नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — आज सुबह से ही भारत के इंटरनेट यूजर्स के बीच 'नार्निया' शब्द अचानक तेजी से सर्च किया जाने लगा है। लोग गूगल पर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर अचानक से यह नाम हर जगह चर्चा में क्यों आ गया है। द फ्रीलान्स की शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि किसी एक बड़ी घटना के बजाय कई अलग-अलग और दिलचस्प वजहों से यह नाम एक साथ ट्रेंडिंग लिस्ट में ऊपर आ गया है। इसमें पुरानी जादुई फिल्मों की यादों से लेकर अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के सीक्रेट ऑपरेशन और देश के किसी कोने में स्कूल की बदहाली तक के मामले शामिल हैं।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सबसे बड़ा कारण बच्चों की लोकप्रिय फंतासी फिल्म 'द क्रॉनिकल्स ऑफ नार्निया: द लायन, द विच एंड द वार्डरोब' का अचानक से सर्च होना है। साल 2005 में आई इस बेहतरीन एडवेंचर फिल्म को दर्शक आज भी ओटीटी और टेलीविजन पर बहुत पसंद करते हैं। इस फिल्म की रेटिंग आईएमडीबी पर करीब 6.9 है जो इसकी लोकप्रियता को साफ दिखाती है। वीकेंड की शुरुआत होते ही परिवार और बच्चों के बीच इस फंतासी और जादुई दुनिया को देखने का क्रेज फिर से बढ़ गया है। लोग सोशल मीडिया पर इसके किरदारों और सीन को लेकर आपस में चर्चा कर रहे हैं जिससे यह सर्च इंजन में टॉप पर पहुंच गई है।
मोसाद के सीक्रेट ऑपरेशन से जुड़ा कनेक्शन
इस ट्रेंड के पीछे केवल फिल्में ही नहीं बल्कि कुछ गंभीर भू-राजनीतिक और खुफिया मामले भी जिम्मेदार हैं। हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के एक पुराने और बेहद खतरनाक सीक्रेट मिशन को 'ऑपरेशन नार्निया' के नाम से याद किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस अभियान में मोसाद की 120 लोगों की विशेष टीम ने ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया था। इस पुरानी लेकिन सनसनीखेज कहानी के सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल होने से इंटरनेट यूजर्स ने इसके बारे में बड़े पैमाने पर जानकारी खोजना शुरू कर दिया है।
अंतरराष्ट्रीय खबरों के अलावा भारत के स्थानीय मुद्दों ने भी इस ट्रेंड को हवा देने का काम किया है। राजस्थान के डूंगरपुर जिले से आई एक खबर ने स्थानीय स्तर पर 'नरनिया' नाम के स्कूल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इस सरकारी स्कूल की इमारत की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। अपनी इस बड़ी समस्या को लेकर गुस्साए ग्रामीणों ने हाल ही में जिला कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और स्कूल की मरम्मत या नई वैकल्पिक व्यवस्था की मांग उठाई। इस स्थानीय विरोध प्रदर्शन की खबरों ने भी सर्च इंजन पर इस शब्द की रीच को काफी बढ़ा दिया है।
मौसम के पूर्वानुमान में भी चमक रहा है नाम
भौगोलिक और मौसम से जुड़ी खोज में भी इस शब्द का दिलचस्प इस्तेमाल देखने को मिल रहा है। अमेरिका के मेरीलैंड राज्य में स्थित 'नार्निया' नाम की एक छोटी जगह के अगले तीन दिनों के मौसम पूर्वानुमान को लेकर भी लोग ऑनलाइन जानकारी तलाश रहे हैं। एक्कूवेदर जैसी मौसम एजेंसियों पर इस क्षेत्र के तापमान और बारिश के हाल को देखने के लिए बड़ी संख्या में ट्रैफिक आ रहा है। इन सभी वैश्विक और स्थानीय कारणों के एक साथ मिलने से यह नाम अचानक इंटरनेट की दुनिया में छाया हुआ है।
द फ्रीलान्स की जमीनी और डिजिटल पड़ताल से यह साफ हो जाता है कि गूगल ट्रेंड्स पर दिखने वाले नतीजे हमेशा किसी एक घटना से नहीं जुड़े होते हैं। कभी-कभी सिनेमा का पुराना जादू, अंतरराष्ट्रीय राजनीति की गुप्त कहानियां, स्थानीय स्तर की प्रशासनिक समस्याएं और मौसम की जानकारी जैसे कई अलग-अलग विषय मिलकर किसी एक शब्द को ट्रेंडिंग बना देते हैं। इंटरनेट की यह दुनिया बहुत विविधता से भरी हुई है जहां एक ही नाम के पीछे फंतासी की दुनिया भी छिपी है और असल जिंदगी के कड़वे सच भी।




