नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज राजनीति का पारा फिर चढ़ गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और फैसलों के खिलाफ इंडिया गठबंधन के नेता सड़क पर उतर आए हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के नेतृत्व में विपक्ष ने चुनाव आयोग की तरफ मार्च शुरू कर दिया है। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हजारों कार्यकर्ता सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग लगाई गई है, जिससे मौके पर तनाव का माहौल बन गया है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय बेकाबू हो गए जब भीड़ ने बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। पुलिस और सुरक्षा बलों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। मौके से मिल रही शुरुआती खबरों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और आइसा की नेता नेहा को पुलिस ने सड़क पर घसीटा और हिरासत में ले लिया। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।
जंतर-मंतर से चुनाव आयोग तक मार्च और नेताओं की गिरफ्तारी
जंतर-मंतर पर उमड़ी भीड़ में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए युवा, छात्र और आम नागरिक शामिल हैं। आंदोलन को धार देने के लिए आने वाले दिनों में छात्र संगठनों और युवाओं ने भी मोर्चा संभालने का ऐलान किया है। खबर है कि आगामी 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर जेन Z यानी युवा वर्ग एक बड़ा आंदोलन छेड़ने की तैयारी कर रहा है। आज के इस प्रदर्शन में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और अन्य वामपंथी संगठनों के छात्र भी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। पुलिस प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को तैनात कर दिया है।
विपक्ष के इन तेवरों के बाद राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। कांग्रेस पार्टी ने अपने सभी सांसदों को दिल्ली में रहने और प्रदर्शन में सक्रिय रूप से शामिल होने का निर्देश दिया था। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा के लिए यह सड़क की लड़ाई जरूरी हो गई है। दूसरी तरफ, इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। अदालत में इस याचिका पर जल्द सुनवाई होने की उम्मीद है जिससे राजनीतिक पारा और चढ़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका और देशभर में कांग्रेस का हल्लाबोल
राजधानी दिल्ली के अलावा देश के कई अन्य राज्यों में भी कांग्रेस और सहयोगी दलों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है क्योंकि विपक्ष इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहा है। चुनाव आयोग की ओर से हालांकि अभी तक इस पूरे विरोध प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम लगातार जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से पल-पल की अपडेट जुटा रही है। सड़कों पर उतरे इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा देना है। पुलिस और प्रशासन की सख्ती के बावजूद प्रदर्शनकारियों का जोश कम नहीं हुआ है और वे लगातार नारेबाजी कर रहे हैं। देखना यह होगा कि सरकार और चुनाव आयोग इस बढ़ते दबाव के बीच क्या रुख अपनाते हैं और क्या यह आंदोलन देश के दूसरे हिस्सों में भी विकराल रूप लेता है या नहीं।
विपक्ष की रणनीति और प्रशासनिक सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुरक्षा बलों ने जंतर-मंतर की ओर आने वाले सभी रास्तों पर कड़ा पहरा बिठा दिया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। वाटर कैノン और आंसू गैस के गोले छोड़ने वाले वाहन भी मौके पर तैनात रखे गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका यह संघर्ष संसद से लेकर सड़क तक जारी रहेगा। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की सियासत को गरमा दिया है और आने वाले संसद सत्र में भी इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं।










