नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय वायु सेना की ताकत बढ़ाने वाले स्वदेशी लड़ाकू विमान 'तेजस' को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी इंजन निर्माता कंपनी जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल को तीन नए एफ404 इंजन सौंप दिए हैं। इन इंजनों के मिलने से देश में तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों के निर्माण और उत्पादन की रफ्तार में तेजी आएगी। पिछले काफी समय से इंजन की आपूर्ति में हो रही देरी के कारण विमानों की डिलीवरी प्रभावित हो रही थी, लेकिन अब नए इंजन मिलने से वायु सेना को समय पर नए फाइटर जेट मिलने की उम्मीद बंध गई है।
रक्षा जानकारों का मानना है कि इंजन आपूर्ति सामान्य होने से एचएएल अपनी उत्पादन यूनिट में काम तेज कर सकेगा। भारतीय वायु सेना को अपनी पुरानी पड़ रही स्क्वाड्रन की जगह नए और आधुनिक विमानों की सख्त जरूरत है। तेजस एमके-1ए विमान आधुनिक रडार और हथियारों से लैस है, जो दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने में पूरी तरह सक्षम है। इन तीनों इंजनों के आने के बाद अब उत्पादन लाइन पर लोड कम होगा और तय समय सीमा के भीतर वायु सेना को विमान सौंपने का रास्ता साफ हो गया है।
इजरायली तकनीक से और खतरनाक हुआ तेजस
इंजन मिलने की इस खबर के बीच तेजस की मारक क्षमता को लेकर भी एक बड़ा अपडेट सामने आया है। इस स्वदेशी फाइटर जेट में अब इजरायल से मंगाई गई एक बेहद खास तकनीक को फिट किया गया है। रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह नई तकनीक किसी शिकारी की तरह काम करती है। जिस तरह मछली की आंख पर निशाना साधकर अर्जुन ने तीर चलाया था, ठीक उसी तरह यह तकनीक आसमान में छिपे दुश्मन के टारगेट को ढूंढ निकालती है। इस अपग्रेडेशन के बाद तेजस की निगाहें और अधिक पैनी हो गई हैं, जिससे वह पलक झपकते ही हवा में ही दुश्मन के विमान को धुआं-धुआं कर सकता है।
भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इजरायली सहयोग से इस प्रणाली को तेजस के एयरफ्रेम और एवियोनिक्स के साथ सफलतापूर्वक जोड़ दिया है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब रक्षा मामलों में धीरे-धीरे आत्मनिर्भरता की तरफ मजबूती से बढ़ रहा है। विदेशी हथियारों और उपकरणों को अपने स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक इंटीग्रेट करना भारतीय रक्षा उद्योग की एक बड़ी तकनीकी जीत माना जा रहा है। इससे वायु सेना के पायलटों को डॉग फाइट यानी हवाई युद्ध के दौरान बहुत बड़ा रणनीतिक फायदा मिलेगा।
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जापान के एयर चीफ ने भरी तेजस में उड़ान
सिर्फ स्वदेशी मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी तेजस की धाक लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में जापान के एयर चीफ जनरल ताकेहिरो ने भारत आकर खुद तेजस फाइटर जेट में उड़ान भरी। उड़ान भरने के बाद जनरल ताकेहिरो काफी प्रभावित नजर आए और उन्होंने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद शानदार और यादगार रहा है। एक विदेशी वायु सेना प्रमुख द्वारा स्वदेशी विमान में बैठकर उसकी खूबियों को परखना भारतीय विमानन उद्योग के लिए एक बड़ा गौरवशाली पल है।
विदेशी सैन्य अधिकारियों द्वारा तेजस की ऐसी सराहना यह साबित करती है कि यह हल्का लड़ाकू विमान अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर रहा है। दुनिया के कई अन्य देश भी अब भारत के इस स्वदेशी विमान में गहरी रुचि दिखा रहे हैं। रक्षा बाजार में इसकी बढ़ती मांग आने वाले समय में भारत के रक्षा निर्यात को भी पंख लगा सकती है। एशियाई क्षेत्र में सामरिक संतुलन के लिहाज से भी इस घटना को काफी अहम माना जा रहा है।
उत्पादन और आपूर्ति की आगे की चुनौती
भले ही जीई एयरोस्पेस ने अभी तीन इंजन सौंप दिए हैं, लेकिन एचएएल के सामने आने वाले महीनों में बड़े पैमाने पर उत्पादन का दबाव बना रहेगा। वायु सेना के साथ हुए अनुबंध के मुताबिक समय पर विमानों की आपूर्ति करना सबसे बड़ी चुनौती है। अमेरिकी कंपनी के साथ हुए पुराने समझौतों के तहत आने वाले दिनों में और भी इंजनों की खेप भारत पहुंचने की उम्मीद है। रक्षा मंत्रालय खुद इस पूरे प्रोजेक्ट की सीधी निगरानी कर रहा है ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि बेंगलुरु स्थित एचएएल प्लांट में इंजीनियर्स और तकनीकी कर्मचारियों की टीम दिन-रात काम कर रही है। इंजन मिलने के बाद अब विमानों के फाइनल असेंबली का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। भारतीय वायु सेना के बेड़े में इन आधुनिक तेजस जेट्स के शामिल होने से देश की पश्चिमी और उत्तरी दोनों सीमाओं पर हमारी हवाई ताकत कई गुना मजबूत हो जाएगी।



