इस्लामाबाद/ग्राउंड ब्यूरो — पाकिस्तान की सियासत में इन दिनों उथल-पुथल मची हुई है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा घटनाक्रम में पुलिस और प्रशासन ने उनके परिवार पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। आधी रात को हुई पुलिस कार्रवाई ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस मामले में कई बड़े खुलासे सामने आ रहे हैं जो देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को बयां करते हैं।
बीते दिनों पुलिस ने इमरान खान के घर पर भारी फोर्स के साथ दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान उनके परिवार के सदस्यों को बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक आगामी विरोध प्रदर्शनों और मार्च से पहले प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है। पुलिस का दावा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई जरूरी थी। वहीं, विपक्षी दलों ने सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है और इसे तानाशाही करार दिया है।
जेल के भीतर और बाहर बढ़ती सियासी ताकत
पिछले तीन साल से जेल में बंद होने के बावजूद इमरान खान का राजनीतिक प्रभाव कम नहीं हुआ है। सरकार के तमाम दांव और कानूनी पचड़े फिलहाल नाकाम साबित होते दिख रहे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन दमनकारी नीतियों से इमरान खान की स्थिति जमीन पर और मजबूत हुई है। जेल के अंदर से उनके संदेश लगातार समर्थकों तक पहुंच रहे हैं। इससे सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
हाल ही में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते इमरान खान को अस्पताल ले जाया गया था। लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर उन्हें वापस जेल भेज दिए जाने पर भी कई सवाल खड़े हुए। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार के इस फैसले पर विपक्षी दलों ने तीखा हमला बोला है। लोगों का कहना है कि सरकार इमरान खान की बढ़ती लोकप्रियता से डरी हुई है। यही वजह है कि उन्हें बुनियादी मेडिकल सुविधाओं से भी वंचित रखने के आरोप लग रहे हैं।
अन्य मोर्चों पर भी जारी है बयानबाजी
सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों की राजनीति में भी इन बयानों का असर दिख रहा है। भारतीय राजनीति में भी इमरान नाम से जुड़े नेताओं के बयानों पर चर्चाएं गर्म हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल ही में बंगाल के राजनीतिक हालात का हवाला देते हुए केंद्र सरकार पर तीखा निशाना साधा है। इन बयानों ने चुनावी राज्यों में राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। नेता एक-दूसरे पर जमकर राजनीतिक रोटियां सेक रहे हैं।
जमीनी स्तर पर आम जनता बढ़ती महंगाई और राजनीतिक ड्रामे से परेशान है। देश की जनता का ध्यान अब पूरी तरह से आगामी चुनावों और अदालती फैसलों पर टिका हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और ज्यादा गहरा सकता है। सरकार और विपक्ष के बीच चल रही इस खींचतान का सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है।
प्रशासन की कड़ी चौकसी और आगामी कदम
सुरक्षा एजेंसियों ने राजधानी और संवेदनशील इलाकों में पहरा और कड़ा कर दिया है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है। आने वाले समय में अदालती फैसलों और राजनीतिक दलों की रणनीतियों से ही तय होगा कि देश का अगला सियासी रुख क्या होगा।





