नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — पश्चिम एशिया के बेहद संवेदनशील समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सरकार को एक बहुत बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक झटका लगा है। ईरान ने इस अहम जलडमरूमध्य से गुजरने वाले विदेशी जहाजों पर नया टोल या टैक्स लगाने की योजना बनाई थी। दुनिया के तमाम देशों ने ईरान के इस एकतरफा फैसले का पुरजोर विरोध किया है। अब लगभग 60 देशों ने एक मंच पर आकर साफ कह दिया है कि वे होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह की अतिरिक्त फीस या टोल को बिल्कुल नहीं मानेंगे। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग समुदाय और वैश्विक ताकतों के इस कड़े रुख से ईरान की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
समुद्री व्यापार पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आने वाले कच्चे तेल पर निर्भर है। ईरान ने पिछले कुछ हफ्तों में इस रूट से निकलने वाले कमर्शियल जहाजों पर फीस वसूलने के संकेत दिए थे। ईरान का तर्क था कि इस समुद्री रास्ते की सुरक्षा और रखरखाव के एवज में जहाजों को भुगतान करना चाहिए। लेकिन वैश्विक व्यापार जगत और कई बड़ी महाशक्तियों ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि इस तरह के रास्तों पर किसी एक देश का एकाधिकार नहीं हो सकता है।
साठ देशों का संयुक्त मोर्चा और ईरान की रणनीति पर संकट
इस पूरे विवाद के बीच करीब 60 देशों ने एक साझा बयान जारी कर ईरान के खिलाफ सख्त नाराजगी जताई है। इन देशों का साफ कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है। यहां किसी भी देश को मनमाने ढंग से टैक्स वसूलने की छूट नहीं दी जा सकती है। अगर ईरान अपने इस फैसले पर अड़ा रहता है, तो वैश्विक स्तर पर उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा, समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसैनिक गश्त भी बढ़ाई जा सकती है। ईरान के लिए यह स्थिति बेहद पेचीदा हो गई है क्योंकि उसकी अर्थव्यवस्था पहले से ही भारी दबाव में है और इस विरोध के बाद उसे बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस रास्ते से रोजाना करोड़ों बैरल तेल दुनिया के अलग-अलग कोनों में भेजा जाता है। यदि यहां किसी भी प्रकार का तनाव बढ़ता है, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे। यही वजह है कि भारत समेत कई एशियाई और पश्चिमी देश इस मामले पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं। भारत की एक बड़ी ऊर्जा जरूरत इसी रास्ते से पूरी होती है। ऐसे में जहाजों की आवाजाही में रुकावट या अतिरिक्त खर्च भारतीय बाजार के लिए भी चिंता का विषय बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों का कहना है कि ईरान पर कूटनीतिक दबाव लगातार बनाया जा रहा है ताकि वह अपने इस फैसले को वापस ले ले।
वैश्विक शिपिंग कंपनियों और व्यापार पर पड़ने वाला सीधा असर
ईरान के इस कदम से दुनिया भर की शिपिंग कंपनियों में भारी हड़कंप मच गया है। कंपनियां पहले ही रूस-यूक्रेन युद्ध और लाल सागर के रास्तों पर सुरक्षा संकट का सामना कर रही हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में नया टोल टैक्स जुड़ जाने से माल ढुलाई का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाता। इस अतिरिक्त खर्च का सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर पड़ता क्योंकि हर सामान की कीमतें बढ़ जातीं। साठ देशों के विरोध के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तेहरान प्रशासन इस अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकता है या फिर अपने फैसले पर कायम रहता है।
स्थानीय रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के इनपुट के मुताबिक, आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक मंचों पर गरमागरम बहस हो सकती है। खाड़ी देशों में शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक बातचीत के रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ के देश भी इस मोर्चे पर बेहद सतर्कता बरत रहे हैं। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी और भू-राजनीतिक पड़ताल से साफ है कि आने वाला समय अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बहुत संवेदनशील रहने वाला है। भारत और अन्य विकासशील देश यही चाहते हैं कि इस रास्ते पर आवाजाही बिना किसी रोक-टोक और अतिरिक्त शुल्क के जारी रहे।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भविष्य की कूटनीतिक हलचल
होर्मुज स्ट्रेट के मौजूदा हालात को देखते हुए कई देशों ने अपनी नौसेना के जहाजों को इस इलाके के पास तैनात करना शुरू कर दिया है। इसका मकसद व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और किसी भी आपात स्थिति से निपटना है। ईरान की तरफ से अभी तक इस साठ देशों के विरोध पर कोई आधिकारिक और अंतिम बयान सामने नहीं आया है। लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वैश्विक विरोध के चलते ईरान की यह योजना ठंडे बस्ते में जा सकती है।
पत्रकारिता के लिहाज से यह घटना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक-दूसरे से कितनी गहराई से जुड़ी हुई है। किसी भी एक समुद्री रास्ते पर पैदा हुआ छोटा सा गतिरोध पूरी दुनिया की रफ्तार को धीमा कर सकता है। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर आगे भी अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और आपको हर नए अपडेट से समय पर अवगत कराता रहेगा।






