नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में इस समय एक नया भूचाल आ गया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी एआईएसए की नेत्री नेहा बोरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। इस वीडियो में नेहा बोरा यह कहती नजर आ रही हैं कि बांग्लादेश का हालिया जन आंदोलन भारत के युवाओं और जेन जेड के लिए एक बड़ा रास्ता दिखाता है। उन्होंने खुलेआम यह बयान दिया कि भारत में भी इस तरह के बदलाव की जरूरत है और मुख्य मकसद सत्ता में बड़ा बदलाव लाना होना चाहिए। इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है और माहौल पूरी तरह गरमा गया है।
इस पूरे मामले पर भारतीय जनता पार्टी यानी बीजेपी ने बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नेहा बोरा और उनके संगठन पर सीधा हमला बोला है। पार्टी का साफ कहना है कि वामपंथी संगठन और विपक्षी दल देश के भीतर किसी विदेशी साजिश की तर्ज पर हिंसा और अराजकता फैलाने की सुनियोजित कोशिश कर रहे हैं। बीजेपी ने इसे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनी हुई सरकार को गिराने की एक खतरनाक साजिश करार दिया है। सत्ताधारी दल का यह भी आरोप है कि इस तरह के बयानों से देश की आंतरिक सुरक्षा और शांति को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लुटियंस दिल्ली में विरोध प्रदर्शन और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग
एक तरफ जहां नेहा बोरा के बयान पर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ लुटियंस दिल्ली में भी माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा के कड़े घेरे और बैरिकेड्स को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस और सुरक्षा बलों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया है। दिल्ली की सड़कों पर चल रहे इस ड्रामे ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोक भी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए शीर्ष अधिकारियों का जवाबदेह होना जरूरी है। वहीं दूसरी तरफ, चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे पूरी पारदर्शिता और नियमों के दायरे में रहकर काम कर रहे हैं। अधिकारियों की भूमिका को लेकर चल रहे इस विवाद के बीच आयोग ने अपनी आंतरिक बैठकों में कई अहम फैसले भी लिए हैं ताकि प्रशासनिक मशीनरी पर जनता का भरोसा कायम रह सके।
अंतरराष्ट्रीय बैठकों और कूटनीति के बीच घरेलू राजनीति का उबाल
एक तरफ जहां देश की राजधानी में विरोध प्रदर्शन और बयानों की राजनीति उफान पर है, वहीं दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर की बड़ी बैठकें भी चल रही हैं। दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स समिट के बीच राजनीतिक मुलाकातों का दौर भी लगातार जारी है। इसी सिलसिले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने मलेशियाई प्रधानमंत्री के साथ सुबह का नाश्ता किया और कई अहम मुद्दों पर द्विपक्षीय चर्चा की। हालांकि घरेलू राजनीति में चल रहे हंगामे के कारण इन अंतरराष्ट्रीय मुलाकातों पर भी राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और हर कोई इसके सियासी मायने निकालने में जुटा है।
जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि आम जनता से लेकर राजनीतिक विश्लेषक तक इस बात पर बहस कर रहे हैं कि देश की युवा पीढ़ी को किस तरह की वैचारिक प्रेरणा दी जानी चाहिए। एक तरफ वामपंथी छात्र संगठन युवाओं को सड़कों पर उतरने और बड़े बदलाव की बात कह रहे हैं, तो दूसरी तरफ सत्ताधारी पार्टी इसे राष्ट्र विरोधी और अराजक प्रवृत्ति मान रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी पारा और ज्यादा चढ़ने की पूरी उम्मीद है क्योंकि विभिन्न दल इस मामले को अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और हर नए अपडेट से आपको अवगत कराती रहेगी।







