नई दिल्ली के एक व्यस्त इलाके में स्थित रेस्टोरेंट में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अचानक किचन से उठी आग की लपटों ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेज थी कि देखते ही देखते धुएं का गुबार आसमान में छा गया और अंदर मौजूद ग्राहकों में चीख-पुकार मच गई। मुख्य दरवाजा आग की वजह से बंद हो चुका था और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था। ऐसे में अंदर फंसे लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों का सहारा लिया और तुरंत बाहर कूदने का फैसला किया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक स्थिति इतनी डरावनी थी कि लोगों को सोचने का बिल्कुल मौका नहीं मिला। जान बचाने की इस जद्दोजहद में कुछ माता-पिता ने अपने छोटे-छोटे बच्चों को पहली मंजिल की खिड़की से नीचे खड़े लोगों की तरफ सुरक्षित नीचे फेंका। नीचे मौजूद स्थानीय लोगों और दुकानदारों ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए गद्दे और चादरें लगाईं ताकि कूदने वाले या नीचे फेंके जाने वाले बच्चों को गंभीर चोट न लगे। इस मानवीय प्रयास और तुरंत उठाए गए कदमों ने कई जिंदगियों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
किचन से फैली आग और बाहर तक मचा हड़कंप
शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग की शुरुआत रेस्टोरेंट के किचन से हुई थी जो शॉर्ट सर्किट या गैस लीक की वजह से हो सकती है। आग लगते ही वहां रखा सामान और तेल धू-धू कर जलने लगा जिससे जहरीला धुआं पूरे हॉल में फैल गया। धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया था और लोग घबराहट में इधर-उधर भागने लगे। गनीमत यह रही कि स्थानीय युवाओं और राहगीरों ने बिना एक पल गंवाए राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और कूलिंग ऑपरेशन चलाया। इस बीच पुलिस ने इलाके को घेर लिया और यातायात को डायवर्ट कर दिया ताकि राहत कार्यों में कोई बाधा न आए। अधिकारियों का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच की जा रही है और रेस्टोरेंट के सुरक्षा मानकों की भी पूरी पड़ताल की जाएगी।
सुरक्षा नियमों को ताक पर रखने वाले संस्थानों पर उठे गंभीर सवाल
इस ताजा हादसे ने दिल्ली के रेस्टोरेंट, पीजी और कमर्शियल इमारतों में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। हाल ही में सत्य निकेतन और मालवीय नगर जैसी जगहों पर हुए भीषण हादसों के बाद भी कई कारोबारी नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। बिना फायर एग्जिट, ब्लॉक रास्ते और इलेक्ट्रॉनिक लॉक जैसी लापरवाही लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट और स्थानीय प्रशासन की सख्ती के बावजूद कई जगह नियमों का पालन कागजों तक ही सीमित नजर आता है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे लापरवाह रेस्टोरेंट मालिकों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता का कहना है कि जब तक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों पर रोक लगाना मुमकिन नहीं होगा। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मामले की गहनता से जांच कर रहे हैं और घायलों व चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों की बहादुरी से बची कई मासूम जानें
इस पूरे घटनाक्रम में स्थानीय युवाओं की मुस्तैदी और बहादुरी सबसे बड़ा सबक बनकर सामने आई है। यदि स्थानीय लोगों ने समय रहते गद्दे न लगाए होते और सही समय पर सीपीआर या अन्य प्राथमिक मदद न दी होती, तो नुकसान का आंकड़ा बहुत बड़ा हो सकता था। प्रशासन अब शहरभर के खाने-पीने के ठिकानों और कमर्शियल परिसरों में फायर सेफ्टी ऑडिट कराने की बात कह रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।









