नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय निर्वाचन आयोग इस समय देश की राजनीति के केंद्र में है। आयोग से जुड़े फैसले और उस पर उठ रहे सवाल, दोनों ही चर्चा का विषय बने हुए हैं। गूगल ट्रेंड्स पर भी 'भारतीय निर्वाचन आयोग' तेजी से ऊपर आ रहा है। यह दिखाता है कि लोग इस संस्था के बारे में जानना चाहते हैं। आयोग ने हाल ही में मतदाता सूची में गड़बड़ी रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
आयोग ने फॉर्म-7 के आवेदनों पर नई सीमा तय की है। यह फॉर्म मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए भरा जाता है। अब कोई भी व्यक्ति एक साथ बहुत सारे फॉर्म-7 आवेदन नहीं कर पाएगा। इसका मकसद फर्जीवाड़े को रोकना है। आयोग का कहना है कि कुछ लोग बड़ी संख्या में फॉर्म-7 भरकर गलत तरीके से नाम हटवा रहे थे। इस नए नियम से इस पर रोक लगेगी। यह कदम चुनाव प्रक्रिया को साफ-सुथरा बनाने के लिए उठाया गया है।
चुनाव आयोग पर उठते सवाल और राजनीतिक हलचल
एक तरफ आयोग अपने काम में लगा है, वहीं दूसरी तरफ उस पर राजनीतिक हमले भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर खास चर्चा हुई है। विपक्षी दल आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वे चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर चिंता जता रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल मिलकर एक रणनीति बनाने में जुटे हैं। वे आयोग के कुछ फैसलों को लेकर एकजुट हो रहे हैं।
सिर्फ विपक्षी दल ही नहीं, बल्कि बीजेपी के कुछ सहयोगी भी आयोग से 'स्पष्टीकरण' मांग रहे हैं। चिराग पासवान जैसे नेताओं ने भी आयोग से कुछ मुद्दों पर सफाई मांगी है। यह दिखाता है कि आयोग पर दबाव सिर्फ एक तरफ से नहीं है। सत्ता पक्ष के सहयोगी भी कुछ बातों को लेकर स्पष्टता चाहते हैं। यह स्थिति आयोग के लिए चुनौती भरी है। उसे सभी पक्षों की चिंताओं को दूर करना होगा।
'एकतरफा फैसले' और आयोग की सफाई
आयोग पर सबसे गंभीर आरोप यह लगा है कि वह बीजेपी के पक्ष में काम कर रहा है। कुछ हलकों से तो यहां तक कहा गया है कि आयोग ने चुनाव को प्रभावित किया है। ऐसे आरोप बहुत गंभीर होते हैं। ये आरोप आयोग की विश्वसनीयता पर सीधा हमला हैं। सोशल मीडिया पर भी ऐसी बातें खूब चल रही हैं। लोग आयोग से इस्तीफे तक की मांग कर रहे हैं।
इन आरोपों के बीच, चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से सफाई दी है। आयोग ने कहा है कि उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। 'असहमति' की खबरों को आयोग ने खारिज किया है। आयोग का कहना है कि पूरी कमीशन मिलकर फैसले लेती है। यह सफाई उन खबरों के जवाब में आई है, जिनमें आयोग के भीतर मतभेद की बात कही गई थी। आयोग अपनी छवि को बचाने की पूरी कोशिश कर रहा है।
लोकतंत्र में चुनाव आयोग की भूमिका बहुत अहम होती है। यह एक स्वतंत्र संस्था है। इसका काम निष्पक्ष चुनाव कराना है। जब इस पर सवाल उठते हैं, तो पूरे चुनावी सिस्टम पर असर पड़ता है। लोगों का भरोसा कम हो सकता है। इसलिए आयोग को अपनी पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखनी होगी। उसे सभी आरोपों का ठोस जवाब देना होगा।
आगे क्या? निष्पक्षता की कसौटी पर आयोग
आने वाले समय में चुनाव आयोग के सामने कई चुनौतियां होंगी। देश में जल्द ही बड़े चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में आयोग को अपनी निष्पक्षता साबित करनी होगी। उसे सभी राजनीतिक दलों और आम जनता का भरोसा जीतना होगा। फॉर्म-7 पर नए नियम से लेकर राजनीतिक दलों की चिंताओं तक, आयोग को हर मोर्चे पर खरा उतरना होगा।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आयोग पर इस समय चौतरफा दबाव है। उसे अपने फैसलों को लेकर और ज्यादा पारदर्शी होना पड़ेगा। उसे यह दिखाना होगा कि वह किसी भी राजनीतिक दल के प्रभाव में नहीं है। भारतीय लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनाव आयोग का स्वतंत्र और निष्पक्ष रहना बहुत जरूरी है। यह सिर्फ एक संस्था का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है।








