नई दिल्ली से हमारी विशेष ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में हाल ही में हुए सीजेपी यानी सेंट्रल जनहित पार्टी के प्रदर्शन को लेकर सियासी और कानूनी पारा चढ़ गया है। जंतर-मंतर पर होने वाले इस बड़े प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने गंभीर आरोप लगाया है कि पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए आने वाले दस हजार से ज्यादा लोगों को पहले ही हिरासत में ले लिया था। इस कार्रवाई के बाद से ही शहर के कई इलाकों में तनाव और भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
इस पूरे मामले पर सुनवाई के दौरान देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त और दो टूक टिप्पणी की है। अदालत ने प्रदर्शनकारियों और व्यवस्था के रवैये पर बात करते हुए कहा कि इस देश में हर कोई अपने तरीके से काम करना चाहता है। कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि कोई आंदोलन करना चाहता है तो कोई मूंगफली बेचना चाहता है। अदालत की इस टिप्पणी के बाद से राजनीतिक गलियारों में इस बात पर बहस छिड़ गई है कि विरोध प्रदर्शन करने का लोकतांत्रिक अधिकार और आम नागरिकों की सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बैठाया जाए।
कनॉट प्लेस के व्यापारियों को हुआ भारी नुकसान
इस विरोध प्रदर्शन और पुलिस की सख्ती का सीधा असर दिल्ली के बाजारों और व्यापार पर साफ दिखाई दिया है। शहर के दिल यानी कनॉट प्लेस के व्यापारियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक बड़ा पत्र लिखकर अपनी पीड़ा साझा की है। व्यापारियों का दावा है कि इस एक दिन के विरोध प्रदर्शन और हंगामे के कारण बाजार पूरी तरह ठप हो गया। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि इस आंदोलन के चलते उन्हें मात्र एक दिन में करीब दो हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि बार-बार होने वाले इन प्रदर्शनों से उनका व्यापार चौपट हो रहा है।
व्यापारी संघों का कहना है कि वे लोकतांत्रिक विरोध के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जंतर-मंतर और आसपास के व्यावसायिक इलाकों को इस तरह बाधित करने से आम दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाता है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसे प्रदर्शनों के लिए शहर के रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों से दूर कोई दूसरी जगह तय की जानी चाहिए ताकि कारोबार पर इसका बुरा असर न पड़े।
सोनम वांगचुक के अनशन के बाद आंदोलन की नई दिशा
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के हालिया अनशन खत्म करने के बाद से देश भर के विभिन्न आंदोलनों की दिशा पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों के मन में यह बड़ा सवाल था कि सोनम वांगचुक के पीछे हटने के बाद दूसरे संगठनों के आंदोलनों का क्या होगा। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में साफ किया कि उनका आंदोलन किसी एक व्यक्ति या घटना पर निर्भर नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई जनहित और बुनियादी मुद्दों से जुड़ी है जो आगे भी जारी रहेगी।
जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि पुलिस प्रशासन किसी भी बड़ी अप्रिय घटना से बचने के लिए पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। खुफिया एजेंसियां भी लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे। हालांकि, आम जनता और राहगीरों को इस उठापटक के बीच भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स आप तक पहुंचाती रहेगी।




