मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर गहराया सियासी संकट
देश की चुनावी राजनीति में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर बड़ा घमासान मचा हुआ है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में दक्षिण भारत के प्रमुख राजनीतिक दल द्रविड मुन्नेत्र कड़गम यानी डीएमके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की औपचारिक मांग कर दी है। पार्टी का आरोप है कि एसआईआर के नाम पर जमीनी स्तर पर बड़ी गड़बड़ियां की जा रही हैं, जिससे देश के कई हिस्सों में वैध और सही मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हो रहे हैं।
चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय अन्ना अरिवालयम में डीएमके सांसदों की एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान यह कड़ा निर्णय लिया गया। पार्टी का कहना है कि यह केवल तकनीकी संशोधन का मामला नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर नागरिकों के बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार यानी वोट देने के अधिकार पर कुठाराघात है। डीएमके नेतृत्व ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जाती है, तो लोकतंत्र की नींव हिल जाएगी।
डीएमके का आरोप, सही मतदाताओं को किया जा रहा है बाहर
डीएमके ने अपनी आधिकारिक बैठकों और प्रस्तावों में इस बात पर जोर दिया है कि एसआईआर की आड़ में सुनियोजित तरीके से उन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं जो शासन की वर्तमान नीतियों से असहमत हैं या फिर गरीब और वंचित तबके से ताल्लुक रखते हैं। पार्टी के नेताओं का कहना है कि सत्यापन के नाम पर आम नागरिकों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और अधिकारियों द्वारा नियमों का मनमाना पालन कराया जा रहा है।
पार्टी की ओर से जारी बयानों में यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग को इस बात का स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में नाम क्यों काटे जा रहे हैं। डीएमके ने न केवल चुनाव आयोग की कार्यशैली की आलोचना की है, बल्कि एसआईआर के विरोध में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे विभिन्न छात्र संगठनों का भी खुलकर समर्थन किया है। पार्टी का मानना है कि युवा पीढ़ी इस लड़ाई में सबसे आगे है क्योंकि आने वाले भविष्य का सबसे ज्यादा असर उन्हीं पर पड़ने वाला है।
"देश के विभिन्न राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण के नाम पर वैध मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। चुनाव आयोग की निष्पक्षता संदिग्ध हो चुकी है और हम इसके खिलाफ अपनी कानूनी व राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगे।" — डीएमके पार्टी नेतृत्व, आधिकारिक प्रस्ताव
कांग्रेस के दोहरे रुख पर डीएमके सांसदों का तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दलों के आपसी समीकरणों में भी खटास साफ नजर आ रही है। डीएमके सांसद अंदिमुथु राजा ने कांग्रेस पार्टी के रुख पर खुलकर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे राज्यों में या तो सत्ता में है या वहां की सरकारों में साझीदार है। ऐसे में कांग्रेस को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या इन राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कोई गड़बड़ी नहीं हुई है या फिर वे इस मामले में अपनी आंखें मूंद कर बैठे हैं।
डीएमके का आरोप है कि कुछ विपक्षी दल राष्ट्रीय स्तर पर तो चुनाव आयोग की नीतियों का विरोध करने का दिखावा करते हैं, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर उनकी नीतियां और रुख बिल्कुल अलग होते हैं। पार्टी ने इसे दोहरी नीति करार देते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर सभी दलों को एक स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाना होगा, न कि सुविधा के अनुसार अपनी राजनीतिक जमीन तलाशनी होगी।
झारखंड में 50 लाख मतदाताओं के नाम कटने की आशंका
महज दक्षिण भारत तक सीमित यह विवाद अब देश के अन्य राज्यों में भी तूल पकड़ने लगा है। झारखंड में कांग्रेस पार्टी के विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने एक तीखा बयान देते हुए दावा किया है कि राज्य में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के कारण लगभग 50 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटने की कगार पर पहुंच गए हैं। उन्होंने दुमका में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यदि शुरुआती तय समयसीमा पर ही चुनाव आयोग अड़ा रहता, तो यह आंकड़ा एक करोड़ से भी अधिक पहुंच सकता था।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि राज्य के गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग अपनी दैनिक आजीविका कमाने में इतने व्यस्त रहते हैं कि वे तकनीकी और कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने में असमर्थ हो जाते हैं। इसी का फायदा उठाकर सत्ताधारी दल के इशारे पर उनके नाम सूची से गायब किए जा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी इस अन्याय के खिलाफ अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष करेगी।
चुनाव आयोग का नया निर्देश और आगामी चुनावी चुनौतियां
एक तरफ जहां एसआईआर को लेकर तीखा राजनीतिक विरोध जारी है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में स्पेशल समरी रिवीजन यानी एसएसआर (SSR) प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश भी जारी कर दिया है। आयोग के नए शेड्यूल के अनुसार, 12 नवंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी, जिस पर दिसंबर मध्य तक आपत्तियां और दावे दर्ज कराए जा सकेंगे। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची जनवरी की शुरुआत में प्रकाशित की जाएगी।
आयोग का तर्क है कि इस पूरी कवायद का मकसद मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अपडेट रखना है, ताकि भविष्य के चुनावों में किसी भी तरह की फर्जी मतदान की गुंजाइश न बचे। साथ ही पहली बार वोट डालने वाले युवाओं को भी जोड़ने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। हालांकि, राजनीतिक दलों के बढ़ते विरोध और आम जनता के बीच असमंजस की स्थिति के चलते चुनाव आयोग के सामने इन तमाम प्रक्रियाओं को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।












