछ और नाम सामने आते हैं, तो उन्हें भी केस में शामिल किया जाएगा।
इस कानूनी कार्रवाई के बाद सामाजिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि वे केवल शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रख रहे थे। उनका दावा है कि पुलिस ने बिना वजह प्रदर्शनकारियों पर सख्ती दिखाई। वहीं, नामजद कार्यकर्ताओं के समर्थकों का कहना है कि जातिसूचक शब्दों के आरोप सही नहीं हैं। उनका कहना है कि बहस के दौरान केवल पुलिस के रवैये का विरोध हुआ था। दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस का कहना है कि वर्दी में तैनात अधिकारी का अपमान और कानून का उल्लंघन कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामले में आगे क्या कानूनी प्रक्रिया होगी?
कानून के जानकारों के अनुसार एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज होने पर जांच का दायरा काफी बढ़ जाता है। नियमानुसार ऐसे मामलों की जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा ही की जाती है। इस मामले में भी एसीपी या डीसीपी स्तर के अधिकारी को जांच अधिकारी बनाया जा सकता है। पुलिस अब घटना स्थल की सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और पुलिसकर्मियों के बॉडी कैमरों की रिकॉर्डिंग जमा कर रही है। इन सभी सबूतों से साफ होगा कि उस समय किसने क्या बयान दिया था।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल के अनुसार नई दिल्ली जिले में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। जंतर-मंतर के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न घटे। पुलिस अफसरों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से की जाएगी। साक्ष्यों की पुष्टि होने के बाद आरोपियों को पूछताछ के लिए कानूनी नोटिस जारी किए जाएंगे। कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद ही अदालत में चार्जशीट पेश की जाएगी। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।







