नई दिल्ली और ग्वालियर के ग्राउंड ब्यूरो से हमारी खास रिपोर्ट — देश की प्रमुख रक्षा निर्माण कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल इन दिनों कई मोर्चों पर चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में कंपनी ने अपने दो हजारवें एयरो-इंजन की सफल डिलीवरी पूरी कर ली है। इस मौके पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि हमारा अगला बड़ा लक्ष्य दस हजार एयरो-इंजन तैयार करने का है। यह उपलब्धि देश को रक्षा मामलों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी तकनीक पर जोर देना वक्त की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है।
रक्षा उत्पादन के इस सुनहरे सफर के बीच देश के इतिहास से जुड़ी एक दुखद तस्वीर भी सामने आई है। वायु सेना दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर चिड़ियाघर में खड़े ऐतिहासिक एचएएल नैट लड़ाकू विमान की बदहाली खुलकर सामने आई। कभी पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाला यह विमान आज खुले आसमान के नीचे धूल फांकने को मजबूर है। स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों का कहना है कि हमारी पुरानी विरासत को इस तरह से सहेजकर न रखना बेहद शर्मनाक है। इस विमान ने साल 1965 और 1971 की लड़ाइयों में देश के लिए अहम भूमिका निभाई थी लेकिन आज इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं बचा है।
रक्षा उत्पादन में तेजी और नए इंजन निर्माण का सफर
एचएएल के कारखानों में इन दिनों दिन-रात काम चल रहा है ताकि वायु सेना और थल सेना की जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सके। दो हजारवें इंजन की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि हमारे इंजीनियर अब आधुनिक तकनीक को तेजी से अपना रहे हैं। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि आने वाले सालों में भारत न सिर्फ अपनी जरूरत के इंजन बनाएगा बल्कि दूसरे देशों को भी इनका निर्यात करेगा। हेलिकॉपटर निर्माण के क्षेत्र में भी कंपनी का नाम तेजी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी राजदूत ने भी एचएएल द्वारा बनाए गए ध्रुव हेलिकॉप्टर में उड़ान भरी थी और इसकी तारीफ की थी।
एक तरफ जहां मेक इन इंडिया के तहत सेना के लिए नए हथियार और उपकरण बन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरानी धरोहरों की अनदेखी एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। ग्वालियर में धूल फांक रहे इस विमान को देखकर साफ पता चलता है कि हमारी प्रशासनिक मशीनरी इतिहास को बचाने में कितनी लापरवाह है। वायु सेना के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाले ऐसे विमानों को एयरफोर्स स्टेशनों या अच्छे संग्रहालयों में सुरक्षित रखा जाना चाहिए था। जिम्मेदार विभागों को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी अपने वीरों की गाथा को इन विमानों के जरिए याद रख सके।
युवाओं के लिए नौकरी के नए अवसर और भर्ती प्रक्रिया
उत्पादन और तकनीकी विकास के साथ-साथ एचएएल ने देश के युवाओं के लिए रोजगार के रास्ते भी खोल दिए हैं। कंपनी ने जूनियर एग्जीक्यूटिव के पदों पर नई भर्तियों के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो युवा देश की इस बड़ी रक्षा कंपनी का हिस्सा बनना चाहते हैं वे तय नियमों के तहत आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा बिना लिखित परीक्षा के भी डेढ़ सौ से ज्यादा पदों पर नौकरियां निकाली गई हैं जिनमें अच्छी सैलरी मिलने की बात कही जा रही है। इन पदों के लिए योग्यता और उम्र की सीमा को लेकर आधिकारिक वेबसाइट पर पूरी जानकारी दी गई है।
नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए यह एक बेहतरीन मौका है क्योंकि उन्हें सीधे बिना लिखित परीक्षा के साक्षात्कार या अन्य माध्यमों से चुना जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में बढ़ते काम और नए प्रोजेक्ट्स के आने से आने वाले दिनों में और भी नौकरियां पैदा होने की पूरी उम्मीद है। देश के युवा अब तकनीकी और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में आगे आकर अपना भविष्य बना रहे हैं। एचएएल जैसी बड़ी कंपनियों में काम करना युवाओं के लिए गर्व की बात होती है और इससे देश के हुनरमंद लोगों को सही मंच मिलता है।
विरासत संभालना और भविष्य की तैयारियां दोनों जरूरी
किसी भी देश की पहचान उसके वर्तमान विकास के साथ-साथ उसके गौरवशाली इतिहास से भी जुड़ी होती है। एचएएल एक तरफ जहां आने वाले कल के लिए दस हजार इंजन बनाने का बड़ा सपना देख रही है, वहीं दूसरी तरफ उसे अपने पुराने इतिहास को भी सहेज कर रखना होगा। ग्वालियर के चिड़ियाघर में पड़े ऐतिहासिक नैट विमान को तुरंत किसी सुरक्षित और सम्मानजनक जगह पर शिफ्ट किया जाना चाहिए। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और आगे भी आपको जमीनी सच से रूबरू कराती रहेगी।






