झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) से जुड़े मामलों की जांच को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मौजूदा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए आरोप लगाया है कि जेपीएससी मामलों की जांच के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी अधिकारियों और निचले स्तर के कर्मचारियों से पूछताछ तो की जा रही है, लेकिन सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों और प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने का खुला प्रयास चल रहा है।
छात्रों के साथ छल और अधूरे वादे
रघुवर दास ने कहा कि सरकार ने एक बार फिर राज्य के युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ छल किया है। छात्रों से झूठे वादे कर उनके आंदोलन को तो समाप्त करवा दिया गया, लेकिन उन वादों को जमीन पर उतारने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने 17 अगस्त 2026 को जेपीएससी और जेएसएससी में अनियमितताओं की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन और परीक्षा सुधार समिति बनाने की घोषणा की थी, जिसकी मियाद पूरी होने को है लेकिन आज तक एक भी बैठक नहीं हुई।
सदस्यों की भूमिका पर संदेह और सीबीआई जांच की मांग
पूर्व सीएम ने 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के दौरान आयोग के सदस्यों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू मैनेज करने और कथित तौर पर पैसे लेने के मामले सामने आने के बावजूद तत्कालीन सदस्यों से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है? इसके अलावा, परीक्षा में सॉल्वर गैंग के जुड़े होने और अन्य राज्यों के अभ्यर्थियों के चयन पर भी उन्होंने गहरी चिंता जताई। रघुवर दास ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जानी चाहिए।
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