वाशिंगटन/ग्राउंड ब्यूरो — अमेरिका की न्याय व्यवस्था और जेल प्रशासन इस समय एक हैरान करने वाले मामले से जूझ रहा है। मौत की सजा पा चुकी क्रिस्टा पाइक नाम की महिला को जब घातक जहर का इंजेक्शन दिया गया, तब भी उसकी जान नहीं गई। वकीलों का ताजा दावा है कि दोहरी खुराक मिलने के बाद भी जिंदा बची इस महिला को अब पूरी तरह होश आ गया है। इस चौंकाने वाली घटना के सामने आने के बाद से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और कानूनी जानकारों के बीच बहस छिड़ गई है।
शुरुआती मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सजा पर अमल करने के दौरान डॉक्टरों और जेल के अधिकारियों से भारी चूक हुई है। जानकारों का कहना है कि या तो मौत की सजा देने में इस्तेमाल होने वाली दवाएं बहुत घटिया गुणवत्ता की थीं, या फिर वे कैदी के खून की नसों तक सही तरीके से पहुंच ही नहीं पाईं। यही वजह है कि जहरीला इंजेक्शन शरीर में जाने के बाद भी क्रिस्टा पाइक की सांसें चलती रहीं और उसकी मौत टल गई।
क्रिस्टा पाइक कौन है और क्या है पूरा मामला
क्रिस्टा पाइक वही महिला कैदी है जिसे करीब दो दशक पहले एक भयानक जुर्म के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। इतने लंबे समय तक जेल की कोठरी में रहने के बाद जब उसे फंदे या इंजेक्शन की प्रक्रिया से गुजरना था, तो यह अजीब हादसा सामने आया। करीब बीस साल पहले उसने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में अपनी जिंदगी और गुनाह के बारे में खुलकर बात की थी। आज इतने साल बाद अचानक उसके जिंदा बचने की खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान फिर से अपनी ओर खींच लिया है।
अमेरिकी अदालतों में अब इस बात पर लंबी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है कि क्या किसी इंसान को दोबारा मौत की सजा देना क्रूरता है या नहीं। अमेरिकी कानून के जानकारों का मानना है कि किसी भी कैदी को इस तरह की शारीरिक और मानसिक यातना देना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। वकीलों की टीम लगातार अदालत में दलील दे रही है कि सरकार को इस तरह की दर्दनाक सजा देने की पुरानी और विफल प्रणालियों को तुरंत बंद करना चाहिए।
जहरीले इंजेक्शन की विफलता पर उठते बड़े सवाल
इस पूरी घटना ने अमेरिका की जेलों में इस्तेमाल होने वाले मेडिकल तरीकों पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। कई चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि दवाइयों के रख-रखाव में भारी लापरवाही बरती गई होगी। अमूमन ऐसी सजा देने से पहले दवाओं की ताकत और शुद्धता की कई स्तरों पर जांच की जाती है, लेकिन इस मामले में सब कुछ फेल साबित हुआ। जेल प्रशासन इस मामले में अभी तक कोई भी सीधा और संतोषजनक जवाब देने से बचता नजर आ रहा है।
आम जनता और स्थानीय नागरिकों के बीच भी इस बात को लेकर भारी नाराजगी और हैरानी है कि देश की न्याय प्रणाली इतनी कमजोर कैसे हो सकती है। लोग यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि सजा देने की प्रक्रिया इतनी त्रुटिपूर्ण है, तो निर्दोष या दोषी लोगों के जीवन के साथ इस तरह का खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है। आने वाले दिनों में अमेरिकी अदालत इस मामले में कोई बड़ा और सख्त फैसला सुना सकती है।
अब आगे क्या होगी कानूनी कार्रवाई
द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल के मुताबिक, क्रिस्टा पाइक के वकीलों ने अदालत में एक नई याचिका दायर करने की तैयारी पूरी कर ली है। वे चाहते हैं कि इस तरह की दर्दनाक सजा को हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाए और उम्रकैद में बदल दिया जाए। आने वाले हफ्तों में इस हाई-प्रोफाइल मामले पर देश और दुनिया की अदालत की निगाहें टिकी रहेंगी कि अमेरिका का न्याय विभाग इस पर क्या रुख अपनाता है।




