नई दिल्ली और ग्वालियर के ग्राउंड ब्यूरो से खास रिपोर्ट — सरकारी विमान कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल इन दिनों लगातार चर्चा में है। कंपनी ने हाल ही में अपने दो हजारवें एयरो-इंजन की सफल डिलीवरी पूरी कर ली है। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस बड़ी उपलब्धि पर कंपनी की पूरी टीम की पीठ थपथपाई है। सरकार ने आने वाले समय में ऐसे दस हजार इंजन बनाने का बहुत बड़ा लक्ष्य तय किया है। देश की रक्षा ताकत को मजबूत करने की दिशा में इसे एक अहम कदम माना जा रहा है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह काम देश को इस मामले में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करेगा।
एक तरफ जहां एचएएल उत्पादन के मामले में नए रिकॉर्ड बना रही है, वहीं दूसरी तरफ इतिहास की उपेक्षा की एक दर्दनाक तस्वीर भी सामने आई है। वायु सेना दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश के ग्वालियर चिड़ियाघर में खड़े एक ऐतिहासिक लड़ाकू विमान की हालत बेहद खराब दिखाई दी। यह विमान कोई आम मशीन नहीं बल्कि वही ऐतिहासिक एचएएल नैट विमान है जिसे सेबर विध्वंसक भी कहा जाता है। इस विमान ने पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में अपनी बहादुरी के झंडे गाड़े थे। आज देखरेख के अभाव में यह ऐतिहासिक धरोहर सिर्फ धूल फांकने को मजबूर है। स्थानीय लोग और इतिहास प्रेमी इस बात से बहुत दुखी हैं कि हमारी सेना का गौरवशाली इतिहास इस तरह बदहाल स्थिति में सड़ रहा है।
हवाई सफर और युवाओं के लिए नौकरी का मौका
इस बीच, एचएएल से जुड़ी कुछ और बड़ी खबरें भी सामने आई हैं जो आम जनता और युवाओं का ध्यान खींच रही हैं। हाल ही में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भारत दौरे के दौरान एचएएल द्वारा बनाए गए ध्रुव हेलीकॉप्टर में उड़ान भरी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ जिसमें हेलीकॉप्टर की ताकत साफ दिखाई दे रही है। विदेशी मेहमानों द्वारा स्वदेशी तकनीक की तारीफ करना देश के रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। इससे यह भी साफ होता है कि हमारे देश में बने रक्षा उत्पाद अब दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे हैं और अपनी सुरक्षा के लिए भरोसेमंद साबित हो रहे हैं।
दूसरी तरफ, जो युवा सरकारी नौकरी की तलाश में हैं उनके लिए भी एचएएल एक बड़ा अवसर लेकर आया है। कंपनी ने जूनियर एग्जीक्यूटिव के पदों पर नई भर्तियों के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती के तहत बिना किसी लंबी लिखित परीक्षा के सीधे सरकारी नौकरी पाने का मौका मिल रहा है। कुल डेढ़ सौ पदों के लिए निकाली गई इस भर्ती में चुने गए उम्मीदवारों को मोटी सैलरी मिलने की बात कही जा रही है। जो युवा एयरोस्पेस सेक्टर में अपना करियर बनाना चाहते हैं, वे नियमों के मुताबिक इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
उत्पादन के मोर्चे पर बढ़ती रफ्तार और चुनौतियां
एचएएल के भीतर इन दिनों काम की रफ्तार बहुत तेज हो गई है क्योंकि भारतीय सेना की जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। दो हजार इंजन देना इस बात का सबूत है कि कंपनी अब पहले से ज्यादा तेजी से काम कर रही है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के दौरान गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। रक्षा जानकारों का कहना है कि दस हजार इंजन बनाने का अगला लक्ष्य बहुत कठिन है। इसके लिए कंपनी को अपनी उत्पादन क्षमता और मजदूरों की संख्या दोनों को कई गुना बढ़ाना होगा। सरकार और कंपनी प्रबंधन दोनों मिलकर इस दिशा में लगातार नए कदम उठा रहे हैं।
अंत में बात करें तो एचएएल आज एक तरफ भविष्य के आधुनिक हथियारों और इंजनों को बनाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ उसे अपनी पुरानी ऐतिहासिक धरोहरों को भी संभालना होगा। ग्वालियर चिड़ियाघर में खड़े विमान की बदहाली यह याद दिलाती है कि हम नए मुकाम हासिल करने की दौड़ में अपने पुराने इतिहास को भूल नहीं सकते। एक जिम्मेदार देश के रूप में हमें अपनी आधुनिक तरक्की के साथ-साथ अपने इतिहास को भी सुरक्षित रखना चाहिए। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और आगे भी आपको सही और सच्ची खबरें देती रहेगी।






