उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। बरेली के कद्दावर नेता और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप के एक छोटे से सोशल मीडिया संदेश ने सियासी पारे को अचानक बहुत ऊपर चढ़ा दिया है। हाल ही में राज्यसभा चुनाव के लिए जब पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया, तो इस रेस में कई पुराने और दिग्गज नेताओं के नाम कट गए। सूची में अपना नाम नहीं पाकर धर्मेंद्र कश्यप इतने आहत हुए कि उन्होंने तुरंत सोशल मीडिया का रुख किया और अपनी भावनाएं सार्वजनिक कर दीं।
धर्मेंद्र कश्यप ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट पर एक ऐसा संदेश साझा किया जिसने पार्टी के भीतर और बाहर खलबली मचा दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में साफ शब्दों में 'टाटा-बाय-बाय' लिख दिया। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन राजनीतिक पंडितों और जानकारों का मानना है कि उनका यह इशारा साफ तौर पर बीजेपी आलाकमान की तरफ था। टिकट कटने के बाद से ही उनके समर्थकों में भी भारी नाराजगी देखने को मिल रही है, जो अब खुलकर सामने आने लगी है।
बरेली से लेकर लखनऊ तक क्यों गरमाई सियासत?
धर्मेंद्र कश्यप का राजनीतिक सफर काफी लंबा और मजबूत रहा है। वह साल 2014 और फिर 2019 के आम चुनावों में लगातार दो बार बीजेपी के टिकट पर भारी मतों से जीतकर संसद पहुंचे थे। रोहिलखंड इलाके में कश्यप समाज के बीच उनकी अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में पार्टी द्वारा लगातार नजरअंदाज किए जाने और राज्यसभा का टिकट नहीं मिलने से उनके तेवर तल्ख हो गए हैं। बरेली और आसपास के जिलों में उनके इस तरह के खुले विद्रोह जैसे तेवर से स्थानीय संगठन के भीतर भी बेचैनी बढ़ गई है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के दौरान भी टिकट वितरण को लेकर भीतरखाने कुछ नाराजगी चल रही थी, जिसे उस समय संभाल लिया गया था। लेकिन अब राज्यसभा की उम्मीदवारी से पत्ता साफ होने के बाद नाराजगी सतह पर आ गई है। कौशल किशोर समेत कई अन्य नेताओं के बयानों के बाद अब कश्यप का इस तरह से दूरी बनाने की कोशिश करना यह दिखाता है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। विपक्षी दल भी इस मामले पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।
क्या पार्टी छोड़ेंगे पूर्व सांसद या डैमेज कंट्रोल में जुटेगी बीजेपी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या धर्मेंद्र कश्यप सचमुच बीजेपी का साथ छोड़ देंगे? उनके इस 'टाटा-बाय-बाय' वाले पोस्ट के बाद से अटकलों का बाजार गर्म है कि वह जल्द ही कोई बड़ा कदम उठा सकते हैं। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ऐसे मामलों को सुलझाने में माहिर माना जाता है। डैमेज कंट्रोल की कोशिशें पर्दे के पीछे शुरू हो चुकी हैं ताकि चुनाव से ठीक पहले पार्टी के किसी पुराने और मजबूत चेहरे को खोना न पड़े।
स्थानीय स्तर पर उनके समर्थक अभी भी असमंजस में हैं कि उनके नेता का अगला कदम क्या होगा। क्या यह सिर्फ एक भावनात्मक गुस्सा है या फिर किसी दूसरे राजनीतिक दल के साथ जाने की कोई नई तैयारी? इन तमाम सवालों के जवाब आने वाले कुछ दिनों में ही मिल सकेंगे। फिलहाल तो बरेली से लेकर लखनऊ तक हर कोई इसी बात की चर्चा कर रहा है कि क्या बीजेपी के इस पुराने सिपाही का मोहभंग हमेशा के लिए हो चुका है।
जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं की प्रतिक्रिया
इस पूरे घटनाक्रम के बाद जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कश्यप समाज के स्थानीय लोग और पार्टी के कुछ निचले स्तर के पदाधिकारी दबी जुबान से यह मान रहे हैं कि कद्दावर नेताओं की अनदेखी पार्टी के लिए भारी पड़ सकती है। लोकसभा के बाद राज्यसभा चुनाव में टिकट न मिलना किसी भी महत्वाकांक्षी राजनेता के लिए एक बड़ा झटका होता है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अगले कुछ घंटों में धर्मेंद्र कश्यप की तरफ से कोई बड़ा बयान या आधिकारिक स्पष्टीकरण आ सकता है, जिसके बाद तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी। तब तक के लिए यह पोस्ट राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है।







