नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश में इस साल मानसून को लेकर बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग ने ताजा आंकड़े जारी कर बताया है कि इस बार बारिश समय से पहले देश के कई हिस्सों को भिगो सकती है। पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी और लू से परेशान आम जनता के लिए यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिणी राज्यों में मानसून की एंट्री के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बन रही हैं।
हमारे फील्ड रिपोर्टर ने मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों से बात की है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल समुद्र में हवा का रुख मानसून के पक्ष में तेजी से काम कर रहा है। केरल के तट पर मानसून के समय से दो-तीन दिन पहले पहुंचने की पूरी संभावना जताई जा रही है। पिछले साल की तुलना में इस बार बादलों की चाल काफी तेज और मजबूत नजर आ रही है। इससे देश के कृषि क्षेत्रों को भी समय पर पानी मिलने की पूरी उम्मीद बंध गई है।
किसानों के चेहरे पर लौटी मुस्कान और खेतों में तैयारी
मानसून के समय पर आने की खबर मिलते ही देश के अन्नदाताओं ने राहत की सांस ली है। उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के गांवों में किसानों ने अभी से खेतों की जुताई शुरू कर दी है। पिछले साल बारिश में देरी और बीच में सूखे जैसे हालात के कारण फसलों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर बारिश होने से धान और दलहन की पैदावार बहुत अच्छी होगी। ग्रामीण इलाकों में खाद और बीजों की दुकानों पर भी किसानों की भीड़ अभी से जुटने लगी है।
स्थानीय बाजारों में भी मानसून की चर्चा जोरों पर है और लोग गर्मी से निजात पाने के उपायों पर बात कर रहे हैं। हालांकि मौसम विभाग ने यह भी चेताया है कि मानसून के शुरुआती दिनों में कुछ जगहों पर भारी आंधी और तेज चमक के साथ बिजली गिर सकती है। इसके लिए राज्य सरकारों ने आपदा प्रबंधन टीमों को अभी से अलर्ट मोड पर रख दिया है। खासकर तटीय इलाकों में मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
शहरों में जलभराव और ट्रैफिक की चुनौती से निपटने की तैयारी
गांवों के अलावा देश के बड़े महानगरों में भी मानसून को लेकर नगर निगमों की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहरों में हर साल बारिश के दौरान सड़कों पर पानी भरने की बड़ी समस्या सामने आती है। इस बार जिला प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने नालों की सफाई का काम समय से पहले पूरा करने का दावा किया है। जनता का हालांकि मानना है कि कागजी दावों के अलावा जमीन पर हकीकत पहली बारिश के बाद ही पूरी तरह साफ हो पाएगी।
मेट्रो शहरों में रहने वाले लोग हर साल की तरह इस बार भी जलभराव और ट्रैफिक जाम को लेकर डरे हुए हैं। कई इलाकों में अभी भी सीवर और ड्रेनेज लाइन ठीक करने का काम अधूरा पड़ा हुआ है। यदि समय से पहले मानसून आ गया तो इन अधूरे कामों के कारण जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इन सभी इलाकों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और पल-पल की जमीनी सच्चाई आप तक पहुंचाती रहेगी।
स्वास्थ्य विभाग और बिजली कंपनियों के सामने क्या हैं नए इम्तिहान
मानसून के आते ही देश में मलेरिया, डेंगू और पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा अचानक से काफी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों के अस्पतालों को अभी से पर्याप्त मात्रा में दवाइयां और जरूरी बेड आरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। गंदे पानी की सप्लाई और मच्छरों के पनपने से रोकने के लिए स्थानीय निकायों को फॉगिंग और सफाई अभियान तेज करने को कहा गया है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस मौसम में केवल उबला हुआ पानी पिएं और बाहर के कटे हुए फल खाने से बचें।
दूसरी तरफ बिजली वितरण कंपनियों के सामने भी मानसून के दौरान निर्बाध बिजली सप्लाई बनाए रखना एक बड़ी चुनौती रहेगा। तेज आंधी और हवा चलने से कई जगहों पर पेड़ गिरने के कारण बिजली के तार टूट जाते हैं और घंटों बत्ती गुल हो जाती है। बिजली विभाग ने इस बार फॉल्ट सुधारने वाली टीमों की संख्या दोगुनी कर दी है ताकि शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई की जा सके। आम जनता को भी सलाह दी गई है कि वे बारिश के मौसम में बिजली के खंभों और ट्रांसफार्मर से दूर रहें।







